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जिला अस्पताल को खुद इलाज की दरकार
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 04 Mar 2017 02:11 AM IST
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महिला चिकित्सक कक्ष में डाक्टरों का इंतजार करती महिला मरीज।
- फोटो : अमर उजाला
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जिले की 18 लाख की आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए अकबरपुर में बने संयुक्त जिला अस्पताल को खुद इलाज की दरकार है।
डाक्टर्स, पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ के अभाव के साथ ही बदइंतजामी के चलते इलाज के लिए आने वाले मरीज और तीमारजार परेशान हैं।
अस्पताल में बदइंतजामी इस कदर हावी है कि गंभीर और सामान्य रूप से घायल मरीजों को जांच कराने और वार्ड में शिफ्ट करने के लिए खुद के इंतजाम करने होते हैं। ऐसे में मरीजों के तीमारदार अपनों की जान बचाने के लिए गोद में लेकर उन्हें इधर-उधर लेकर भागते हैं।
शासन से करोड़ों रुपये फूंकने के बावजूद जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं पटरी पर नहीं आ रही हैं। मौसम में अचानक आए बदलाव से अस्पताल हाउस फुल बने हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश लोग बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की आस में जिला अस्पताल की ओर दौड़ लगाते हैं। संसाधनों का टोटा होने से यहां पर भी उन्हें मायूस होना पड़ता है।
शुक्रवार को सुबह दस बजे तक पंजीकरण कराने के लिए मरीजों की लंबी कतारें लगी थीं। ओपीडी में साढ़े दस बजे तक अधिकांश डाक्टरों के कक्ष खाली दिखाई दिए। इससे बीमार बुजुर्गं, महिलाएं, बच्चे डाक्टरों के आने का इंतजार करते दिखे तो आकस्मिक वार्ड में भर्ती घायल के परिजन स्ट्रेचर न मिलने पर खुद सहारा देकर वार्ड में मरीज को शिफ्ट करने के लिए मजबूर रहे।
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इसी दौरान एक तीमारदार महिला को गोद में उठाकर आकस्मिक वार्ड में ले गया। गंभीर मामलों में मरीजों को स्ट्रेचर की सुविधा न मिलने से कई बार स्थिति तनावपूर्ण हो गई। हालांकि इस बाबत उच्चाधिकारियों ने व्यवस्था दुरस्त करने के निर्देश समय-समय पर दिए, लेकिन अभी तक कोई हल नहीं निकल सका है।
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डाक्टर्स, पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ के अभाव के साथ ही बदइंतजामी के चलते इलाज के लिए आने वाले मरीज और तीमारजार परेशान हैं।
अस्पताल में बदइंतजामी इस कदर हावी है कि गंभीर और सामान्य रूप से घायल मरीजों को जांच कराने और वार्ड में शिफ्ट करने के लिए खुद के इंतजाम करने होते हैं। ऐसे में मरीजों के तीमारदार अपनों की जान बचाने के लिए गोद में लेकर उन्हें इधर-उधर लेकर भागते हैं।
शासन से करोड़ों रुपये फूंकने के बावजूद जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं पटरी पर नहीं आ रही हैं। मौसम में अचानक आए बदलाव से अस्पताल हाउस फुल बने हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश लोग बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की आस में जिला अस्पताल की ओर दौड़ लगाते हैं। संसाधनों का टोटा होने से यहां पर भी उन्हें मायूस होना पड़ता है।
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शुक्रवार को सुबह दस बजे तक पंजीकरण कराने के लिए मरीजों की लंबी कतारें लगी थीं। ओपीडी में साढ़े दस बजे तक अधिकांश डाक्टरों के कक्ष खाली दिखाई दिए। इससे बीमार बुजुर्गं, महिलाएं, बच्चे डाक्टरों के आने का इंतजार करते दिखे तो आकस्मिक वार्ड में भर्ती घायल के परिजन स्ट्रेचर न मिलने पर खुद सहारा देकर वार्ड में मरीज को शिफ्ट करने के लिए मजबूर रहे।
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इसी दौरान एक तीमारदार महिला को गोद में उठाकर आकस्मिक वार्ड में ले गया। गंभीर मामलों में मरीजों को स्ट्रेचर की सुविधा न मिलने से कई बार स्थिति तनावपूर्ण हो गई। हालांकि इस बाबत उच्चाधिकारियों ने व्यवस्था दुरस्त करने के निर्देश समय-समय पर दिए, लेकिन अभी तक कोई हल नहीं निकल सका है।
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