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नवजात की मौत पर परिजनों का हंगामा  

Fri, 22 Sep 2017 01:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो 
अमर उजाला ब्यूरो  Updated Fri, 22 Sep 2017 01:17 AM IST
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hungama of the family on the death of the newborn
जांच करते हुए । - फोटो : अमर उजाला
डेरापुर। गुरुवार को सीएचसी में प्रसव के लिए भर्ती कराई गई महिला की हालत गंभीर होने पर डॉक्टर ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। परिजन उसे निजी वाहन से  जिला अस्पताल ले जा रहे थे, तभी रास्ते में प्रसूता ने बच्ची को जन्म दे दिया। इस पर परिजनों ने उसे दोबारा लेकर सीएचसी पहुंच गए। आरोप है कि डॉक्टर ने उसे भर्ती करने से इंकार कर दिया। इसी बीच नवजात की मौत हो गई। इससे परिजन आक्रोशित हो गए और हंगामा शुरू कर दिया।  
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बड़ागांव भिक्खी निवासी सुरेंद्र कुमार दिवाकर ने बताया कि उसकी पत्नी नीलम को बुधवार शाम प्रसव पीड़ा हुई। जिसके चलते उसे सीएचसी में भर्ती कराया था। वहां देर रात पत्नी की हालत बिगडने लगी। स्टॉफ नर्स शांति कटियार ने इसकी जानकारी डा. पवन गुप्ता को दी तो  उन्होंने जिला अस्पताल रेफर कर दिया। परिजन निजी वाहन से लेकर जिला अस्पताल जा रहे थे।
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सीएचसी से एक किमी दूर ही पहुंचे थे, तभी गाड़ी में ही नीलम ने बच्ची को जन्म दिया। इस पर वह वापस सीएचसी पहुंच गए। आरोप है कि पहले उसे भर्ती करने से इंकार कर दिया गया। इसके बाद स्टॉफ नर्स ने 21 सौ रुपये लेने के बाद उसे भर्ती किया। दो घंटे तक चली बहस के कारण बच्चे की मौत हो गई। इससे परिजन भड़क गए। उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया।
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इसकी सूचना डाक्टर ने पुलिस को दी। इसके बाद सुरेंद्र ने थाने जाकर स्टाफ नर्स व अस्पताल की दाई के खिलाफ शिकायत की। वहीं घटना की जानकारी पर एसडीएम परवेज अहमद, डिप्टी सीएमओ डॉ. अशोक कुमार, तहसीलदार लाल सिंह, एसएसआई नागेंद्र पाठक पहुंचे। उन्होंने चिकित्सा अधीक्षक से घटना के बाबत जानकारी ली। एसडीएम ने मामले की जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने का भरोसा देकर परिजनों को शांत कराया। डिप्टी सीएमओ ने बताया कि बच्चे की ठंड से मौत होने की बात सामने आई है। लापरवाही के मामले की जांच कराई जा रही है।  


सीएचसी में नहीं है महिला डाक्टर  
सीएचसी डेरापुर में इस समय महिला डाक्टर नहीं है, जिससे यहां गर्भवती महिलाओं के उपचार को लेकर समस्या आती है। प्रसव का कार्य स्टाफ  नर्स व एएनएम के सहारे ही होता है। गंभीर मामले में गर्भवती को जिला अस्पताल रेफर कर जिम्मेदारी से बच लिया जाता है। जिसका खामियाजा जच्चा-बच्चा को भुगतना पड़ता है। ग्रामीणों ने महिला डाक्टर तैनात करने की मांग की है।
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