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जायद की फसलों को नहरों का पानी मिलने की आस
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 04 Mar 2016 01:23 AM IST
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सूखे की मार झेल रहे तहसील क्षेत्र के किसानों को नहर विभाग ने जायद की फसल में (मार्च-अप्रैल) के महीनों में भरपूर पानी उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है। गुरुवार को अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व (कानपुर) शत्रुघ्न सिंह ने नहर विभाग के अधिशाषी अभियंता से वार्ता करने के बाद नहरों में छोड़े जाने वाले पानी की स्थिति के बारे में जानकारी दी।
मालूम हो कि कम बारिश होने से घाटमपुर तहसील के किसान सूखे की मार से परेशान हैं। रबी की मुख्य फसल गेहूं की सिंचाई के लिए भी उनको नहरों से पर्याप्त पानी नहीं मिल पाया। जिसके चलते घाटमपुर, रेउना, भदरस और धरमपुर नहरों से संबद्ध रजबहों और माइनरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचा ही नहीं है। जबकि, मध्य फरवरी में मुख्य नहर को बंदकर दिए जाने से सभी रजबहे सूखे पड़े हुए हैं।
किसानों ने बताया कि एक ओर सूखे की मार और दूसरी तरफ नहर विभाग की बेरुखी से वह टूट चुके हैं। बताया कि मार्च के प्रथम सप्ताह में गेहूं की 80 फीसदी फसल को तीसरी सिंचाई की सख्त जरूरत है। लेकिन, नहर रक्बे के किसान पानी न आने से मायूस हैं और उनके खेतों में बोई गई गेहूं की फसल सूख रही है।
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किसानों ने दो दिन पहले (मंगलवार) को घाटमपुर में जिलाधिकारी के सामने तहसील दिवस में नहरों की समस्या को रखा था। गुरुवार को एमएलसी चुनाव के मतदान की निगरानी करने आए अपर जिलाधिकारी ने घाटमपुर ब्लाक में बैठकर नहर विभाग के अधिशाषी अभियंता आरएन यादव से बात की।
उन्होंने बताया कि बांध में सामान्य से 12 मीटर पानी कम है। जबकि, वहां से कानपुर, फर्रुखाबाद, भोगनीपुर और इटावा की नहरें निकलीं हैं। बताया कि इन नहरों की लंबाई क्रमश: 211, 103, 180 और 177 किलोमीटर है। बताया कि लोअर गंगा कैनाल के लिए 6500 क्यूसेक पानी मिलना चाहिए। लेकिन, कुंभ के लिए पानी दिए जाने से सिर्फ 3300 क्यूसेक ही मिल पा रहा है।
नहर विभाग के अधिकारी ने बताया कि 07 मार्च से कुंभ मेला के लिए दिया जा रहा पानी बंद कर दिया जाएगा। जबकि मार्च-अप्रैल के महीनों में पहाड़ों की बर्फ पिघलने से भी बांध का जलस्तर बढ़ने की उम्मीद है। जिसके चलते नहर रक्बे के किसानों को जायद की फसल में भरपूर पानी देने की योजना तय की गई है। एडीएम वित्त ने बताया कि नहर विभाग के आश्वासन के बाद जिले स्तर पर जल्दी ही एक बैठक करके नहरों/रजबहों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने के लिए कार्ययोजना तय की जानी है।
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मालूम हो कि कम बारिश होने से घाटमपुर तहसील के किसान सूखे की मार से परेशान हैं। रबी की मुख्य फसल गेहूं की सिंचाई के लिए भी उनको नहरों से पर्याप्त पानी नहीं मिल पाया। जिसके चलते घाटमपुर, रेउना, भदरस और धरमपुर नहरों से संबद्ध रजबहों और माइनरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचा ही नहीं है। जबकि, मध्य फरवरी में मुख्य नहर को बंदकर दिए जाने से सभी रजबहे सूखे पड़े हुए हैं।
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किसानों ने बताया कि एक ओर सूखे की मार और दूसरी तरफ नहर विभाग की बेरुखी से वह टूट चुके हैं। बताया कि मार्च के प्रथम सप्ताह में गेहूं की 80 फीसदी फसल को तीसरी सिंचाई की सख्त जरूरत है। लेकिन, नहर रक्बे के किसान पानी न आने से मायूस हैं और उनके खेतों में बोई गई गेहूं की फसल सूख रही है।
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किसानों ने दो दिन पहले (मंगलवार) को घाटमपुर में जिलाधिकारी के सामने तहसील दिवस में नहरों की समस्या को रखा था। गुरुवार को एमएलसी चुनाव के मतदान की निगरानी करने आए अपर जिलाधिकारी ने घाटमपुर ब्लाक में बैठकर नहर विभाग के अधिशाषी अभियंता आरएन यादव से बात की।
उन्होंने बताया कि बांध में सामान्य से 12 मीटर पानी कम है। जबकि, वहां से कानपुर, फर्रुखाबाद, भोगनीपुर और इटावा की नहरें निकलीं हैं। बताया कि इन नहरों की लंबाई क्रमश: 211, 103, 180 और 177 किलोमीटर है। बताया कि लोअर गंगा कैनाल के लिए 6500 क्यूसेक पानी मिलना चाहिए। लेकिन, कुंभ के लिए पानी दिए जाने से सिर्फ 3300 क्यूसेक ही मिल पा रहा है।
नहर विभाग के अधिकारी ने बताया कि 07 मार्च से कुंभ मेला के लिए दिया जा रहा पानी बंद कर दिया जाएगा। जबकि मार्च-अप्रैल के महीनों में पहाड़ों की बर्फ पिघलने से भी बांध का जलस्तर बढ़ने की उम्मीद है। जिसके चलते नहर रक्बे के किसानों को जायद की फसल में भरपूर पानी देने की योजना तय की गई है। एडीएम वित्त ने बताया कि नहर विभाग के आश्वासन के बाद जिले स्तर पर जल्दी ही एक बैठक करके नहरों/रजबहों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने के लिए कार्ययोजना तय की जानी है।