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जयकारा के साथ ले जाई गई मां सरस्वती की प्रतिमा
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गाजीपुर। जिले में बसत पंचमी का पर्व 30 जनवरी को मनाया जा रहा है। इस पर्व पर शैक्षिक संस्थानों में वीणा वादिनी का पूजन-अर्चन होता है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में पूजा कमेटियों की ओर से पंडाल का निर्माण कर उसमें मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित की जाती है। पर्व से एक दिन पूर्व सुबह से लेकर देर रात तक पूजा समिति के लोग मूर्तिकारों के यहां से जयकारा लगाते हुए प्रतिमा को ले जाने में जुटे रहे। बृहस्पतिवार को पंडालों में ले जाई गई प्रतिमा का पट्टा हवन-पूजन के बाद खोल दिया जाएगा। इसके बाद लोग दर्शन-पूजन करेंगे।
मालूम हो कि बसंत पंचमी पर्व पर शहर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में पूजा समितियों द्वारा छोटा-बड़ा पंडाल बनाकर उसमें वीणा वादिनी की प्रतिमा स्थापित की जाती है। पूजा समिति के लोगों ने काफी पहले ही मूर्तिकारों के यहां प्रतिमाओं की बुकिंग करा रखी थी। समय से प्रतिमा तैयार हो जाए, इसके लिए मूर्तिकार भी रात-दिन लगे रहे। पर्व से एक दिन पूर्व उन्होंने प्रतिमा को अंतिम रूप दे दिया। सुबह से ही पूजा समिति के लोगों द्वारा ठेला, ट्रैक्टर ट्राली, टाटा मैजिक सहित अन्य वाहन से पहुंचने का क्रम शुरु हो गया था। समिति के लोगों ने जयकारा लगाते हुए मां की प्रतिमा को वाहन पर रखा। इसके बाद जयकारा लगाते हुए पंडाल तक पहुंचे। कई पूजा समिति के ढोल-नगाड़ा की धुन पर प्रतिमा को मूर्तिकारों के यहां से ले गए। पूजा समितियों द्वारा दिन में दस बजे से प्रतिमा ले जाने का जो क्रम शुरु हुआ, वह देर रात तक जारी रहा। पंडालों में स्थापित प्रतिमाओं का पट्ट बृहस्पतिवार को विधिवत हवन-पूजन के बाद खोल दिया जाएगा। इसके बाद लोगों द्वारा दर्शन-पूजन का क्रम शुरु होगा। किसी पूजा समिति ने दो तो किसी ने चार दिन तक पूजा का कार्यक्रम बनाया। पूजा समाप्ति के बाद समिति के लोग निर्धारित स्थानों पर प्रतिमाओं का विसर्जन करेंगे। शैक्षिक संस्थानों में भी वीणा वादिनी के पूजन-अर्चन की धूम रहेगी।
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मालूम हो कि बसंत पंचमी पर्व पर शहर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में पूजा समितियों द्वारा छोटा-बड़ा पंडाल बनाकर उसमें वीणा वादिनी की प्रतिमा स्थापित की जाती है। पूजा समिति के लोगों ने काफी पहले ही मूर्तिकारों के यहां प्रतिमाओं की बुकिंग करा रखी थी। समय से प्रतिमा तैयार हो जाए, इसके लिए मूर्तिकार भी रात-दिन लगे रहे। पर्व से एक दिन पूर्व उन्होंने प्रतिमा को अंतिम रूप दे दिया। सुबह से ही पूजा समिति के लोगों द्वारा ठेला, ट्रैक्टर ट्राली, टाटा मैजिक सहित अन्य वाहन से पहुंचने का क्रम शुरु हो गया था। समिति के लोगों ने जयकारा लगाते हुए मां की प्रतिमा को वाहन पर रखा। इसके बाद जयकारा लगाते हुए पंडाल तक पहुंचे। कई पूजा समिति के ढोल-नगाड़ा की धुन पर प्रतिमा को मूर्तिकारों के यहां से ले गए। पूजा समितियों द्वारा दिन में दस बजे से प्रतिमा ले जाने का जो क्रम शुरु हुआ, वह देर रात तक जारी रहा। पंडालों में स्थापित प्रतिमाओं का पट्ट बृहस्पतिवार को विधिवत हवन-पूजन के बाद खोल दिया जाएगा। इसके बाद लोगों द्वारा दर्शन-पूजन का क्रम शुरु होगा। किसी पूजा समिति ने दो तो किसी ने चार दिन तक पूजा का कार्यक्रम बनाया। पूजा समाप्ति के बाद समिति के लोग निर्धारित स्थानों पर प्रतिमाओं का विसर्जन करेंगे। शैक्षिक संस्थानों में भी वीणा वादिनी के पूजन-अर्चन की धूम रहेगी।
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