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कोहरे की मार से बर्बादी की कगार पर तिलहनी फसलें
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 07 Dec 2016 01:42 AM IST
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कोहरे की मार से मुरझा रही सरसों की फसल।
- फोटो : अमर उजाला
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बीते कुछ दिनों से पड़ रहे कोहरे की मार से तिलहन की फसलों में ग्रहण लगता जा रहा है। भीषण कोहरे से फसलें मुरझा रही है। लहलाती फसलों पर कोहरे की मार से किसानों के चेहरे भी मुरझाते नजर आ रहे हैं।
तिलहनी फसलों के बाद मूंग की फसल के लिए इस बार क्षेत्र के अधिकतर किसानों ने खेतों में लाही व सरसों की बुवाई की है। फसल भी खूब खेतों में लहलहा रही थी। लेकिन पिछले एक सप्ताह से पड़ रहे भीषण कोहरे ने किसानाें की उम्मीदों पर पानी फेरना शुरु कर दिया है। लगातार गिर रहे कोहरे की वजह से लाही व सरसों के फूल गिरने लगे हैं। इससे कलियोें में दाना भी नही बन रहें है।
गजनेर कस्बा के किसान कुंवरपाल यादव ने बताया कि इस बार सात बीघे खेत में सरसों की फसल बोई है। फसल बहुत अच्छी थी। लेकिन दिन- रात पड़ कोहरे की वजह से सारी उम्मीदों पर पानी फिर रहा है।
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सैंथा गांव के किसान लक्ष्मीकांत मिश्रा ने बताया कि कई साल बाद इस बार तिलहन की फसल बहुत अच्छी थी। लेकिन, कोहरे की मार से फसलें बर्बादी की कगार पर पहुंच गई है। जसवापुर गांव के किसान मनोज बाजपेई ने बताया कि लहलहाती फसल को देखकर बहुत सपने संजोए थे। लेकिन, कोहरे से उम्मीदों व सपनों पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
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तिलहनी फसलों के बाद मूंग की फसल के लिए इस बार क्षेत्र के अधिकतर किसानों ने खेतों में लाही व सरसों की बुवाई की है। फसल भी खूब खेतों में लहलहा रही थी। लेकिन पिछले एक सप्ताह से पड़ रहे भीषण कोहरे ने किसानाें की उम्मीदों पर पानी फेरना शुरु कर दिया है। लगातार गिर रहे कोहरे की वजह से लाही व सरसों के फूल गिरने लगे हैं। इससे कलियोें में दाना भी नही बन रहें है।
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गजनेर कस्बा के किसान कुंवरपाल यादव ने बताया कि इस बार सात बीघे खेत में सरसों की फसल बोई है। फसल बहुत अच्छी थी। लेकिन दिन- रात पड़ कोहरे की वजह से सारी उम्मीदों पर पानी फिर रहा है।
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सैंथा गांव के किसान लक्ष्मीकांत मिश्रा ने बताया कि कई साल बाद इस बार तिलहन की फसल बहुत अच्छी थी। लेकिन, कोहरे की मार से फसलें बर्बादी की कगार पर पहुंच गई है। जसवापुर गांव के किसान मनोज बाजपेई ने बताया कि लहलहाती फसल को देखकर बहुत सपने संजोए थे। लेकिन, कोहरे से उम्मीदों व सपनों पर पानी फिरता नजर आ रहा है।