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स्वच्छता को 38 लाख खर्च, फिर भी खुले में शौच
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 22 Jan 2018 01:05 AM IST
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शौचालय।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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स्वच्छ भारत अभियान के तहत ब्लाक क्षेत्र के निवादा तारापति गांव को खुले में शौचमुक्त बनाने के लिए 38लाख रुपये खर्च किए और जागरुकता कार्यक्रम भी हुए। शुरुआत में लोगों ने शौचालयों का इस्तेमाल भी किया, लेकिन ग्राम विकास अधिकारी और बीडीओ के लापरवाह होते ही पूरे गांव की व्यवस्था तस की तस हो गई, गांव के अधिकतर ग्रामीण खुले में शौच को जा रहे हैं।
गंगा के समीप बसे ग्राम पंचायत निवादा तारापति को जिला प्रशासन द्वारा करीब दो साल पहले ही खुले में शौच मुक्त घोषित किया जा चुका है। कुछ दिनों तक लोग अपने अपन्रे शौचालय में गए, लेकिन गांव के लोग खुले शौच जाने को आदी हो रहे हैं। जिला पंचायत राज विभाग द्वारा गांव में स्वच्छता बनाने के लिए सक्रिय की गई निगरानी समिति बिना किसी प्रोत्साहन के पूरी तरह निष्क्रिय हो गई है।
गांव में निगरानी समिति के निष्क्रिय होने ओर अधिकारियों ढिलाई से ग्राम पंचायत में स्वच्छ भारत अभियान धड़ाम हो गया है। गांव में बने कई शौचालय उपयोग में न आने के कारण कई लोगों उसे तबेला, ईधन भरने और अन्य कार्यों में प्रयोग कर रहे हैं। ग्रामपंचायत को खुले में शौच मुक्त घोषित किया गया तब ग्राम प्रधान भानू प्रताप दीक्षित केंद्रीय जहाज रानी और नमामि गंगे के मंत्री नितिन गडकरी और उमा भारती ने संयुक्त रूप से पुरस्कृत किया गया था।
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जिला पंचायत राज विभाग के अफसर ग्राम पंचायत को खुले में शौच मुक्त घोषित होने के बाद दोबारा गांव की सुध लेने नहीं पहुंचे, धीरे-धीरे पूरी स्वच्छता व्यवस्था ढेर हो गई। ग्राम विकास अधिकारी गांव में दो वर्षों 315 शौचालय बनवाए गए हैं गांव में स्वच्छता रहे इसके लिए निगरानी समिति भी गठित है, लेकिन ग्रामीण शौचालय का इस्तेमाल नहीं कर रहे।
एडीओ पंचायत राजवीर ने बताया कि शौचालयों का इस्तेमाल न करने वाले लोगों को चिह्नित कर शौचालय प्रोत्साहन राशि की रिकवरी कराई जाएगी इसके साथ-साथ ऐसे लोगों को सरकार की प्रत्येक लाभकारी योजनाओं से वंचित करने की प्रक्रिया अब शुरू की जाएगी।
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गंगा के समीप बसे ग्राम पंचायत निवादा तारापति को जिला प्रशासन द्वारा करीब दो साल पहले ही खुले में शौच मुक्त घोषित किया जा चुका है। कुछ दिनों तक लोग अपने अपन्रे शौचालय में गए, लेकिन गांव के लोग खुले शौच जाने को आदी हो रहे हैं। जिला पंचायत राज विभाग द्वारा गांव में स्वच्छता बनाने के लिए सक्रिय की गई निगरानी समिति बिना किसी प्रोत्साहन के पूरी तरह निष्क्रिय हो गई है।
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गांव में निगरानी समिति के निष्क्रिय होने ओर अधिकारियों ढिलाई से ग्राम पंचायत में स्वच्छ भारत अभियान धड़ाम हो गया है। गांव में बने कई शौचालय उपयोग में न आने के कारण कई लोगों उसे तबेला, ईधन भरने और अन्य कार्यों में प्रयोग कर रहे हैं। ग्रामपंचायत को खुले में शौच मुक्त घोषित किया गया तब ग्राम प्रधान भानू प्रताप दीक्षित केंद्रीय जहाज रानी और नमामि गंगे के मंत्री नितिन गडकरी और उमा भारती ने संयुक्त रूप से पुरस्कृत किया गया था।
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जिला पंचायत राज विभाग के अफसर ग्राम पंचायत को खुले में शौच मुक्त घोषित होने के बाद दोबारा गांव की सुध लेने नहीं पहुंचे, धीरे-धीरे पूरी स्वच्छता व्यवस्था ढेर हो गई। ग्राम विकास अधिकारी गांव में दो वर्षों 315 शौचालय बनवाए गए हैं गांव में स्वच्छता रहे इसके लिए निगरानी समिति भी गठित है, लेकिन ग्रामीण शौचालय का इस्तेमाल नहीं कर रहे।
एडीओ पंचायत राजवीर ने बताया कि शौचालयों का इस्तेमाल न करने वाले लोगों को चिह्नित कर शौचालय प्रोत्साहन राशि की रिकवरी कराई जाएगी इसके साथ-साथ ऐसे लोगों को सरकार की प्रत्येक लाभकारी योजनाओं से वंचित करने की प्रक्रिया अब शुरू की जाएगी।