रामलीला: गाजीपुर में 71 स्थानों पर रावण के पुतले का दहन, गूंजा जय श्री राम; मेले का लुत्फ उठाने को जुटी भीड़
गाजीपुर में विजयदशमी पर असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक रावण दहन किया गया। शहर में 60 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन आकर्षण का केंद्र रहा। जिले में 71 स्थानों पर रावण के पुतले जलाए गए। लंका स्थित रामलीला में मेले का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे। जय श्रीराम के जयकारे गूंजते रहे।
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शहर समेत जनपद के ग्रामीण अंचलों में कुल 71 स्थानों पर मंगलवार को रावण के पुतले का दहन किया गया। इसके माध्यम से असत्य पर सत्य की जीत का संदेश दिया गया। शहर के लंका स्थित रामलीला मैदान में 60 फीट ऊंचा रावण का पुतला आकर्षण का केंद्र बना रहा। रावण के पुतले का दहन होते ही वातावरण जय श्री राम के नारे से गूंज उठा।
अति प्राचीन श्रीरामलीला कमेटी हरिशंकरी की ओर से लंका स्थित रामलीला मैदान में विजयदशमी पर्व पर रावण वध और पुतला दहन का आयोजन परंपरागत ढंग से शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। इस दौरान करीब 60 फुट ऊंचा रावण का आकर्षक पुतला लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा।
पुतले को रंग-बिरंगी झालरों और बत्तियों से सजाया गया था, जिसे देखने के लिए मैदान में लोगों की भीड़ जुटी। अति प्राचीन श्रीरामलीला कमेटी हरिशंकरी के मंत्री ओमप्रकाश तिवारी ने बताया कि रामलीला में सीता हरण के बाद लंका पर विनाश के बादल मंडराने लगे थे।
मंदोदरी, कुंभकरण और नाना माल्यवान ने रावण को युद्ध में जाने से रोकने का प्रयास किया, लेकिन अहंकार में चूर रावण ने किसी की बात नहीं मानी। वह चतुरंगिणी सेना के साथ रथ पर सवार होकर भगवान श्रीराम से युद्ध करने निकल पड़ा। एक ओर लंकापति रावण की जय-जयकार हो रही थी, तो दूसरी ओर वानरी सेना हर-हर महादेव और जय श्रीराम के उद्घोष के साथ युद्धभूमि में डटी थी।
देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच भीषण युद्ध शुरू हो गया। युद्ध के दौरान भगवान श्रीराम ने रावण पर कई बाण चलाए, लेकिन रावण पर उनका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। प्रभु श्रीराम को निराश होता देख विभीषण ने उन्हें रावण की नाभि में अमृत होने का रहस्य बताया और वहां अग्निबाण चलाने का संकेत दिया।
विभीषण के बताए अनुसार श्रीराम ने अग्निबाण का संधान कर रावण की नाभि पर प्रहार किया। इससे रावण मूर्छित होकर धरती पर गिर पड़ा। रावण के धराशायी होते ही युद्धभूमि में श्रीराम की विजय का उद्घोष गूंज उठा। इसके बाद मंदोदरी युद्धस्थल पर पहुंची और अपने पति के शव से लिपटकर विलाप करने लगी।
नहीं दिखी भीड़ प्रबंधन व्यवस्था
देर शाम करीब आठ बजे कमेटी के मुख्य संरक्षक एवं जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला तथा सह संरक्षक एवं पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह ने मंच पर पहुंचकर रिमोट के माध्यम से रावण के पुतले का दहन किया। कुछ ही क्षणों में विशाल पुतला धू-धूकर जलने लगा।
इस दौरान पूरा लंका मैदान हर-हर महादेव और जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। लोगों ने भगवान श्रीराम की विजय और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक विजयदशमी पर्व को उत्साह के साथ मनाया। इस मौके पर एसडीएम सदर विनोद जोशी, क्षेत्राधिकारी नगर प्रमोद कुमार सिंह, विनय कुमार सिंह, गोपाल जी पांडेय, कृष्ण मुरारी केडिया आदि मौजूद रहे।
शहर के लंका स्थित रामलीला मैदान में रावण का पुतला दहन होते ही भीड़ एक-दूसरे को धक्का मारते हुए बाहर निकलने लगे। भीड़ के धक्के में कई लोग जमीन पर भी गिर गए। इस दौरान भीड़ प्रबंधन व्यवस्था नजर नहीं आई। यही हाल लंका के आसपास सड़क पर भी दिखा। मेले की भीड़ को उनके भरोसे छोड़ दिया गया था।
दुकानदार दिखे मायूस
शहर के लंका स्थित रामलीला मैदान में इस बार नई व्यवस्था का प्रयोग करते हुए अंदर दुकान लगाने की अनुमति नहीं थी। इसके कारण ऐसे दुकानदार जो साल भर दशहरा के मेले का इंतजार करते हैं, उनको मायूस देखा गया। उनको उम्मीद थी कि मेले से कुछ बेहतर कमाई होगी, लेकिन ऐसा न होने के कारण वह निराश नजर आए।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी दशहरा मेले की धूम
शहर की तरह जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में भी दशहरा के मेले की धूम देखने को मिली। रावण के पुतले का दहन होने के साथ ही लोगों ने मेले का लुत्फा उठाया। बहरियाबाद, मुहम्मदाबाद के महादेवा, नंदगंज, पाली, शेरपुर, मनिया, तराव, बसनिया, जमानिया आदि जगहों पर रावण के पुतले का दहन किया गया। मेले में लोगों परिवार, मित्रों संग खरीदारी करते हुए लजीज व्यंजनों का लुत्फ उठाया।
आतिशबाजी से आसमान हुआ रंगीन
जनपद में रावण के पुतले के दहन के दौरान आतिशबाजी की गई। इस दौरान पटाखों की रंग-बिरंगी रोशनी से पूरा आसमान रंगीन हो उठा। लोग इस नजारे को अपनी आंखों से निहारते रहे। साथ ही लोगों ने इस पल को अपने मोबाइल के कैमरे में भी कैद किया।