फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   हंसाकर भ्रष्टाचार से उपजे अवसाद तक ले गया ताजमहल का टेंडर

हंसाकर भ्रष्टाचार से उपजे अवसाद तक ले गया ताजमहल का टेंडर

Thu, 05 Oct 2017 01:32 AM IST
Updated Thu, 05 Oct 2017 01:32 AM IST
विज्ञापन
हंसाकर भ्रष्टाचार से उपजे अवसाद तक ले गया ताजमहल का टेंडर

विज्ञापन
गोरखपुर।
‘ताजमहल का टेंडर’ ने बुधवार की शाम शहवासियों को गुदगुदाकर मौजूदा दौर की भ्रष्टाचारी व्यवस्था पर व्यंग्य किया। रेलवे के अफसर अजय शुक्ल की लेखनी से निकला यह नाटक उन कुछेक हिंदी नाटकों में से एक है, जिसका रंगकर्म से जुड़ी विभिन्न संस्थाओं ने सर्वाधिक बार मंचन किया है। संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से अभियान संस्था और एनएसएस के संयुक्त तत्वावधान में गोरखपुर यूनिवर्सिटी के दीक्षा भवन में पेश किए गए इस नाटक को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे।
श्रीनारायण निर्देशित इस नाटक के कथानक की शुरुआत मुगल बादशाह शाहजहां की अपनी प्रिय बेगम मुम्मो (मुमताज महल) की याद में ताजमहल तामीर करवाने की बात से होती है। अंतर बस यह होता है कि बादशाह आज की व्यवस्था में यह ख्वाब देखता है। बादशाह के अलावा अन्य सभी पात्र मौजूदा दौर के होते हैं। बादशाह चीफ इंजीनियर गुप्ता जी से इस बारे में बात करते हैं। गुप्ता जी की ओर से बादशाह को ताजमहल का टेंडर कराने का सुझाव दिया जाता है। बादशाह का हुक्म और ख्वाब रिश्वत पर टिके सिस्टम की फाइलों में उलझ जाता है। नाटक का कथानक दर्शकों को जमकर हंसाते हुए अंत में उस हालात तक ले जाता है, जिसमें फंसकर आम आदमी कराह रहा है। टेंडर की प्रक्रिया शुरू होने तक की स्थिति आने में 25 साल गुजर जाते हैं। नाटक के अंत में शाहजहां अपनी बेगम की याद में बने मकबरे को देखने का ख्वाब लिए मर जाता है। इस पर गुप्ता जी का नौकर सुधीर उनसे पूछ बैठता है, सर अब क्या होगा? जवाब मिलता है, ‘कुछ नहीं सुधीर, इस देश को गुप्ता ही चलाते आए हैं और आगे भी गुप्ता ही चलाते रहेंगे।’
विज्ञापन


इनकी प्रतिभा ने कथानक को किया जीवंत
आकश यादव-शाहजहां, सुमितेंद्र-गुप्ता जी, विपिन यादव-नेता की भूमिका में सशक्त अभिनय कर गए। मुमताज बनी नेहा भाष्कर ने भी अपने अभिनय से खूब तालियां बटोरीं। यादवेंद्र यादव, कनक, कलश, सत्यम कुशवाहा, कृष्णा राज, गर्विता राय, नारायणी मौर्य, रामकिशोर यादव, अंशिका मिश्रा, विशाल यादव, बालेंद्र कन्नौजिया, अनूप चंद्र प्रजापति, सुभांषु यादव, रामअशीष, उदीक्ष पांडेय और शिवम गुप्ता ने भी अपने पात्रों से न्याय किया। लाइट संजय यादव और मेकअप व सेट डिजाइन राहुल प्रजापति ने किया। संगीत अभिनव मोदनवाल ने दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


19 साल से तालियां बटोर रहा कथानक
1998 में एनएसडी (राष्ट्रीय नाट्य अकादमी) में पहली बार मंचित हुए इस नाटक ने थिएटर की दुनिया में हलचल मचा दी थी। दर्शकों को जमकर हंसाने वाले इस नाटक की कामयाबी की वजह इसमें गुंथे गहरे संदेश और साहित्यिक मूल्य भी हैं। इस नाटक के जरिए अभियान संस्था की ओर से आयोजित 45 दिवसीय प्रस्तुतिपरक नाट्य प्रशिक्षण शिविर का औपचारिक समापन हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed