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सो रहा वृद्ध झोपड़ी में जिंदा जला
संवाददाता, अमर उजाला, गाजीपुर
Updated Wed, 18 Feb 2015 11:34 PM IST
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थाना क्षेत्र के धरवारकला गांव में मंगलवार की देर रात अलाव की चिंगारी से झोपड़ी में आग लग गई। इसके चलते झोपड़ी में सो रहे वृद्ध की जिंदा जलने से मौत हो गई। हादसे में एक भैंस भी मर गई।
धरवारकला गांव निवासी धर्मदेव यादव (70) मंगलवार की रात खाना खाने के बाद घर से कुछ दूरी पर स्थित अपने पंपिंगसेट पर सोने चला गया।
धर्मदेव ने जानवरों को मच्छरों से बचाने के लिए अलाव जलाई, इसके बाद झोपड़ी में ही सो गया। रात करीब 11 बजे अलाव से निकली चिंगारी से झोपड़ी धू-धू कर जलने लगी।
आग की लपटें देख धर्मदेव के परिवार के लोग शोर मचाने लगे। उनकी आवाज सुनकर गांव के अन्य लोग भी अपने-अपने घरों से निकलकर मौके की तरफ दौड़ पड़े।
आनन-फानन में ग्रामीणों ने काफी प्रयास के बाद आग पर काबू पाया। लेकिन तब तक झोपड़ी के अंदर धर्मदेव की झुलसकर मौत हो चुकी थी। साथ ही झुलसने से एक भैंस की भी मौत हो चुकी थी।
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हादसे से परिवार वालों में कोहराम मच गया। मृतक की पत्नी सुरजी देवी रो-रोकर बेहाल थी। सुबह मौके पर पहुंचे तहसील और सीओ ने मृतक के परिवार के वालों से घटना के संबंध में जानकारी ली।
ग्रामीण आशंका व्यक्त कर रहे थे कि जिस समय झोपड़ी में आग लगी होगी, उस समय धर्मदेव गहरी नींद में रहा होगा। आग की तेज लपटों की वजह से वह न तो खुद झोपड़ी से बाहर निकल पाया होगा और न ही मवेशी को खोल पाया होगा। इस घटना से गांव में शोक की चादर तन गई।
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धरवारकला गांव निवासी धर्मदेव यादव (70) मंगलवार की रात खाना खाने के बाद घर से कुछ दूरी पर स्थित अपने पंपिंगसेट पर सोने चला गया।
धर्मदेव ने जानवरों को मच्छरों से बचाने के लिए अलाव जलाई, इसके बाद झोपड़ी में ही सो गया। रात करीब 11 बजे अलाव से निकली चिंगारी से झोपड़ी धू-धू कर जलने लगी।
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आग की लपटें देख धर्मदेव के परिवार के लोग शोर मचाने लगे। उनकी आवाज सुनकर गांव के अन्य लोग भी अपने-अपने घरों से निकलकर मौके की तरफ दौड़ पड़े।
आनन-फानन में ग्रामीणों ने काफी प्रयास के बाद आग पर काबू पाया। लेकिन तब तक झोपड़ी के अंदर धर्मदेव की झुलसकर मौत हो चुकी थी। साथ ही झुलसने से एक भैंस की भी मौत हो चुकी थी।
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हादसे से परिवार वालों में कोहराम मच गया। मृतक की पत्नी सुरजी देवी रो-रोकर बेहाल थी। सुबह मौके पर पहुंचे तहसील और सीओ ने मृतक के परिवार के वालों से घटना के संबंध में जानकारी ली।
ग्रामीण आशंका व्यक्त कर रहे थे कि जिस समय झोपड़ी में आग लगी होगी, उस समय धर्मदेव गहरी नींद में रहा होगा। आग की तेज लपटों की वजह से वह न तो खुद झोपड़ी से बाहर निकल पाया होगा और न ही मवेशी को खोल पाया होगा। इस घटना से गांव में शोक की चादर तन गई।