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Ghazipur News: ‘पापा अइहें त खिलौना ले अइहें...’ इंतजार करती रह गईं मासूम बेटियां

Tue, 12 May 2026 12:11 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 12 May 2026 12:11 AM IST
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When Papa comes, he'll bring toys... His innocent daughters kept waiting in vain
जमानिया के चौधरी मोहल्ले में बच्चियों को गोद में बेसुध बैठी मृतक मंगरू चौधरी की पत्नी सोनी। संव
जमानिया। गरीबी से लड़ते हुए परिवार की किस्मत बदलने चेन्नई गए मंगरू चौधरी की रविवार की ट्रेन में गोली मारकर हत्या के बाद शव जब सोमवार को घर पहुंचा तो चौधरी मोहल्ले में चीख-पुकार मच गई।
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“पापा अइहें त खिलौना ले अइहें...” इस आस में दरवाजे पर टकटकी लगाए बैठीं पांच वर्ष की अनुशिका और दो वर्ष की अन्नू को क्या पता था कि अब उनके पिता कभी लौटकर नहीं आएंगे। पिता के शव से लिपटकर मां सोनी संग दोनों पुत्रियां बिलख पड़ीं। देर शाम नगर के बलुआ घाट पर जब बूढ़े पिता ने अपने जवान पुत्र की चिता को मुखाग्नि दी, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति फफक कर रो पड़ा।
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कोतवाली क्षेत्र के चौधरी मोहल्ला निवासी दूधनाथ के छोटे बेटे मंगरू ने अपने परिवार को गरीबी से निकालने और बड़ी हो रही दोनों बच्चियों को पढ़ाने का सपना देखा था। इसी आस में वह बीते 26 अप्रैल को मछली पालन का काम करने चेन्नई गया था, लेकिन वहां काम में मन न लगने के कारण उसने घर वापस लौटने का फैसला किया और आठ मई को ट्रेन से जमानिया के लिए निकल पड़ा था।
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घर पर पत्नी सोनी और उसकी दोनों पुत्रियां अपने पिता के लौटने का बेसब्री से इंतजार कर रही थीं। बच्चियों को आस थी कि उनके पिता उनके लिए खिलौने और टॉफी लाएंगे, लेकिन घर पिता नहीं, बल्कि उनका शव पहुंचा।
बलुआ घाट पर छलक उठीं हर किसी की आंखें

पोस्टमार्टम के बाद सोमवार की शाम जब मंगरू का शव जमानिया स्थित उसके पैतृक आवास चौधरी मोहल्ला लाया गया, तो परिजनों की चीत्कार से माहौल गमगीन हो गया। सोमवार शाम करीब पांच बजे नगर के बलुआ घाट पर भारी नम आंखों के बीच मंगरू का दाह संस्कार किया गया। बुढ़ापे से टूटे पिता दूधनाथ चौधरी के कांपते हाथों ने अपने जवान बेटे की चिता को मुखाग्नि दी। घाट पर मौजूद लोगों की आंखें यह मार्मिक दृश्य देखकर छलक उठीं। बड़े भाई अर्जुन चौधरी भी अपने छोटे भाई के वियोग में दहाड़ें मारकर रोते नजर आए।


सोनी की उजड़ी मांग, मासूमों का भविष्य हुआ अंधकारमय

पति की मौत की खबर के बाद से पत्नी सोनी सुध-बुध खो बैठी है। उसकी दुनिया पल भर में उजड़ गई। रो-रोकर बेहाल सोनी बस यही विलाप कर रही है कि अब वह अपनी इन दो अनाथ मासूम बच्चियों को लेकर कहां जाएगी और उन्हें कैसे पालेगी।
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