{"_id":"5beb2e75bdec2269bb420885","slug":"121542139509-gorakhpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"छठ घाटों पर नजर आई अलौकिक छटा, व्रती महिलाओं ने सूर्य को समर्पित किया अर्घ्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छठ घाटों पर नजर आई अलौकिक छटा, व्रती महिलाओं ने सूर्य को समर्पित किया अर्घ्य
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Wed, 14 Nov 2018 01:35 AM IST
विज्ञापन
छठ पूजा
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सूर्योपासना के महापर्व के तीसरे दिन छठ घाटों पर अलौकिक छटा नजर आई। राप्ती नदी तट, गोरखनाथ मंदिर के भीम सरोवर, रामगढ़ताल, सूरजकुंड, महेसरा, तकियाघाट और शहर में कई स्थानें पर स्थित पोखरों के पानी में खड़े होकर व्रती महिलाओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया और परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। इस दौरान छठ गीतों ...मारबो रे सुगवा धनुष से सुगा गिरे मुरझाय..., हे छठी मइया हर लीं बलैया..., केरवा जे फरेला घवद में..., कांच ह बांस क बहंगिया लचकत जाए... से घाट और उसके आसपास के क्षेत्र गूंज उठे। राप्ती नदी के किनारे भक्तों का ऐसा सैलाब उमड़ा की पैदल चलना भी मुश्किल हो गया।
मंगलवार को व्रतियों के घर में सुबह से ही चहल-पहल रही। परिवार का हर सदस्य सहयोग में जुटा रहा। जो कुछ सामग्री नहीं आई थी, उसे बाजार से मंगाया गया। दोपहर से ही घाट पर जाने की तैयारी शुरू हो गई। दोपहर बाद महिलाएं परिवारीजनों के साथ मंगल गीत गाती नदी घाटों पर पहुंचीं और पहले से बनी वेदिकाओं के सम्मुख विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। इसके बाद पूजन सामग्री से भरा डाला लेकर टोलियों में छठ माता व सूर्यदेव का ध्यान लगाकर बैठ गईं।
जैसे ही सूर्य अस्ताचल की ओर जाते दिखे, घुटने भर पानी में खड़ी महिलाओं ने सहयोगी की मदद से फल और पूजन सामग्री की डलिया हाथ में ले लिया। दूसरे हाथ से अपने केश की लट हाथ में लेे अर्घ्य देना शुरू कर दिया। व्रती महिलाओं ने भगवान भाष्कर की पूजा के बाद घाट पर गन्ने के मंडप तले वेदी बनाकर छठ माता की पिंडी बनाई।पूजन किया। आरती उतारी और नैवेद्य के रूप में नारियल, फल-फूल, मिठाई, ठेकुआ आदि अर्पित किया और मनोवांछित वरदान मांगा। इस दौरान महिलाओं ने घाटों पर दीपदान किया। दीयों की झिलमिलाती रोशनी, आतिशबाजी और भक्तिगीतों से घाटों पर छटा अनुपम हो गई। अर्घ्य देने के बाद महिलाएं पुन: गीत गाते हुए अपने अपने घर लौट गईं।
विज्ञापन
विज्ञापन
मंगलवार को व्रतियों के घर में सुबह से ही चहल-पहल रही। परिवार का हर सदस्य सहयोग में जुटा रहा। जो कुछ सामग्री नहीं आई थी, उसे बाजार से मंगाया गया। दोपहर से ही घाट पर जाने की तैयारी शुरू हो गई। दोपहर बाद महिलाएं परिवारीजनों के साथ मंगल गीत गाती नदी घाटों पर पहुंचीं और पहले से बनी वेदिकाओं के सम्मुख विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। इसके बाद पूजन सामग्री से भरा डाला लेकर टोलियों में छठ माता व सूर्यदेव का ध्यान लगाकर बैठ गईं।
विज्ञापन
जैसे ही सूर्य अस्ताचल की ओर जाते दिखे, घुटने भर पानी में खड़ी महिलाओं ने सहयोगी की मदद से फल और पूजन सामग्री की डलिया हाथ में ले लिया। दूसरे हाथ से अपने केश की लट हाथ में लेे अर्घ्य देना शुरू कर दिया। व्रती महिलाओं ने भगवान भाष्कर की पूजा के बाद घाट पर गन्ने के मंडप तले वेदी बनाकर छठ माता की पिंडी बनाई।पूजन किया। आरती उतारी और नैवेद्य के रूप में नारियल, फल-फूल, मिठाई, ठेकुआ आदि अर्पित किया और मनोवांछित वरदान मांगा। इस दौरान महिलाओं ने घाटों पर दीपदान किया। दीयों की झिलमिलाती रोशनी, आतिशबाजी और भक्तिगीतों से घाटों पर छटा अनुपम हो गई। अर्घ्य देने के बाद महिलाएं पुन: गीत गाते हुए अपने अपने घर लौट गईं।
विज्ञापन