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स्लीप एप्निया रोक देता है बच्चों का विकास

Sun, 05 Nov 2017 01:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Sun, 05 Nov 2017 01:35 AM IST
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स्लीप एपनिया रोक देता है बच्चों का विकास
यूनिकॉन में मौजूद डॉक्टर। - फोटो : Amar Ujala
बच्चे रात में सोते वक्त खर्राटा लें और बिस्तर पर तेजी से करवट भी बदलें तो सचेत हो जाने की जरूरत है। ऐसे कुछ बच्चे बिस्तर पर पेशाब भी कर देते हैं। ये स्लीप एप्निया के लक्षण हैं। इसके चलते बच्चों की नींद पूरी नहीं हो पाती। इसका सीधा असर बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास पर पड़ता है। दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल के ईएनटी विभाग के उपाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र राय ने शनिवार को राजदीप ईएनटी हॉस्पिटल एवं माइक्रोसर्जरी सेंटर में ईएनटी डॉक्टरों के 35वें सेमिनार यूपीकॉन-2017 में व्याख्यान के दौरान कहीं।
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उन्होंने बताया कि स्वर ग्रंथी के दोनों तरफ टांसिल ग्लैंड होती है। मौसम बदलने पर बच्चों में टांसिल सूज जाता है। कई बार सूजन अधिक हो जाती है कि दोनों टांसिल सट जाते हैं। इससे फेफड़े और दिमाग में ऑक्सीजन का प्रवाह रुक जाता है। एक या दो मिनट ऐसा होता है, फिर खतरे का आभास करके दिमाग का संवेदी तंत्र हरकत में आ जाता है। इस दौरान बच्चे की नींद नहीं टूटती लेकिन सुबह उठने पर वह सुस्त नजर आता है। हालांकि, कुछ बच्चे आवश्यक्ता से अधिक चंचल भी होते पाए गए हैं। इसका इलाज ऑपरेशन से होता है। ऑपरेशन से दोनों टांसिल निकाल दिए जाते हैं। इस बीमारी के इलाज में दवाएं ज्यादा कारगर नहीं होती। हालांकि, 12 वर्ष के बाद टांसिल में सूजन कम होने लगता है। इसके बाद बच्चे का सामान्य विकास होता है।
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ईएनटी डॉक्टरों ने देखी लाइव सर्जरी
दूसरे दिन भी यूपीकॉन में लाइव सर्जरी आयोजित हुई। शनिवार को चार मरीजों के आपरेशन विशेषज्ञ डॉक्टरों ने किए। इसमें बहरापन, कान में स्राव, नाक में मांस का ऑपरेशन शामिल था। विशेषज्ञ एवं अनुभवी चिकित्सकों को लाइव सर्जरी करते देखना ईएनटी के नए डॉक्टरों के लिए बेहद उपयोगी अनुभव रहा।
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