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Ghazipur News: नाम अमृृत सरोवर, गड्ढा खोदकर भर दिया पानी

Tue, 16 Sep 2025 12:52 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 16 Sep 2025 12:52 AM IST
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Named Amrit Sarovar, filled with water by digging a pit
झाड़ियों से पटा भदौरा गांव ​स्थित अमृत सरोवर। संवाद
गाजीपुर। जनपद में वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 तक 71 करोड़ रुपये से 312 अमृत सरोवरों का निर्माण हुआ है। इनमें साफ-सफाई और देखरेख नहीं होने से 25 प्रतिशत सरोवर बदहाल हैं। सरोवरों के पास झाड़ियां हैं। साइनेज बोर्ड तक भी नहीं लगा है। पौधरोपण व बेंच की सुविधा भी नदारद है। वहीं अधिकांश सरोवरों के निर्माण में मनरेगा विभाग ने सिर्फ खानापूरी की है। सरोवर के नाम पर गड्ढे की खोदाई कर पानी भर दिया गया है।एक अमृत सरोवर के निर्माण पर 23 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। गड्ढों में पानी भरने को लेकर किसी भी अमृत सरोवर पर सबमर्सिबल की व्यवस्था नहीं की गई है। इन दिनों बारिश होने से भले ही अमृत सरोवरों में पानी नजर आ रहा है लेकिन गर्मी में यहां धूल ही उड़ती है। साफ-सफाई नहीं होने से झाड़िया उग आईं हैं। झाड़ियों की कटाई-छंटाई नहीं होती है। सीढि़यों पर खर-पतवार इकट्ठा हैं। पौधरोपण का प्रावधान है, लेकिन कई जगहों से पौधरोपण की व्यवस्था नदारद है। बेंच, स्ट्रीट लाइट नहीं है। पाथ-वे का निर्माण नहीं किया गया है। डीसी मनरेगा विजय यादव ने कहा कि जिन अमृत सरोवरों में कमियां हैं, उनको जल्द से जल्द दुरुस्त कराया जाएगा। इसको लेकर जांच कराई जाएगी।
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भदौरा गांव में वित्तीय वर्ष 2022-23 में अमृत सरोवर का निर्माण हुआ था। अमृत सरोवर के साथ पाथ-वे, चबूतरे का निर्माण होने के साथ ही स्ट्रीट लाइट, बेंच की व्यवस्था होनी चाहिए। लेकिन, ये सुविधाएं नदारद हैं। पाथ-वे अधूरा है। साइनेज बोर्ड लगा है, लेकिन उस पर अंकित जानकारियां अस्पष्ट हैं।
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मरदह गांव के राम जानकी कुटी मंदिर स्थित अमृत सरोवर में सीढ़ी काम चलाऊ है। यहां स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था नहीं है। इसके कारण शाम होने पर कोई यहां नहीं आता है। पाथ-वे का निर्माण कार्य नहीं किया गया है। अमृत सरोवर में पानी भरने के लिए सबमर्सिबल भी नहीं है।
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बाराचवर विकास खंड क्षेत्र के ऊतरांव स्थित अमृत सरोवर पर साइनेज बोर्ड नहीं लगा है। जबकि मनरेगा के किसी भी कार्यस्थल पर इसका लगा होना जरूरी है। पौधरोपण नहीं किया गया है। साफ-सफाई नहीं होने से झाड़ियां हैं। इसके कारण दिन में भी मच्छर भनभनाते रहते हैं।
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