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नोट की चोट से फैक्ट्रियों में ठप हो गया उत्पादन

Fri, 18 Nov 2016 02:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 18 Nov 2016 02:23 AM IST
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The injury has disrupted production at factories
औद्योगिक क्षेत्र रनियां की मंटोरा आयल में डंप पड़ा माल। - फोटो : अमर उजाला
 500 व 1000 की नोट बंदी के बाद जिले के औद्योगिक क्षेत्र रनियां में फैक्ट्रियों पर दोहरी मार पड़ी है। फैक्ट्री मजदूर नोट बदलने व जमा करने की बात कहकर नहीं आ रहे हैं।
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फैक्ट्रियों में उत्पादन ठप है। जबकि, बाजार में खरीददार न मिलने से दुकानदार भी नया माल लेने से इंकार कर दिया है। माल डंप पड़े होने से फैक्ट्री मालिकों के माथे पर शिकन साफ दिखाई दे रही है। आईआईए के जनरल सेक्रेटरी हरदीप सिंह राखरा का कहना है कि सरकार की ओर से नोट बंदी का फैसला अच्छा है, पर आम लोगों को समस्या न हो। इसको ध्यान में रखना चाहिए।
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सीन-एक- स्थान-मंटोरा आयल औद्योगिक क्षेत्र रनियां- समय-12:30 दोपहर- - 500 व 1000 रुपये के नोट बंदी के बाद औद्योगिक इकाई मंटोरा ऑयल में दिन पर दिन मजदूरों की संख्या कम होती जा रही है। प्रबंधन के लाख मनाने के बावजूद लोग नोट बदलने की बात कहकर फैक्ट्री नहीं आ रहे हैं। फैक्ट्री में उत्पादन ठप हो गया है। पुराना स्टाक डंप पड़ा है।
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सीमित संख्या में नोट बदलने व निकालने से फैक्ट्री प्रबंधन भी मजदूरों को भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। फैक्ट्री प्रबंधक चुन्नू बाबू ने बताया कि नए नोट न होने से मजदूरों का भुगतान नहीं हो पा रहा है।


मजदूरों के पास रुपये न होने से फैक्ट्री की कैंटीन से खाना दिया जा रहा है। अब वनस्पति आयल का उत्पादन घटकर आधा रह गया है। बाहर के मजदूर अपने घरों को चले गए हैं। व्यापार ठप की कगार पर है।

सीन-दो- स्थान-श्रीसालासर एग्रोकेम औद्योगिक क्षेत्र रनियां- समय-01:20 दोपहर - नोट बंदी का असर खेती-किसानी की औद्योगिक इकाईयों में साफ दिखाई दे रहा है। नोट बंद होने के चलते किसानी से जुड़ी इकाईयों को दोहरी मार का सामना करना पड़ रहा है।


औद्योगिक क्षेत्र स्थित कीटनाशक दवाई का उत्पादन करने वाली श्रीसालासर एग्रोकेम फैक्ट्री में मजदूरों के न आने से उत्पादन पूरी तरह से प्रभावित है। किसानों के पास फुटकर रुपये न होने से पहले से जमा कीटनाशक दवाईयों का स्टाक रुका हुआ है। किसान नये नोटों की किल्लत से जुताई-बुवाई नहीं कर पा रहे हैं। फसल की कीड़ों से बचाने वाली कीटनाशक दवाईयों की बिक्री ठंडी पड़ी है।


फैक्ट्री मालिक राजीव महेश्वरी का कहना है कि मोदी ने नोट बंदी का काम बढ़िया किया है। पुराने नोट बदलने व जमा करने में दिक्कत के चलते मजदूर, किसान सहित हर वर्ग परेशान है। बैंकों में नोट वितरण की व्यवस्था होती रहे।



लोगों की आम जरूरतें पूरी होने के साथ औद्योगिक इकाईयों को भी परेशान नहीं होना पड़ेगा। पिछले कई दिनों से नोटों की किल्लत से माल उत्पादन ठप है। थोक व्यवसायी पहले से माल डंप होने की बात कहकर फैक्ट्री में जमा माल की खरीददारी नहीं कर रहे हैं।
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