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धान की खेती के लिए तैयारी तेज, निर्धारित नहीं हुआ लक्ष्य
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गाजीपुर। खरीफ की फसल खासतौर से धान की खेती के लिए तैयारी तेज कर दी गई है। धान की खेती के लिए रकबा बढ़ाने के साथ ही अधिक उपज हासिल करने के लिए तैयारी किसानों द्वारा की जा रही है। हालांकि शासन की ओर से कृषि विभाग को खेती के लिए क्षेत्रफल और पैदावार का लक्ष्य नहीं भेजा गया है। जबकि पिछले वर्ष एक लाख 61 हजार हेक्टेयर में धान की खेती की गई थी। प्रति हेक्टेयर करीब 30 क्विंटल धान का उत्पादन हुआ था। इस बार रकबा बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
इधर कृषि विभाग खरीफ की खेती के लिए जिला, तहसील और ब्लाक स्तर पर कृषि गोष्ठियां आयोजित होती है। इसमें खेती का रकबा और पैदावार के लक्ष्य पर चर्चा होगी। अगर खरीफ फसल वित्तीय वर्ष 2020-21 के आंकड़ों को देखा जाए तो धान की खेती एक लाख 59 हजार हेक्टेयर पर की गई थी। प्रति हेक्टेयर करीब 29 क्विंटल धान उत्पादन हुआ था। इसी तरह वित्तीय वर्ष 2021-22 में एक लाख 61 हजार हेक्टेयर में धान की खेती की गई थी। प्रति हेक्टेयर 30 क्विंटल धान का उत्पादन हुआ था। इस साल धान की खेती का क्षेत्रफल और पैदावार का लक्ष्य तय नहीं किया गया है। इस संबंध में कृषि अधिकारी मृत्युंजय सिंह ने बताया कि शासन की ओर से लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है। इस बार रकबा बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
15 जून तक मानसून आने की संभावना
गाजीपुर। मौसम विशेषज्ञ कपिल देव शर्मा ने बताया कि इस बार मानसून 15 जून तक आने की संभावना है। अच्छी वर्षा भी होगी, जिससे धान की फसल लहलहाएंगे। वर्तमान समय में हल्की बूंदाबादी होने की संभावना है और कहीं कहीं बादल भी छाए रहेंगे। दोपहर में धूल भरी आंधी चलेगा, लेकिन तापमान में कोई गिरावट नहीं होगी।
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अगर धूप की यही स्थिति रही तो धान की खेती के लिए संकट खड़ा हो सकता है। हालांकि अभी धान की नर्सरी तो नहीं डाली जा रही है, लेकिन सूर्य की किरणों को देखकर ऐसा लग रहा है कि इसका ताप कम होने वाला नहीं है। - अजित राय
25 मई के बाद से धान की नर्सरी डाली जाएगी। अगर धूप की यही स्थिति रही तो काफी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। खासकर सिंचाई को लेकर समस्या उत्पन्न हो सकती है।- रिशांत सिंह
तापमान में कोई गिरावट नहीं दिखाई पड़ रही है। ऐसे में नर्सरी को काफी नुकसान हो सकता है। धूप में नरमी भी नहीं दिखाई पड़ रही है। उत्पादन पर इसका असर पड़ेगा।- प्रदीप
सबसे बड़ी समस्या सिंचाई को लेकर है। जिस तरह से तापमान में बढ़ोतरी हो रही है, ऐसे में अब कुछ ही देन शेष रह गए है धान की नर्सरी डालने की। काफी दिक्कत होगी।- दरोगा राय
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इधर कृषि विभाग खरीफ की खेती के लिए जिला, तहसील और ब्लाक स्तर पर कृषि गोष्ठियां आयोजित होती है। इसमें खेती का रकबा और पैदावार के लक्ष्य पर चर्चा होगी। अगर खरीफ फसल वित्तीय वर्ष 2020-21 के आंकड़ों को देखा जाए तो धान की खेती एक लाख 59 हजार हेक्टेयर पर की गई थी। प्रति हेक्टेयर करीब 29 क्विंटल धान उत्पादन हुआ था। इसी तरह वित्तीय वर्ष 2021-22 में एक लाख 61 हजार हेक्टेयर में धान की खेती की गई थी। प्रति हेक्टेयर 30 क्विंटल धान का उत्पादन हुआ था। इस साल धान की खेती का क्षेत्रफल और पैदावार का लक्ष्य तय नहीं किया गया है। इस संबंध में कृषि अधिकारी मृत्युंजय सिंह ने बताया कि शासन की ओर से लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है। इस बार रकबा बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
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15 जून तक मानसून आने की संभावना
गाजीपुर। मौसम विशेषज्ञ कपिल देव शर्मा ने बताया कि इस बार मानसून 15 जून तक आने की संभावना है। अच्छी वर्षा भी होगी, जिससे धान की फसल लहलहाएंगे। वर्तमान समय में हल्की बूंदाबादी होने की संभावना है और कहीं कहीं बादल भी छाए रहेंगे। दोपहर में धूल भरी आंधी चलेगा, लेकिन तापमान में कोई गिरावट नहीं होगी।
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अगर धूप की यही स्थिति रही तो धान की खेती के लिए संकट खड़ा हो सकता है। हालांकि अभी धान की नर्सरी तो नहीं डाली जा रही है, लेकिन सूर्य की किरणों को देखकर ऐसा लग रहा है कि इसका ताप कम होने वाला नहीं है। - अजित राय
25 मई के बाद से धान की नर्सरी डाली जाएगी। अगर धूप की यही स्थिति रही तो काफी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। खासकर सिंचाई को लेकर समस्या उत्पन्न हो सकती है।- रिशांत सिंह
तापमान में कोई गिरावट नहीं दिखाई पड़ रही है। ऐसे में नर्सरी को काफी नुकसान हो सकता है। धूप में नरमी भी नहीं दिखाई पड़ रही है। उत्पादन पर इसका असर पड़ेगा।- प्रदीप
सबसे बड़ी समस्या सिंचाई को लेकर है। जिस तरह से तापमान में बढ़ोतरी हो रही है, ऐसे में अब कुछ ही देन शेष रह गए है धान की नर्सरी डालने की। काफी दिक्कत होगी।- दरोगा राय