{"_id":"65b953507bf5c74a790df168","slug":"manoj-rai-murder-case-court-fixed-february-13-for-evidence-ghazipur-news-c-313-1-svns1020-109952-2024-01-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"मनोज राय हत्याकांड : न्यायालय ने साक्ष्य के लिए 13 फरवरी की तिथि की नियत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मनोज राय हत्याकांड : न्यायालय ने साक्ष्य के लिए 13 फरवरी की तिथि की नियत
विज्ञापन
गाजीपुर। मुख्तार अंसारी और उनके तीन सहयोगियों पर एमपी-एमएलए कोर्ट अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय अरविंद मिश्र की अदालत में 23 साल पुराने मनोज राय हत्याकांड में मंगलवार को कोई साक्षी उपस्थित नहीं हुआ। साक्ष्य के लिए 13 फरवरी की तिथि नियत की गई है।
15 जुलाई 2001 को उसरी चट्टी हत्याकांड हुआ था और उसी दिन मनोज राय की भी हत्या हुई थी। उस समय मनोज राय को भी मुख्तार अंसारी ने हमलावरों में शामिल बताते हुए मुकदमा दर्ज कराया था, लेकिन मनोज राय के पिता ने पुत्र की हत्या बताते हुए बीते जुलाई में मुख्तार अंसारी और उसके साथियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस की चार्जशीट में मृतक मनोज राय के पिता ने मुख्तार अंसारी के साथ सरफराज मुन्नी, अफरोज उर्फ चुन्नू, जफर उर्फ चंदा के साथ दस लोगों को नामजद किया था, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है जबकि दो अभियुक्त पहले से ही सरकारी अभिलेखों में भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। ऐसे में मनोज राय हत्याकांड में चार आरोपियों के विरुद्ध आरोप पत्र प्रेषित होने के बाद पत्रावली सत्र न्यायालय में भेजी गई थी। मुख्तार अंसारी और सरफराज उर्फ मुन्नी की एक पत्रावली थी तथा दूसरी पत्रावली जफर उर्फ चंदा और अफरोज उर्फ चुन्नू की थी। दोनों पत्रावलियों को समेकित करने का आदेश न्यायालय द्वारा किया गया और मुख्तार समेत चारों आरोपियों की पत्रावलिया एक में कर दी गई। बीते तिथि पर आरोपियों पर आरोप तय किया गया था। मुख्तार अंसारी वीडियो कांफ्रेंसिंग का लिंक न मिलने के कारण पेश नहीं हुआ। अभियोजन की ओर से कोई साक्षी उपस्थित नहीं हुआ। इस पर न्यायालय ने साक्ष्य के लिए उपरोक्त तिथि नियत की है।
विज्ञापन
15 जुलाई 2001 को उसरी चट्टी हत्याकांड हुआ था और उसी दिन मनोज राय की भी हत्या हुई थी। उस समय मनोज राय को भी मुख्तार अंसारी ने हमलावरों में शामिल बताते हुए मुकदमा दर्ज कराया था, लेकिन मनोज राय के पिता ने पुत्र की हत्या बताते हुए बीते जुलाई में मुख्तार अंसारी और उसके साथियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस की चार्जशीट में मृतक मनोज राय के पिता ने मुख्तार अंसारी के साथ सरफराज मुन्नी, अफरोज उर्फ चुन्नू, जफर उर्फ चंदा के साथ दस लोगों को नामजद किया था, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है जबकि दो अभियुक्त पहले से ही सरकारी अभिलेखों में भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। ऐसे में मनोज राय हत्याकांड में चार आरोपियों के विरुद्ध आरोप पत्र प्रेषित होने के बाद पत्रावली सत्र न्यायालय में भेजी गई थी। मुख्तार अंसारी और सरफराज उर्फ मुन्नी की एक पत्रावली थी तथा दूसरी पत्रावली जफर उर्फ चंदा और अफरोज उर्फ चुन्नू की थी। दोनों पत्रावलियों को समेकित करने का आदेश न्यायालय द्वारा किया गया और मुख्तार समेत चारों आरोपियों की पत्रावलिया एक में कर दी गई। बीते तिथि पर आरोपियों पर आरोप तय किया गया था। मुख्तार अंसारी वीडियो कांफ्रेंसिंग का लिंक न मिलने के कारण पेश नहीं हुआ। अभियोजन की ओर से कोई साक्षी उपस्थित नहीं हुआ। इस पर न्यायालय ने साक्ष्य के लिए उपरोक्त तिथि नियत की है।
विज्ञापन