फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ghatampur News ›   Farmers had to spill tears as the pain

आंसू बनकर छलका पड़ा किसानों का दर्द

Thu, 22 Sep 2016 02:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 22 Sep 2016 02:23 AM IST
विज्ञापन
Farmers had to spill tears as the pain
मूसानगर में राहुल के भाषण सुनने को उमड़ी भीड़। - फोटो : अमर उजाला
कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी की खाट सभा में किसानों का दर्द आंसुओं का सैलाब बन बह निकला। उन्होंने घाटमपुर की दशा बुंदेलखंड से भी खराब बताई। कहा कि बीते 26 सालों के दौरान उनके हालात बदतर होते चले गए हैं। बताया कि वर्ष 2003 से लेकर 2015 के बीच लगातार पांच बार सूखे की मार ने उनको कहीं का नहीं छोड़ा है।
विज्ञापन




एकमात्र चीनी मिल भी बिक गई- घाटमपुर में कांग्रेस के शासनकाल में स्थापित की गई एकमात्र किसान उद्योग आधारित चीनी मिल भी बसपा शासनकाल में वर्ष 2009 में बंद कर दी गई और सपा शासनकाल में उसकी मशीनों की नीलामी कर दी गई।
विज्ञापन


दैवी आपदा की मार ने तोड़ी कमर- घाटमपुर तहसील क्षेत्र के मुगल रोड से दक्षिण की ओर बसे यमुना तटवर्ती 65 गांवों की दशा बुंदेलखंड जैसी ही है। इस क्षेत्र के किसानों ने बताया कि उनके खेतों में सिर्फ मानसूनी बारिश के आधार पर ही खेतों में फसल बोई और काटी जाती है। बताया कि 60 फीसदी कृषि क्षेत्रफल में वर्ष भर में मात्र एक फसल ही हो पाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन



1994 में आई थी बाढ़, फिर कई बार पड़ा सूखा- तहसील क्षेत्र में 29 जुलाई 1994 को एक ही दिन में हुई 172 मिलीमीटर बारिश से दक्षिणी नोन और रिंद नदी के किनारे बसे एक 50 से अधिक गांवों में भीषण बाढ़ आई थी। इसके बाद वर्ष 2003 से लेकर 2015 तक लगातार पांच बार सूखा पड़ा। जिससे तहसील क्षेत्र के किसानों की कमर टूट गई।


अन्ना मवेशी और नीलगाय भी समस्या- तहसील के लगभग सभी गांवों के किसानों का कहना है कि उनके यहां नीलगाय फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा रहे हैं। जबकि, सूखा दर सूखा पड़ने से तमाम पशुपालकों ने अपने मवेशियों जिनमें गोवंश की संख्या अधिक है उनको अन्ना छोड़ दिया है। बताया कि अन्ना मवेशी खेतों में किसी तरह बोई गई फसलों को भी बर्बाद कर रहे हैं।



दैवी आपदा राहत राशि भी नहीं मिली- राहुल गांधी की खाट पंचायत में शामिल होने आए किसानों ने बताया कि तहसील क्षेत्र के साठ फीसदी किसानों को दैवी आपदा राहत राशि के चेक नहीं मिले हैं। इनको मिले भी थे उनमें से अधिकांश के चेकों का पैसा बैंकों से भुगतान ही नहीं किया गया है। बताया कि तहसील क्षेत्र के 73 गांवों के किसानों को फसल बीमा योजना की सूची तक से बाहर कर दिया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed