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पशु चिकित्सकों की टीम ने पशुओं का इलाज कर दवा का वितरण किया
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ब्लाक अंतर्गत सोनवल, रमवल, सुगवलिया, मिर्जापुर, अधियारां आदि गांवों में पशुओं में फैली खुरपका-मुंहपका बीमारी पर नियंत्रण को लेकर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी द्वारा गठित तीन सदस्यीय पशु चिकित्सकों की टीम ने बुधवार को डोर-टू-डोर जाकर पशुपालकों से इस बाबत जानकारी ली। कुल 188 पशुओं जिनमें 29 बकरी, छह गाय शेष 153 भैसों की जांच करने के साथ ही उनके पशुपालकों को बोरिक एसिड, मैगसल्फ, एलबेंडाजोल के साथ ही उन्हें ड्यूरा मैक्टीन का इंजेक्शन भी लगाया। गंभीर रूप से बीमारी से ग्रस्त 30 विभिन्न पशुओं के ब्लड के सैंपल वायल में लेकर उन्हें सीलबंद कर जांच के लिए भेज दिया।
चिकित्सकों ने पशुपालकों से आह्वान किया कि किसी तरह की बीमारी होने की आशंका के दृष्टिगत सरकारी पशु अस्पताल से चिकित्सकों की सलाह एवं जांच के बाद ही अपने पशुओं को दवा आदि दें। पशुओं को साफ-सुथरी जगहों पर रखें। उन्हें ताजा चारे खिलाने के अलावा बाहर खुली जगहों पर जानवरों के चारा खाते समय यह ध्यान देना होगा कि वह कोई जहरीली घास या वर्जित चारा न खाने पाएं। इस अवसर पर डा. आर पी सिंह, डा. राजपूत सतेंद्र सिंह, डा. संतोष पासवान, डा. शशिभूषण, सत्यप्रकाश सिंह, अंकित, रामभरोस मौजूद थे। इस संबंध में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. शिवकुमार रावत ने बताया कि गठित टीम द्वारा बीमारी से ग्रस्त गांवों में डोर-टू-डोर जाकर पशुओं का इलाज, दवा वितरण किया गया। तीस पशुओं के ब्लड सैंपल के रूप में जांच के लिए मथुरा-बरेली पशु मेडिकल कालेज एवं पशु लैब में भेजा जा रहा है ताकि बीमारी के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।
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चिकित्सकों ने पशुपालकों से आह्वान किया कि किसी तरह की बीमारी होने की आशंका के दृष्टिगत सरकारी पशु अस्पताल से चिकित्सकों की सलाह एवं जांच के बाद ही अपने पशुओं को दवा आदि दें। पशुओं को साफ-सुथरी जगहों पर रखें। उन्हें ताजा चारे खिलाने के अलावा बाहर खुली जगहों पर जानवरों के चारा खाते समय यह ध्यान देना होगा कि वह कोई जहरीली घास या वर्जित चारा न खाने पाएं। इस अवसर पर डा. आर पी सिंह, डा. राजपूत सतेंद्र सिंह, डा. संतोष पासवान, डा. शशिभूषण, सत्यप्रकाश सिंह, अंकित, रामभरोस मौजूद थे। इस संबंध में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. शिवकुमार रावत ने बताया कि गठित टीम द्वारा बीमारी से ग्रस्त गांवों में डोर-टू-डोर जाकर पशुओं का इलाज, दवा वितरण किया गया। तीस पशुओं के ब्लड सैंपल के रूप में जांच के लिए मथुरा-बरेली पशु मेडिकल कालेज एवं पशु लैब में भेजा जा रहा है ताकि बीमारी के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।
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