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तैयारियां पूरी, आज पधारेंगे नंद के लाला
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 25 Aug 2016 01:42 AM IST
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अकबरपुर बाजार में जन्माष्टमी पर खरीददारी करते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की। गुरुवार मध्य रात 12 बजे शंख व घंटों की आवाज एवं भक्ति प्रेमभाव का उद्घोष घर- घर से सुनाई देगा। जन्माष्टमी पर्व पर भगवान कृष्ण के आगमन की तैयारियां पूरी हो चुकी है। घरों में मेवा, पंचामृत, पंजीरी अन्य पकवान बनाने में महिलाएं व्यस्त रहीं। मंदिरों में भी साफ सफाई के साथ कान्हा के आगमन की तैयारियां होती रहीं।
रूरा कस्बा के मां दुर्गा मंदिर, पाथा देवी मंदिर, थाना ग्राउंड स्थित शिव मंदिर, अकबरपुर के कालिका देवी मंदिर, बालाजी धाम, नवीपुर कस्बा के झाड़ी बाबा मंदिर, यूपीएसआईडीसी स्थित काली मंदिर, कौसम के कुष्मौती माता मंदिर आदि में तैयारियां की गई। मंदिरों को रंग-बिरंगी झालरों से सजाया गया है।
वहीं बाजारों में जन्माष्टमी की खरीददारी के लिए भीड़भाड़ व रौनक रही। बाजार में इस बार तरह- तरह के आइटम लोगों के लिए रखे हुए थे। लड्डू गोपाल की फैंसी, आकर्षक मूर्तियां व वस्त्र लोगों को अपनी तरफ लुभाते रहे।
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दुकानदार जय शंकर अग्रवाल एवं नरेंद्र ने बताया कि बाजार में भगवान की मूर्ति 150 से 800 रुपये, फैंसी वस्त्र 70 से लेकर 300 रुपये, बांसुरी 10 से लेकर 400 रुपये, मोती की माला 25 से 800 रुपये, कपड़े की माला 25 से 150 रुपये, झूले 250 से लेकर 800 रुपये तक के भाव में बिके। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय काटे जाने वाले नारेदार खीरे बाजार में 25 से लेकर 50 रुपये तक बिके।
दुकानदार अन्नू शर्मा ने बताया कि घरों व मंदिरों को सजाने के लिए इलेक्ट्रिक झालरें व मूर्तियां खूब बिकीं। रंग-बिरंगी चाइना झालर 30 से 400 रुपये तक बिकीं। वहीं इलेक्ट्रानिक मूर्तियां 150 से 450 रुपये तक बिकीं। चाइना के राउंड बल्ब की काफी डिमांड रही।
मेवे के दामों में नहीं हुई खास बढ़ोत्तरी- कानपुर देहात। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर कान्हा को भोग लगाने के लिए बनने वाले प्रसाद के लिए किराने की दुकानों पर भारी भीड़ लगी रही। महिलाओं व पुरुषों ने प्रसाद बनाने के लिए मखाना, गिरी, किसमिस आदि सामान की खरीददारी हुई।
दुकानदार कृपाशंकर व गोपी किशन ने बताया कि इस बार मेवे के दामों में कोई खास बढ़ोत्तरी नही हुई है। जन्माष्टमी पर मखाना 350 से 400 रुपये किलो, छुआरा 120 से 250 रुपये किलो, गिरी 130 से 160 रुपये किलो व किसमिस 250 से 320 रुपये तक किलो तक बिकी।
नि:संतान दंपतियों के लिए संतान दायक योग- कानपुर देहात। पं. रामकिशोर त्रिपाठी ने बताया कि नि:संतान दंपतियों के लिए यह संतान दायक योग माना जाता है। यदि इस दिन नि:संतान दंपति पूर्ण निष्ठा एवं आस्था से भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव में अन्न, नमक रहित उपवास करें व सपत्नीक गोपाल नाम सहस्त्र नाम का पाठ करें।
रात्रि के मध्यकाल भगवान कृष्ण के प्राकट्य लड्डू गोपाल के विग्रह को पंच द्रव्य दूध, शहद, दही, घी व गंगाजल से स्नान कराकर पुत्रवत रूप में उनको माखन मिश्री का भोग लगाएं और प्रतिदिन गोपाल सहस्त्र नाम का पाठ करते रहें तो निश्चित रूप से संतान सुख प्राप्त होगा।
वहीं पंडित शिव नारायण तिवारी ने बताया कि द्वापर युग में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष को कंस के कारागार में भगवान विष्णु ने बालरूप में कृष्ण अवतार लिया था। इस दिन बुधवार, तिथि अष्टमी एवं रोहिणी नक्षत्र तीनों की युति थी। इस अद्भुत संयोग को ही कृष्ण जन्माष्टमी का नाम दिया गया।
भगवान झूलेलाल महोत्सव व जन्माष्टमी के एक साथ- कानपुर देहात। इस बार भगवान झूलेलाल महोत्सव व कृष्ण जन्माष्टमी एक साथ पड़ रही है। धर्म सिंधु के अनुसार रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि में ही श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है।
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रूरा कस्बा के मां दुर्गा मंदिर, पाथा देवी मंदिर, थाना ग्राउंड स्थित शिव मंदिर, अकबरपुर के कालिका देवी मंदिर, बालाजी धाम, नवीपुर कस्बा के झाड़ी बाबा मंदिर, यूपीएसआईडीसी स्थित काली मंदिर, कौसम के कुष्मौती माता मंदिर आदि में तैयारियां की गई। मंदिरों को रंग-बिरंगी झालरों से सजाया गया है।
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वहीं बाजारों में जन्माष्टमी की खरीददारी के लिए भीड़भाड़ व रौनक रही। बाजार में इस बार तरह- तरह के आइटम लोगों के लिए रखे हुए थे। लड्डू गोपाल की फैंसी, आकर्षक मूर्तियां व वस्त्र लोगों को अपनी तरफ लुभाते रहे।
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दुकानदार जय शंकर अग्रवाल एवं नरेंद्र ने बताया कि बाजार में भगवान की मूर्ति 150 से 800 रुपये, फैंसी वस्त्र 70 से लेकर 300 रुपये, बांसुरी 10 से लेकर 400 रुपये, मोती की माला 25 से 800 रुपये, कपड़े की माला 25 से 150 रुपये, झूले 250 से लेकर 800 रुपये तक के भाव में बिके। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय काटे जाने वाले नारेदार खीरे बाजार में 25 से लेकर 50 रुपये तक बिके।
दुकानदार अन्नू शर्मा ने बताया कि घरों व मंदिरों को सजाने के लिए इलेक्ट्रिक झालरें व मूर्तियां खूब बिकीं। रंग-बिरंगी चाइना झालर 30 से 400 रुपये तक बिकीं। वहीं इलेक्ट्रानिक मूर्तियां 150 से 450 रुपये तक बिकीं। चाइना के राउंड बल्ब की काफी डिमांड रही।
मेवे के दामों में नहीं हुई खास बढ़ोत्तरी- कानपुर देहात। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर कान्हा को भोग लगाने के लिए बनने वाले प्रसाद के लिए किराने की दुकानों पर भारी भीड़ लगी रही। महिलाओं व पुरुषों ने प्रसाद बनाने के लिए मखाना, गिरी, किसमिस आदि सामान की खरीददारी हुई।
दुकानदार कृपाशंकर व गोपी किशन ने बताया कि इस बार मेवे के दामों में कोई खास बढ़ोत्तरी नही हुई है। जन्माष्टमी पर मखाना 350 से 400 रुपये किलो, छुआरा 120 से 250 रुपये किलो, गिरी 130 से 160 रुपये किलो व किसमिस 250 से 320 रुपये तक किलो तक बिकी।
नि:संतान दंपतियों के लिए संतान दायक योग- कानपुर देहात। पं. रामकिशोर त्रिपाठी ने बताया कि नि:संतान दंपतियों के लिए यह संतान दायक योग माना जाता है। यदि इस दिन नि:संतान दंपति पूर्ण निष्ठा एवं आस्था से भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव में अन्न, नमक रहित उपवास करें व सपत्नीक गोपाल नाम सहस्त्र नाम का पाठ करें।
रात्रि के मध्यकाल भगवान कृष्ण के प्राकट्य लड्डू गोपाल के विग्रह को पंच द्रव्य दूध, शहद, दही, घी व गंगाजल से स्नान कराकर पुत्रवत रूप में उनको माखन मिश्री का भोग लगाएं और प्रतिदिन गोपाल सहस्त्र नाम का पाठ करते रहें तो निश्चित रूप से संतान सुख प्राप्त होगा।
वहीं पंडित शिव नारायण तिवारी ने बताया कि द्वापर युग में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष को कंस के कारागार में भगवान विष्णु ने बालरूप में कृष्ण अवतार लिया था। इस दिन बुधवार, तिथि अष्टमी एवं रोहिणी नक्षत्र तीनों की युति थी। इस अद्भुत संयोग को ही कृष्ण जन्माष्टमी का नाम दिया गया।
भगवान झूलेलाल महोत्सव व जन्माष्टमी के एक साथ- कानपुर देहात। इस बार भगवान झूलेलाल महोत्सव व कृष्ण जन्माष्टमी एक साथ पड़ रही है। धर्म सिंधु के अनुसार रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि में ही श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है।