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जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों की उदासीनता विकास में बाधक
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 07 Dec 2016 01:42 AM IST
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खस्ताहाल पड़ी सड़क।
- फोटो : अमर उजाला
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सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत सांसदों ने क्षेत्र में एक गांव को गोद लिया था। गोद लिए गांव की विकास कार्य समयावधि समाप्त होने वाली है, लेकिन क्षेत्र के दर्जनों गांव ऐसे हैं, जो सड़क, बिजली पानी और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।
वर्ष 2014 को लागू इस योजना के तहत अकबरपुर लोकसभा सांसद सांसद देवेंद्र सिंह भोले ने घाटमपुर के एक गांव को गोद लिया गया था। इसकी समयावधि वर्ष 2016 तक है । इसके बाद एक साथ दो गांवों को गोद लेकर वर्ष 2019 तक विकास किया जाएगा । क्षेत्र के बैजूपुरवा, अंदायां, दम्मूपुरवा, कठारा, भुलनीपुरवा, गुइसर, चालाहा, रहिमानपुर, लुखरदौरा आदि दर्जनों गांव हैं, जहां बिजली पानी सड़क स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं केवल सपना बनकर रह गई हैं।
क्षेत्र के संजय सिंह यादव, लोहा सिंह, बबलू द्विवेदी, संतोष यादव, रामलखन, अरविंद पाल, पवन यादव, छोटे लाल आदि ने बताया कि गांवों में बिजली का नामोनिशान तक नहीं है। इससे बच्चों की पढ़ाई चौपट हो रही है। बच्चे लालटेन की रोशनी में पढ़ने को विवश हैं। इन गांवों में सड़कें तो दूर संपर्क मार्ग अपना अस्तित्व खो चुके हैं। बरसात के मौसम में जलभराव से रूरा कस्बा से संपर्क टूट जाता है। स्वास्थ्य सुविधा गांवों से कोसों दूर हैं। बीमार होने पर ग्रामीणों को कोसों दूर जाना पड़ता है।
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बताया कि गांवों में बिजली की सुविधा न होने पर किसी भी घर में टीवी नहीा है। ग्रामीणों के लिए समाचारों का एकमात्र साधन आज भी रेडियो है। जनप्रतिधिनियों व अधिकारियों की अनदेखी की वजह से गांवों के लोग बढ़ते जमाने में तीस साल पीछे जीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने बताया कि सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत पिछड़े गंावों को प्राथमिकता दी जाए। इससे गांव का संपूर्ण विकास हो सके।
- बीडीओ को कार्ययोजना बनाए जाने के निर्देश दिए गए थे। सांसद की ओर से आदर्श गांव बनाने के लिए गांवों का चयन किया जाता है। अभी तक सांसद ने किसी गांव के चयन होने की जानकारी नहीं दी है। चयन होने पर विकास कार्य कराए जाएंगे। - राजितराम मिश्रा (जिला विकास अधिकारी)
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वर्ष 2014 को लागू इस योजना के तहत अकबरपुर लोकसभा सांसद सांसद देवेंद्र सिंह भोले ने घाटमपुर के एक गांव को गोद लिया गया था। इसकी समयावधि वर्ष 2016 तक है । इसके बाद एक साथ दो गांवों को गोद लेकर वर्ष 2019 तक विकास किया जाएगा । क्षेत्र के बैजूपुरवा, अंदायां, दम्मूपुरवा, कठारा, भुलनीपुरवा, गुइसर, चालाहा, रहिमानपुर, लुखरदौरा आदि दर्जनों गांव हैं, जहां बिजली पानी सड़क स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं केवल सपना बनकर रह गई हैं।
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क्षेत्र के संजय सिंह यादव, लोहा सिंह, बबलू द्विवेदी, संतोष यादव, रामलखन, अरविंद पाल, पवन यादव, छोटे लाल आदि ने बताया कि गांवों में बिजली का नामोनिशान तक नहीं है। इससे बच्चों की पढ़ाई चौपट हो रही है। बच्चे लालटेन की रोशनी में पढ़ने को विवश हैं। इन गांवों में सड़कें तो दूर संपर्क मार्ग अपना अस्तित्व खो चुके हैं। बरसात के मौसम में जलभराव से रूरा कस्बा से संपर्क टूट जाता है। स्वास्थ्य सुविधा गांवों से कोसों दूर हैं। बीमार होने पर ग्रामीणों को कोसों दूर जाना पड़ता है।
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बताया कि गांवों में बिजली की सुविधा न होने पर किसी भी घर में टीवी नहीा है। ग्रामीणों के लिए समाचारों का एकमात्र साधन आज भी रेडियो है। जनप्रतिधिनियों व अधिकारियों की अनदेखी की वजह से गांवों के लोग बढ़ते जमाने में तीस साल पीछे जीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने बताया कि सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत पिछड़े गंावों को प्राथमिकता दी जाए। इससे गांव का संपूर्ण विकास हो सके।
- बीडीओ को कार्ययोजना बनाए जाने के निर्देश दिए गए थे। सांसद की ओर से आदर्श गांव बनाने के लिए गांवों का चयन किया जाता है। अभी तक सांसद ने किसी गांव के चयन होने की जानकारी नहीं दी है। चयन होने पर विकास कार्य कराए जाएंगे। - राजितराम मिश्रा (जिला विकास अधिकारी)