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रक्तदान कर गौरवान्वित हुए जनपदवासी
ब्यूरो, अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Tue, 26 Jul 2016 11:59 PM IST
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रक्तदान कर गौरवान्वित हुए जनपदवासी
अपने लिए सब सोचते हैं, लेकिन दूसरों के लिए सोचना बड़ी बात है। अगर हमारा थोड़ा खून किसी को जीवन दे सके, तो इससे बड़ा पुनीत काम और क्या होगा ? यह बात उन लोगों पर सटीक बैठती है, जो ‘अमर उजाला’ फाउंडेशन की ओर से मंगलवार को जिला चिकित्सालय में आयोजित रक्तदान शिविर में ब्लड डोनेट करने के लिए आए थे। जोश से लबरेज रक्तदाताओं के चेहरे पर जहां रक्तदान करने का गर्व था, साथ ही आंखों में इस बात की चमक थी कि हमारे खून से किसी की टूटती सांस जुड़ जाएगी।
जिला अस्पताल परिसर में आयोजित रक्तदान शिविर में सुबह साढ़े सात बजे से ही रक्तदाताओं के आने का क्रम शुरू हो गया था। नौ बजते-बजते यह संख्या 50 के पार पहुंच गई थी। रक्तदाताओं की भीड़ में युवाओं की संख्या सबसे अधिक रही। हर कोई उत्सुक था कि वह रक्तदान कर इस पवित्र कार्य का हिस्सा बने। रक्तदान शिविर आरंभ होते ही वार्ड में लगे 12 बेड एक साथ भर गए। जबकि अन्य रक्तदाता अपनी बारी की प्रतीक्षा करने के लिए खड़े थे।
जैसे ही रक्तदाताओं से बेड खाली हो रहा था, प्रतीक्षा में खड़े लोग बेड पर आकर रक्तदान के लिए सो जा रहे थे। आलम यह था कि एक दर्जन लोग रक्तदान करके जैसे ही बेड से उठकर बाहर आ रहे थे, उससे अधिक लोग रक्तदान करने के लिए पहुंच जा रहे थे। रक्तदान करने पहुंचे कई लोगों को दूर जाना था, कुछ सरकारी नौकरी वाले भी थे। बावजूद इसके घंटों इंतजार करते रहे।लोगों की संख्या अधिक देख स्वास्थ्य कर्मी भी घबराए हुए थे।
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उन्होंने बहुतों को ड्यूटी करने तथा अन्य काम करके आने को कहा, लेकिन लोग तपाक से बोल रहे थे कि हमारे लिए इस महादान से बड़ा कोई काम नहीं है।
हम इंतजार करेंगे और रक्तदान के बाद ही यहां से जाएंगे। उनकी यह बात सुन रक्तदान के काम में लगे चिकित्सकों का सीना भी चौड़ा हो जा रहा था। वह बोल पड़े, पहली बार हम लोग रक्तदान के लिए लोगों में इस तरह का जोश देख रहे हैं।
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जिला अस्पताल परिसर में आयोजित रक्तदान शिविर में सुबह साढ़े सात बजे से ही रक्तदाताओं के आने का क्रम शुरू हो गया था। नौ बजते-बजते यह संख्या 50 के पार पहुंच गई थी। रक्तदाताओं की भीड़ में युवाओं की संख्या सबसे अधिक रही। हर कोई उत्सुक था कि वह रक्तदान कर इस पवित्र कार्य का हिस्सा बने। रक्तदान शिविर आरंभ होते ही वार्ड में लगे 12 बेड एक साथ भर गए। जबकि अन्य रक्तदाता अपनी बारी की प्रतीक्षा करने के लिए खड़े थे।
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जैसे ही रक्तदाताओं से बेड खाली हो रहा था, प्रतीक्षा में खड़े लोग बेड पर आकर रक्तदान के लिए सो जा रहे थे। आलम यह था कि एक दर्जन लोग रक्तदान करके जैसे ही बेड से उठकर बाहर आ रहे थे, उससे अधिक लोग रक्तदान करने के लिए पहुंच जा रहे थे। रक्तदान करने पहुंचे कई लोगों को दूर जाना था, कुछ सरकारी नौकरी वाले भी थे। बावजूद इसके घंटों इंतजार करते रहे।लोगों की संख्या अधिक देख स्वास्थ्य कर्मी भी घबराए हुए थे।
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उन्होंने बहुतों को ड्यूटी करने तथा अन्य काम करके आने को कहा, लेकिन लोग तपाक से बोल रहे थे कि हमारे लिए इस महादान से बड़ा कोई काम नहीं है।
हम इंतजार करेंगे और रक्तदान के बाद ही यहां से जाएंगे। उनकी यह बात सुन रक्तदान के काम में लगे चिकित्सकों का सीना भी चौड़ा हो जा रहा था। वह बोल पड़े, पहली बार हम लोग रक्तदान के लिए लोगों में इस तरह का जोश देख रहे हैं।