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मौसम का कहर, आंधी-पानी के साथ बरसे ओले
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 28 Jan 2017 02:04 AM IST
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बािररिश्ा
- फोटो : अमर उजाला
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भोगनीपुर क्षेत्र में गुरुवार की रात आंधी, पानी के साथ गिरे ओलों से सरसों, चना, अरहर, मटर और धनिया की फसलों को भारी नुकसान हुआ। किसान कहना है कि लगातार प्रकृति की मार पड़ रही है।
शुक्रवार की भोर चार बजे से पानी के साथ गिरे ओलों ने तांडव मचना शुरू कर दिया। किसान सुबह होते ही खेतों की ओर भागा तो देखा कि सब कुछ बर्बाद हो चुका था। डीघ गांव निवासी किसान कमल तिवारी, राजकुमार, श्याम सुंदरपुर गांव के विनोद शुक्ल, राजबहादुर सचान, हारामऊ गांव के श्रीकांत गुप्ता, विमल तिवारी, हैदरापुर के हर प्रसाद प्रजापति, चंदनामऊ गांव के सत्य नारायण सचान, भूपेंद्र सचान, घार गांव के सर्वेश मिश्र आदि ने बताया कि अरहर, सरसों, चना और धनिया की फसल को अधिक नुकसान हुआ है। गेहूं की फसल भी प्रभावित हुई है।
किसानों ने बताया कि सरसों की एक हेक्टेयर फसल में 25 हजार रुपये की लागत आती है। 70 प्रतिशत नुकसान अभी से दिख रहा है। फसल कटने को आएगी तब तक बीजा फली में सड़ जाएगा। वहीं चना में दो हजार का बीघा और 10 हजार रुपये का हेक्टेयर खर्च। अरहर में ढाई हजार बीघा और हेक्टेयर 15 हजार। धनिया की फसल में एक बीघे में चार किलो बीजा 500 रुपये, दो पानी सिंचाई 1200 रुपये, 20 किलो डीएपी 425 रुपये, 15 किलो यूरिया 120 रुपये, जुताई 1500 रुपये, कुल 3745 रुपये, जबकि 16,780 रुपये एक हेक्टेयर खर्च आता है।
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वहीं मटर में बीज 15 किलो 40 रुपये में 600 रुपये का, डीएपी एक बोरी 1190 रुपये की, यूरिया एक बोरी 350 रुपये की, जुताई 1500 रुपये, सिंचाई 1200 रुपये की लागत आती है। एक हेक्टेयर लागत 22,440 रुपये आती है। जब फसल तैयार है, तब प्राकृतिक आपदा ने कहर बरपा किया है। लगभग एक तिहाई फसलें चौपट होने का अनुमान लगाया गया है।
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शुक्रवार की भोर चार बजे से पानी के साथ गिरे ओलों ने तांडव मचना शुरू कर दिया। किसान सुबह होते ही खेतों की ओर भागा तो देखा कि सब कुछ बर्बाद हो चुका था। डीघ गांव निवासी किसान कमल तिवारी, राजकुमार, श्याम सुंदरपुर गांव के विनोद शुक्ल, राजबहादुर सचान, हारामऊ गांव के श्रीकांत गुप्ता, विमल तिवारी, हैदरापुर के हर प्रसाद प्रजापति, चंदनामऊ गांव के सत्य नारायण सचान, भूपेंद्र सचान, घार गांव के सर्वेश मिश्र आदि ने बताया कि अरहर, सरसों, चना और धनिया की फसल को अधिक नुकसान हुआ है। गेहूं की फसल भी प्रभावित हुई है।
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किसानों ने बताया कि सरसों की एक हेक्टेयर फसल में 25 हजार रुपये की लागत आती है। 70 प्रतिशत नुकसान अभी से दिख रहा है। फसल कटने को आएगी तब तक बीजा फली में सड़ जाएगा। वहीं चना में दो हजार का बीघा और 10 हजार रुपये का हेक्टेयर खर्च। अरहर में ढाई हजार बीघा और हेक्टेयर 15 हजार। धनिया की फसल में एक बीघे में चार किलो बीजा 500 रुपये, दो पानी सिंचाई 1200 रुपये, 20 किलो डीएपी 425 रुपये, 15 किलो यूरिया 120 रुपये, जुताई 1500 रुपये, कुल 3745 रुपये, जबकि 16,780 रुपये एक हेक्टेयर खर्च आता है।
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वहीं मटर में बीज 15 किलो 40 रुपये में 600 रुपये का, डीएपी एक बोरी 1190 रुपये की, यूरिया एक बोरी 350 रुपये की, जुताई 1500 रुपये, सिंचाई 1200 रुपये की लागत आती है। एक हेक्टेयर लागत 22,440 रुपये आती है। जब फसल तैयार है, तब प्राकृतिक आपदा ने कहर बरपा किया है। लगभग एक तिहाई फसलें चौपट होने का अनुमान लगाया गया है।