{"_id":"5e7281608ebc3e76a112b211","slug":"kanpur-dehat-temple-ghatampur-news-knp551167578","type":"story","status":"publish","title_hn":"नवरात्र के लिए कूष्मांडा मंदिर में तैयारियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नवरात्र के लिए कूष्मांडा मंदिर में तैयारियां
विज्ञापन
kanpur dehat temple
- फोटो : GHATAMPUR
घाटमपुर (कानपुर)। वसंत नवरात्र पर्व के लिए तहसील क्षेत्र के देवी मंदिरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। कस्बा स्थित कूष्मांडा देवी मंदिर परिसर में सफाई और रंगाई-पुताई का काम धीमी गति से हो रहा है। मेला परिसर में दुकानदारों ने जरूर अपनी दुकानें सजाने के लिए जगह घेरनी शुरू कर दी है। वहीं, क्षेत्र के अन्य देवी मंदिरों में भी नवरात्र पर्व की तैयारियां शुरू नहीं हुई हैं।
कस्बा स्थित कूष्मांडा देवी मंदिर की गणना सिद्धपीठ में है। पूरे प्रदेश में देवी के चौथे स्वरूप कूष्मांडा का एकमात्र मंदिर घाटमपुर कस्बे में ही है। यहां शारदीय और वसंत नवरात्र पर्व के अलावा भी प्रमुख पर्वों पर मेले जैसा नजारा रहता है। वसंत नवरात्र को देखते हुए मंदिर परिसर में तैयारियों को धीमी गति से शुरू किया गया है। अभी परिसर में कुछ मंदिरों की रंगाई-पुताई का काम चालू हुआ है। मंदिर और मेला परिसर में साफ-सफाई, पेयजल, मार्ग प्रकाश व्यवस्था और तालाब भराने की जिम्मेदारी नगर पालिका प्रशासन की रहती है। मंदिर में पूजा-पाठ और दर्शन कराने की जिम्मेदारी मंदिर के मालियों के जिम्मे है। बुधवार को मंदिर परिसर में कुछ जगह पर साफ-सफाई और रंगाई-पुताई का कार्य जारी था। तालाब की सफाई और उसमें पानी भरवाने का काम शुरू नहीं हुआ है। नगर पालिका के कर्मचारियों ने बताया कि नवरात्र शुरू होने से दो दिन पहले तालाब में पानी भराने के साथ ही उसमें जमा काई और गंदगी को साफ करा दिया जाएगा। मंदिर के मालियों घसीटेलाल सैनी और देवीप्रसाद ने बताया कि नवरात्र की चतुर्थी तिथि को देवी कूष्मांडा का प्रकटोत्सव मनाया जाता है। चतुर्थी तिथि को मंदिर में दीपदान का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों लोग शामिल होते हैं।
इधर, भदरस और बिरहर गांवों में स्थित भद्रकाली देवी मंदिरों में नवरात्र पर्व पर भीड़ लगती है। भीतरगांव, पतारा, बरनांव, गहोलिनपुर (साढ़) और गंभीरपुर गांवों के प्राचीन देवी मंदिरों में सुबह से शाम तक भक्तों की भीड़ रहती है। देवी भक्तों ने बताया कि एक-दो दिन में तैयारियों में तेजी दिखेगी। बताया कि नवरात्र पर्व शुरू होने के दिन तक सारी तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी उमेश कुमार मिश्रा ने बताया कूष्मांडा देवी मंदिर परिसर में नवरात्र मेला की तैयारियों को सोमवार तक पूरा करा दिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
कस्बा स्थित कूष्मांडा देवी मंदिर की गणना सिद्धपीठ में है। पूरे प्रदेश में देवी के चौथे स्वरूप कूष्मांडा का एकमात्र मंदिर घाटमपुर कस्बे में ही है। यहां शारदीय और वसंत नवरात्र पर्व के अलावा भी प्रमुख पर्वों पर मेले जैसा नजारा रहता है। वसंत नवरात्र को देखते हुए मंदिर परिसर में तैयारियों को धीमी गति से शुरू किया गया है। अभी परिसर में कुछ मंदिरों की रंगाई-पुताई का काम चालू हुआ है। मंदिर और मेला परिसर में साफ-सफाई, पेयजल, मार्ग प्रकाश व्यवस्था और तालाब भराने की जिम्मेदारी नगर पालिका प्रशासन की रहती है। मंदिर में पूजा-पाठ और दर्शन कराने की जिम्मेदारी मंदिर के मालियों के जिम्मे है। बुधवार को मंदिर परिसर में कुछ जगह पर साफ-सफाई और रंगाई-पुताई का कार्य जारी था। तालाब की सफाई और उसमें पानी भरवाने का काम शुरू नहीं हुआ है। नगर पालिका के कर्मचारियों ने बताया कि नवरात्र शुरू होने से दो दिन पहले तालाब में पानी भराने के साथ ही उसमें जमा काई और गंदगी को साफ करा दिया जाएगा। मंदिर के मालियों घसीटेलाल सैनी और देवीप्रसाद ने बताया कि नवरात्र की चतुर्थी तिथि को देवी कूष्मांडा का प्रकटोत्सव मनाया जाता है। चतुर्थी तिथि को मंदिर में दीपदान का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों लोग शामिल होते हैं।
विज्ञापन
इधर, भदरस और बिरहर गांवों में स्थित भद्रकाली देवी मंदिरों में नवरात्र पर्व पर भीड़ लगती है। भीतरगांव, पतारा, बरनांव, गहोलिनपुर (साढ़) और गंभीरपुर गांवों के प्राचीन देवी मंदिरों में सुबह से शाम तक भक्तों की भीड़ रहती है। देवी भक्तों ने बताया कि एक-दो दिन में तैयारियों में तेजी दिखेगी। बताया कि नवरात्र पर्व शुरू होने के दिन तक सारी तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी उमेश कुमार मिश्रा ने बताया कूष्मांडा देवी मंदिर परिसर में नवरात्र मेला की तैयारियों को सोमवार तक पूरा करा दिया जाएगा।
विज्ञापन