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Navaratri: मां कामाख्या धाम में निशा पूजन, निसंतान दंपतियों के लिए हुई विशेष आरती; चढ़ाया गया जोड़ा नारियल
Tue, 16 Apr 2024 12:47 PM IST
अमन विश्वकर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Tue, 16 Apr 2024 12:47 PM IST
सार
Navaratri 2024: यहां जमदग्नि, विश्वामित्र सरीखे ऋषि-मुनियों का सत्संग समागम हुआ करता था। विश्वामित्र ने यहां एक महायज्ञ भी किया था। पूर्व काल में फतेहपुर सिकरी में सिकरवार राजकुल पितामह खाबड़ जी महाराज ने कामगिरी पर्वत पर जाकर मां कामाख्या देवी की घोर तपस्या की थी।
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मां कामाख्या
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
गाजीपुर के गहमर स्थित आदि शक्ति मां कामाख्या धाम में बीती रात निशा पूजन का अयोजन हुआ। रात में हुई आरती में शामिल होने के लिए बिहार तक से लोग आए। निसंतान दम्पतियों के लिए हुई विशेष पूजा में महिलाओं ने जोड़ा नारियल के साथ पूजन किया।
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आरती महंत आकाश तिवारी के मुताबिक शक्ति पीठों में अलग महत्व रखने वाला यह धाम अपने आप में तमाम पौराणिक इतिहास समेटे हुए है। मां कामाख्या भक्तों की हर मनोकामना को पूर्ण करती है।
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कहा जाता है कि यहां जमदग्नि, विश्वामित्र सरीखे ऋषि-मुनियों का सत्संग समागम हुआ करता था। विश्वामित्र ने यहां एक महायज्ञ भी किया था।
मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने यहीं से आगे बढ़ कर बक्सर में ताड़का नामक राक्षसी का वध किया था। मंदिर की स्थापना के बारे में कहा जाता है कि पूर्व काल में फतेहपुर सिकरी में सिकरवार राजकुल पितामह खाबड़ जी महाराज ने कामगिरी पर्वत पर जाकर मां कामाख्या देवी की घोर तपस्या की थी और उनकी तपस्या से प्रसन्न मां कामाख्या ने कालांतर तक सिकरवार वंश की रक्षा करने का वरदान दिया था।
वर्ष 1840 तक मंदिर में खंडित मूर्तियों की ही पूजा होती रही। 1841 में गहमर के ही एक स्वर्णकार तेजमन ने मनोकामना पूरी होने के बाद इस मंदिर के पुर्ननिर्माण का बीड़ा उठाया। वर्तमान समय में मां कामाख्या सहित अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां मंदिर परिसर में स्थापित है। शारदीय एवं वासंतिक नवरात्र में जिला सहित गैर जिलों के भक्तों की भीड़ उमड़ती है। ऐसी मान्यता है कि मां के दरबार से कोई भक्त खाली नहीं जाता। उसकी हर मनोकामना अवश्य पूरी होती है।