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रामलीला के शोर में दब गई तांडव लीला
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 07 Nov 2016 01:35 AM IST
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डकैती
- फोटो : अमर उजाला
शनिवार रात विसधन कसबे में चार घरों में पड़ी डकैती को डकैतों ने सोच-समझकर अंजाम दिया। कसबे में हो रही रामलीला देखने के लिए बड़ी संख्या में क्षेत्रीय लोग पहुंचते हैं, इसी का लाभ लेकर डकैतों ने हमला बोला। रामलीला के लाउड स्पीकर जगह-जगह लगे होने के कारण लोगों की चीखें और गोलियों की आवाज किसी को सुनाई ही नहीं दी।
पड़ोसी रामबाबू की भतीजी स्नेहा घर के बरामदे में सो रही थी, वारदात के दौरान वह जाग गई। उसने बताया कि सभी डकैत पैंट-शर्ट पहने हुए थे, डकैतों ने आते ही बाहर लगी बत्ती (सीएफएल) बंद कर दी। उनकी संख्या एक दर्जन से ज्यादा थी। दो लोगों बक्से लिए हुए थे। रोड पर उतरते ही गोली चलाई और गालियां दीं, इसके बाद डकैतों ने हाथों में लिए डंडे अमर सिंह के दरवाजे पर फेंके और गालियां बकीं।
बल्ब बंद होने के कारण डकैत उसे नहीं देख सके। डकैतों द्वारा छोड़े गए यूकेलिप्टस पेड़ के ताजे तोड़े गए डंडे पुलिस ने बरामद किए हैं। ताजे डंडे तोड़कर वारदात करने का तरीका बावरिया का है लेकिन अब दूसरे गैंग भी पुलिस का ध्यान भटकाने के लिए ऐसा करते हैं।
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रविवार दोपहर मौके पर पहुंचे आईजी जकी अहमद ने एसओ ककवन दिनेश पांडे, चौकी इंचार्ज सुदामा यादव को कड़ी फटकार लगाई और एसएसपी आकाश कुलहरि से समय से आसपास के थाना, चौकियों को वारदात की सूचना न देने, पुलिस कंट्रोल रूम को जानकारी न देने पर एसओ और चौकी इंचार्ज को लाइन हाजिर करने को कहा। एसएसपी ने तुरंत दोनों को लाइन हाजिर कर दिया।
घुमंतू जाति के लोगों के डेरों (रहने के स्थानों) की जानकारी न दे पाने और थाना क्षेत्र की भौगोलिक जानकारी न रखने पर आईजी ने बिल्हौर और ककवन थाना के एसओ-सीओ को फटकार लगाई। पुलिस अधिकारी ठठिया-तिर्वा कन्नौज जाने का रास्ता तक आईजी को नहीं बता सके। ग्रामीणों से रास्ता पूछकर आईजी और एसएसपी रवाना हुए।
लूटपाट करने के बाद डकैत खेतों से होकर भाग निकले। डकैतों ने घटनास्थल से करीब 500 मीटर दूर मुर्गी फार्म के समीप एक खेत में सोने-चांदी और अन्य महंगी चीजों को एक संदूक में भरा और दूसरा संदूक खेत में ही छोड़कर भाग गए। पास में लगे एक नल पर डकैतों ने हाथ पैर धोए और फिर बिल्हौर मकनपुर-रसूलाबाद मार्ग से होते हुए भाग गए। डाग स्क्वायड का खोजी कुत्ता नल पर जाकर रुक गया।
सभी डकैत अस्पतालों में सर्जरी के दौरान पहने जाने वाले रबर के दस्ताने (ग्लव्स) पहने थे। कई डकैतों ने तो सुरेश, अमर सिंह और सर्वेश के घर पर ही पैकेट फाड़ कर दस्ताने पहने। खेत में कई ग्लव्स भी पड़े मिले। यहीं कारण है कि फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट की टीम को ज्यादा फिंगर प्रिंट हाथ नहीं लग सके। डकैतों द्वारा मौके पर छोड़े गए डंडों, छेनी, संदूक से कुछ फिंगर प्रिंट जरूर जांच अधिकारियों को मिले हैं।
पांडु नदी और निचली गंग नहर की कटरी के मध्य बसा कसबा विसधन और उसके आसपास के कई गांव लंबे समय से राहजनी, चोरी, डकैती का दंश झेलते रहे हैं। कानपुर देहात और कन्नौज जिले की सीमा से लगने के कारण बदमाश घटना को अंजाम देने के बाद हजारों बीघा क्षेत्रों में फैले बीहड़ और जंगलों का लाभ लेकर गायब हो जाते हैं। आइमा पुल, बरेबा मोड़, खपरपुरझाल, पांडु नदी पुल सहित सुर्सी बंबी पर आए दिन राहगीरों से घटनाएं आम हैं। कुछ दिन पहले एक किसान से कुछ बदमाशों ने ट्रैक्टर व ट्राली लूट ली थी, आइमा पुल पर दिन-दहाड़े बाइक सवार दंपति से कट्टे के बल पर बदमाशों ने लूटपाट की थी। चरवाहों के साथ लूटपाट करने के इरादे से आए कुछ बाइक सवार बदमाशों को ग्रामीणों ने चाइनीज रिवाल्वर के साथ पकड़कर पुलिस को सौंपा था। स्थानीय व्यापारी मिंटू दुबे, आरिफ की माने तो ककवन थाना करीब 15 किमी दूर होने से नदी-नहर की कटरी में बदमाश आसानी से भाग निकलते हैं। कानपुर देहात, कन्नौज और कानपुर नगर का सीमा विवाद भी रहता है।
हाइवे छोड़ डकैतों ने लिंक रोड चुनी
कन्नौज में हुई दो डकैतियों बाद आईजी के निर्देशों पर पुलिस सक्रिय तो हुई लेकिन सारी सुरक्षा हाइवे पर ही रखी। जबकि डकैतों ने इस बार हाइवे के बजाय लिंक रोड के गांव में डकैती डाली। कन्नौज की तरह ही डकैतों ने गांव के बाहरी छोर के घरों को वारदात के लिए चुना।
ग्रामा सुरक्षा समितियों की मीटिंग
घटना के बाद सुरक्षा बढ़ाने के लिए एसपी ग्रामीण राजेश कुमार ने बिल्हौर थाने ग्राम सुरक्षा समितियों के साथ बैठक की। जिसमें हर गांव के पांच-पांच नवयुवकों को दो शिफ्टों में पहरे की व्यवस्था का इंतजाम करने को ग्राम प्रधानों से कहा गया। लाइसेंसी असलहा धारियों से भी गांव की सुरक्षा में लगने के साथ चौकीदारों को सतर्क रहने को कहा गया।
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पड़ोसी रामबाबू की भतीजी स्नेहा घर के बरामदे में सो रही थी, वारदात के दौरान वह जाग गई। उसने बताया कि सभी डकैत पैंट-शर्ट पहने हुए थे, डकैतों ने आते ही बाहर लगी बत्ती (सीएफएल) बंद कर दी। उनकी संख्या एक दर्जन से ज्यादा थी। दो लोगों बक्से लिए हुए थे। रोड पर उतरते ही गोली चलाई और गालियां दीं, इसके बाद डकैतों ने हाथों में लिए डंडे अमर सिंह के दरवाजे पर फेंके और गालियां बकीं।
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बल्ब बंद होने के कारण डकैत उसे नहीं देख सके। डकैतों द्वारा छोड़े गए यूकेलिप्टस पेड़ के ताजे तोड़े गए डंडे पुलिस ने बरामद किए हैं। ताजे डंडे तोड़कर वारदात करने का तरीका बावरिया का है लेकिन अब दूसरे गैंग भी पुलिस का ध्यान भटकाने के लिए ऐसा करते हैं।
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रविवार दोपहर मौके पर पहुंचे आईजी जकी अहमद ने एसओ ककवन दिनेश पांडे, चौकी इंचार्ज सुदामा यादव को कड़ी फटकार लगाई और एसएसपी आकाश कुलहरि से समय से आसपास के थाना, चौकियों को वारदात की सूचना न देने, पुलिस कंट्रोल रूम को जानकारी न देने पर एसओ और चौकी इंचार्ज को लाइन हाजिर करने को कहा। एसएसपी ने तुरंत दोनों को लाइन हाजिर कर दिया।
घुमंतू जाति के लोगों के डेरों (रहने के स्थानों) की जानकारी न दे पाने और थाना क्षेत्र की भौगोलिक जानकारी न रखने पर आईजी ने बिल्हौर और ककवन थाना के एसओ-सीओ को फटकार लगाई। पुलिस अधिकारी ठठिया-तिर्वा कन्नौज जाने का रास्ता तक आईजी को नहीं बता सके। ग्रामीणों से रास्ता पूछकर आईजी और एसएसपी रवाना हुए।
लूटपाट करने के बाद डकैत खेतों से होकर भाग निकले। डकैतों ने घटनास्थल से करीब 500 मीटर दूर मुर्गी फार्म के समीप एक खेत में सोने-चांदी और अन्य महंगी चीजों को एक संदूक में भरा और दूसरा संदूक खेत में ही छोड़कर भाग गए। पास में लगे एक नल पर डकैतों ने हाथ पैर धोए और फिर बिल्हौर मकनपुर-रसूलाबाद मार्ग से होते हुए भाग गए। डाग स्क्वायड का खोजी कुत्ता नल पर जाकर रुक गया।
सभी डकैत अस्पतालों में सर्जरी के दौरान पहने जाने वाले रबर के दस्ताने (ग्लव्स) पहने थे। कई डकैतों ने तो सुरेश, अमर सिंह और सर्वेश के घर पर ही पैकेट फाड़ कर दस्ताने पहने। खेत में कई ग्लव्स भी पड़े मिले। यहीं कारण है कि फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट की टीम को ज्यादा फिंगर प्रिंट हाथ नहीं लग सके। डकैतों द्वारा मौके पर छोड़े गए डंडों, छेनी, संदूक से कुछ फिंगर प्रिंट जरूर जांच अधिकारियों को मिले हैं।
पांडु नदी और निचली गंग नहर की कटरी के मध्य बसा कसबा विसधन और उसके आसपास के कई गांव लंबे समय से राहजनी, चोरी, डकैती का दंश झेलते रहे हैं। कानपुर देहात और कन्नौज जिले की सीमा से लगने के कारण बदमाश घटना को अंजाम देने के बाद हजारों बीघा क्षेत्रों में फैले बीहड़ और जंगलों का लाभ लेकर गायब हो जाते हैं। आइमा पुल, बरेबा मोड़, खपरपुरझाल, पांडु नदी पुल सहित सुर्सी बंबी पर आए दिन राहगीरों से घटनाएं आम हैं। कुछ दिन पहले एक किसान से कुछ बदमाशों ने ट्रैक्टर व ट्राली लूट ली थी, आइमा पुल पर दिन-दहाड़े बाइक सवार दंपति से कट्टे के बल पर बदमाशों ने लूटपाट की थी। चरवाहों के साथ लूटपाट करने के इरादे से आए कुछ बाइक सवार बदमाशों को ग्रामीणों ने चाइनीज रिवाल्वर के साथ पकड़कर पुलिस को सौंपा था। स्थानीय व्यापारी मिंटू दुबे, आरिफ की माने तो ककवन थाना करीब 15 किमी दूर होने से नदी-नहर की कटरी में बदमाश आसानी से भाग निकलते हैं। कानपुर देहात, कन्नौज और कानपुर नगर का सीमा विवाद भी रहता है।
हाइवे छोड़ डकैतों ने लिंक रोड चुनी
कन्नौज में हुई दो डकैतियों बाद आईजी के निर्देशों पर पुलिस सक्रिय तो हुई लेकिन सारी सुरक्षा हाइवे पर ही रखी। जबकि डकैतों ने इस बार हाइवे के बजाय लिंक रोड के गांव में डकैती डाली। कन्नौज की तरह ही डकैतों ने गांव के बाहरी छोर के घरों को वारदात के लिए चुना।
ग्रामा सुरक्षा समितियों की मीटिंग
घटना के बाद सुरक्षा बढ़ाने के लिए एसपी ग्रामीण राजेश कुमार ने बिल्हौर थाने ग्राम सुरक्षा समितियों के साथ बैठक की। जिसमें हर गांव के पांच-पांच नवयुवकों को दो शिफ्टों में पहरे की व्यवस्था का इंतजाम करने को ग्राम प्रधानों से कहा गया। लाइसेंसी असलहा धारियों से भी गांव की सुरक्षा में लगने के साथ चौकीदारों को सतर्क रहने को कहा गया।