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साहित्य समागाम में परमवीर चक्र विजेता मेजर योगेंद्र बोले, साहित्य ने दी सैनिक बनने की प्रेरणा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Sun, 11 Feb 2018 08:13 PM IST
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साहित्य समागम में जुटे वरिष्ठ लोग।
- फोटो : Amar Ujala
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दो दिवसीय साहित्य समागम का रविवार को संवाद भवन में समापन हो गया। बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमियों ने इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और सामाजिक सरोकारों से जुडे़ आयामों पर चर्चा की। दूसरे दिन आकर्षण का केंद्र परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मेजर योगेंद्र यादव रहे। कारगिल युद्ध में सात गोलियां और दो बमों के हमलों से बचकर निकले मेजर योगेंद्र ने कहा कि बचपन में उन्होंने वे साहित्य पढ़े, जिसने उन्हें सेना में जाने की प्ररेणा दी। उन्होंने कहा कि स्कूलों में सैनिकों की वीरगाथाएं पढ़ाने की जरूरत है, ताकि बच्चों में देशभक्ति का जज्बा जगे। वे डॉक्टर बनने के साथ ही सैनिक बनने की प्रेरणा भी ले सकें। उन्होंने कहा कि हथियार तो महज माध्यम है, लड़ाई तो विचारों की होती है।
इस दौरान रिटायर्ड मेजर जनरल शिव जायसवाल, रिटायर्ड कर्नल वीपीएस चौहान ने भी विचार रखे। संचालन सुप्रिया श्रीनेत ने किया। पहले गोरखपुर साहित्य समागम के दूसरे दिन पहले सत्र में आधुनिक भारत के निर्माण में बंगाल के साहित्यकारों व समाज सुधारकों के योगदान पर डॉ. रामकुमार मुखोपाध्याय और डॉ. पीके लहड़ी ने विचार रखे। दूसरे सत्र में गीता प्रेस के डॉ. लालमन तिवारी और महेश चंद, तीसरा सत्र सूबेदार मेजर योगेंद्र यादव के नाम रहा। चौथे सत्र में सत्र में कवि सम्मेलन व मुशायरों का वर्तमान स्वरूप, हिंदी और उर्दू : एक सिक्के के दो पहलू पर परिचर्चा में नवाब मीर जाफर अब्दुल्ला, अभिनेता राजा बुंदेला व कनक रेखा चौहान और पांचवें सत्र में छात्रसंघ की गैरमौजूदगी से समाज और साहित्य पर प्रभाव पर चर्चा हुई। इसमें राजमनी पांडेय, विश्वकर्मा द्विवेदी, शीतल पांडेय, राम सिंह व राधे श्याम सिंह ने भाग लिया। संचालन हर्षवर्धन फाउंडेशन के अध्यक्ष आनंदवर्धन सिंह ने किया।
गीता प्रेस पर नहीं कोई संकट : डॉ. लालमन
दूसरे सत्र में गीता प्रेस : हिंदी साहित्य बनाम हिंदू साहित्य, सुलभ हिंदी साहित्य में गीता प्रेस का योगदान विषय पर परिचर्चा में डॉ. लालमनी तिवारी ने कहा कि गीता प्रेस ने सर्वधर्म समभाव के लिए सदैव कार्य किया है और अब तक 1800 अलग-अलग विषयों की 66 करोड़ से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन 15 भाषाओं में किया है। उन्होंने कहा कि गीता प्रेस पर कोई आर्थिक संकट नहीं है और ऐसी अफवाहें केवल बदनाम करने की साजिश के तहत फैलाई गईं। महेश चंद्र शर्मा ने भी गीता प्रेस के योगदानों पर चर्चा की। संचालन डॉ. फूलचंद प्रसाद गुप्ता ने किया।
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साहित्य समागम में सामाजिक सरोकारों पर चर्चा जरुरी : शिवप्रताप
समापन समारोह में केंद्रीय मंत्री शिवप्रताप शुक्ला ने कहा कि यह साहित्य समागम देश में मील का पत्थर साबित होगा। यहां अंग्रेजियत हावी नहीं रही। सार्क भाषा को शामिल करना, भारतीय भाषा का विशेष सत्र आयोजित करना और सामाजिक सरोकारों पर चर्चाएं की गईं। सामाजिक सरोकारों पर चर्चाएं किए बिना कोई भी साहित्य समागम पूरा नहीं हो सकता है। मेयर सीताराम जायसवाल ने साहित्य समागम की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस आयोजन ने शहर को नई ऊंचाई देने का कार्य किया है।
इन पुस्तकों का हुआ विमोचन
गोरखपुर साहित्य समागम के आखिरी दिन लेखक हिमांशु राय की पुस्तक ‘माई क्यूट गर्लफ्रेंड’, डॉ. शक्ति सिंह की ‘सामान्य आहार एवं पोषण’, कलीम कैसर की ‘लफ्जों का पुल सीरत’, मनीष शुक्ला की ‘रोशनी जारी करो’ पुस्तकों का विमोचन हुआ।
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इस दौरान रिटायर्ड मेजर जनरल शिव जायसवाल, रिटायर्ड कर्नल वीपीएस चौहान ने भी विचार रखे। संचालन सुप्रिया श्रीनेत ने किया। पहले गोरखपुर साहित्य समागम के दूसरे दिन पहले सत्र में आधुनिक भारत के निर्माण में बंगाल के साहित्यकारों व समाज सुधारकों के योगदान पर डॉ. रामकुमार मुखोपाध्याय और डॉ. पीके लहड़ी ने विचार रखे। दूसरे सत्र में गीता प्रेस के डॉ. लालमन तिवारी और महेश चंद, तीसरा सत्र सूबेदार मेजर योगेंद्र यादव के नाम रहा। चौथे सत्र में सत्र में कवि सम्मेलन व मुशायरों का वर्तमान स्वरूप, हिंदी और उर्दू : एक सिक्के के दो पहलू पर परिचर्चा में नवाब मीर जाफर अब्दुल्ला, अभिनेता राजा बुंदेला व कनक रेखा चौहान और पांचवें सत्र में छात्रसंघ की गैरमौजूदगी से समाज और साहित्य पर प्रभाव पर चर्चा हुई। इसमें राजमनी पांडेय, विश्वकर्मा द्विवेदी, शीतल पांडेय, राम सिंह व राधे श्याम सिंह ने भाग लिया। संचालन हर्षवर्धन फाउंडेशन के अध्यक्ष आनंदवर्धन सिंह ने किया।
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गीता प्रेस पर नहीं कोई संकट : डॉ. लालमन
दूसरे सत्र में गीता प्रेस : हिंदी साहित्य बनाम हिंदू साहित्य, सुलभ हिंदी साहित्य में गीता प्रेस का योगदान विषय पर परिचर्चा में डॉ. लालमनी तिवारी ने कहा कि गीता प्रेस ने सर्वधर्म समभाव के लिए सदैव कार्य किया है और अब तक 1800 अलग-अलग विषयों की 66 करोड़ से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन 15 भाषाओं में किया है। उन्होंने कहा कि गीता प्रेस पर कोई आर्थिक संकट नहीं है और ऐसी अफवाहें केवल बदनाम करने की साजिश के तहत फैलाई गईं। महेश चंद्र शर्मा ने भी गीता प्रेस के योगदानों पर चर्चा की। संचालन डॉ. फूलचंद प्रसाद गुप्ता ने किया।
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साहित्य समागम में सामाजिक सरोकारों पर चर्चा जरुरी : शिवप्रताप
समापन समारोह में केंद्रीय मंत्री शिवप्रताप शुक्ला ने कहा कि यह साहित्य समागम देश में मील का पत्थर साबित होगा। यहां अंग्रेजियत हावी नहीं रही। सार्क भाषा को शामिल करना, भारतीय भाषा का विशेष सत्र आयोजित करना और सामाजिक सरोकारों पर चर्चाएं की गईं। सामाजिक सरोकारों पर चर्चाएं किए बिना कोई भी साहित्य समागम पूरा नहीं हो सकता है। मेयर सीताराम जायसवाल ने साहित्य समागम की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस आयोजन ने शहर को नई ऊंचाई देने का कार्य किया है।
इन पुस्तकों का हुआ विमोचन
गोरखपुर साहित्य समागम के आखिरी दिन लेखक हिमांशु राय की पुस्तक ‘माई क्यूट गर्लफ्रेंड’, डॉ. शक्ति सिंह की ‘सामान्य आहार एवं पोषण’, कलीम कैसर की ‘लफ्जों का पुल सीरत’, मनीष शुक्ला की ‘रोशनी जारी करो’ पुस्तकों का विमोचन हुआ।