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अरहर की फसल को फलीछेदक कीट से बचाएं
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 27 Feb 2016 01:09 AM IST
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रबी की मुख्य दलहनी फसलों अरहर और चने में फलीछेदक कीट का हमला जोरों पर है। किसान फसलों की सुरक्षा को लेकर चिंता में हैं।
शुक्रवार को यमुना तटवर्ती गांव अमिरतेपुर (घाटमपुर) और पतारा विकास खंड के गांव अकबरपुर (झबैया) में आयोजित कृषि प्रक्षेत्र दिवसों में उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों के सामने अपनी समस्या सुनाई।
अमिरतेपुर गांव में आयोजित कृषक चौपाल में आए किसानों ने बताया कि उनके इलाके में दलहनी फसल अरहर की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। बताया कि इस वक्त फसल में फलियां लग रही हैं। इधर, मौसम के लगातार उतार-चढ़ाव से उनमें कीटों का हमला भी जारी है।
बताया कि फलीछेदक कीट पौधे में फली लगते ही उनमें छेद कर घुस जाता है। इसी तरह अकबरपुर (झबैया) गांव में किसानों ने चने की फसल में भी ऐसी ही समस्या बताई। वरिष्ठ कृषि विशेषज्ञ श्रीकृष्ण यादव ने बताया कि एक फलीछेदक कीट प्रौढ़ होने पर सैकड़ों की संख्या में अंडे देता है।
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इसके चलते एक सप्ताह में ही उनकी संख्या बढ़कर एक खेत से दूसरे खेत में पहुंचती जाती है। बताया कि फलीछेदक कीट के हमले से निपटने के लिए किसान क्लस्टर विधि अपनाकर एक साथ फसल में कीटनाशकों का छिड़काव करें। अमिरतेपुर के प्रक्षेत्र दिवस में कृषि विषयवस्तु विशेषज्ञ लल्लू सिंह यादव, राजकीय बीज भंडार (घाटमपुर) के प्रभारी
रामनरेश सिंह भदौरिया, राकेश सिंह, अशोक कुमार और जीतेंद्र सिंह उपस्थित रहे। जबकि, पतारा में अरुण सिंह, राजकुमार, राजेंद्र प्रसाद और अवधेश कुमार ने किसानों को दलहनी फसलों के बारे में जानकारी दी।
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शुक्रवार को यमुना तटवर्ती गांव अमिरतेपुर (घाटमपुर) और पतारा विकास खंड के गांव अकबरपुर (झबैया) में आयोजित कृषि प्रक्षेत्र दिवसों में उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों के सामने अपनी समस्या सुनाई।
अमिरतेपुर गांव में आयोजित कृषक चौपाल में आए किसानों ने बताया कि उनके इलाके में दलहनी फसल अरहर की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। बताया कि इस वक्त फसल में फलियां लग रही हैं। इधर, मौसम के लगातार उतार-चढ़ाव से उनमें कीटों का हमला भी जारी है।
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बताया कि फलीछेदक कीट पौधे में फली लगते ही उनमें छेद कर घुस जाता है। इसी तरह अकबरपुर (झबैया) गांव में किसानों ने चने की फसल में भी ऐसी ही समस्या बताई। वरिष्ठ कृषि विशेषज्ञ श्रीकृष्ण यादव ने बताया कि एक फलीछेदक कीट प्रौढ़ होने पर सैकड़ों की संख्या में अंडे देता है।
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इसके चलते एक सप्ताह में ही उनकी संख्या बढ़कर एक खेत से दूसरे खेत में पहुंचती जाती है। बताया कि फलीछेदक कीट के हमले से निपटने के लिए किसान क्लस्टर विधि अपनाकर एक साथ फसल में कीटनाशकों का छिड़काव करें। अमिरतेपुर के प्रक्षेत्र दिवस में कृषि विषयवस्तु विशेषज्ञ लल्लू सिंह यादव, राजकीय बीज भंडार (घाटमपुर) के प्रभारी
रामनरेश सिंह भदौरिया, राकेश सिंह, अशोक कुमार और जीतेंद्र सिंह उपस्थित रहे। जबकि, पतारा में अरुण सिंह, राजकुमार, राजेंद्र प्रसाद और अवधेश कुमार ने किसानों को दलहनी फसलों के बारे में जानकारी दी।