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सुविधा शुल्क के रूप में 15 हजार न देने पर नहीं मिला इंदिरा आवास
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 20 Aug 2016 01:11 AM IST
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सरकारी योजनाओं को साकार कराने में व्याप्त भ्रष्टाचार गरीबों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। बिचौली गांव में हुए हादसे के लिए कही न कहीं सरकारी तंत्र में व्याप्त खामियां जिम्मेदार हैं। इसकी पोल खुल पीड़ित परिवार के मुखिया कुंवर लाल ने खोली है।
जिला अस्पताल में भर्ती कुंवर लाल ने बताया कि वर्ष 2002 की बीपीएल सूची में उसका नाम दर्ज है। उसके पास गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाला राशन कार्ड भी था। इंदिरा आवास पाने के लिए उसने प्रधान, सचिव, रोजगार सेवक, ब्लाक तक के चक्कर काटे। सैकड़ों बार घर कच्चा होने की जानकारी दी और गरीबी की दुहाई देकर सरकारी इंदिरा आवास दिलाने की मांग की पर कोई सुनवाई नहीं हुई।
कुंवर लाल ने कहा कि गांव से लेकर ब्लाक तक में दलाल हावी हैं। गांव के रोजगार सेवक ने उससे आवास दिलाने के नाम पर 15 हजार रुपये सुविधा शुल्क की मांग की। पैसा न होने से सुविधा शुल्क नहीं दे सका। उसका आरोप है कि इस कारण जानबूझकर उसे आवास नहीं दिया गया। सुविधा शुल्क मांगने की जानकारी ब्लाक के अधिकारियों को दी पर अनसुनी कर दी गई। कुंवरलाल का कहना है कि रिश्वत न देने के कारण उसे आवास नहीं मिल सका।
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यदि इंदिरा आवास के तहत पक्का घर बन गया होता तो शायद आज उसकी बेटियां, नाती व नातिन जिंदा होती। ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि राजपाल सिंह का कहना है कि कुंवरलाल इंदिरा आवास के लिए पात्र है, लेकिन उसे आवास न मिल पाने के लिए पूर्व के प्रधान व रोजगार सेवक जिम्मेदार हैं। उनके कार्यकाल में कोई इंदिरा या लोहिया आवास नहीं आवंटित हुआ है। उनके कार्यकाल में पहली बार प्रधानमंत्री आवास योजना शुरू हुई, जिसके लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया में कुंवरलाल का नाम वह शामिल कराएंगे।
=राजपाल सिंह का कहना है कि रोजगार सेवक की भ्रष्ट कार्यप्रणाली से आजिज आकर ही उन्होंने उनसे काम कराना बंद कर दिया है। उसके द्वारा अवैध वसूली करने की शिकायतें सचिव से लेकर बीडीओ तक से की हैं।
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जिला अस्पताल में भर्ती कुंवर लाल ने बताया कि वर्ष 2002 की बीपीएल सूची में उसका नाम दर्ज है। उसके पास गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाला राशन कार्ड भी था। इंदिरा आवास पाने के लिए उसने प्रधान, सचिव, रोजगार सेवक, ब्लाक तक के चक्कर काटे। सैकड़ों बार घर कच्चा होने की जानकारी दी और गरीबी की दुहाई देकर सरकारी इंदिरा आवास दिलाने की मांग की पर कोई सुनवाई नहीं हुई।
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कुंवर लाल ने कहा कि गांव से लेकर ब्लाक तक में दलाल हावी हैं। गांव के रोजगार सेवक ने उससे आवास दिलाने के नाम पर 15 हजार रुपये सुविधा शुल्क की मांग की। पैसा न होने से सुविधा शुल्क नहीं दे सका। उसका आरोप है कि इस कारण जानबूझकर उसे आवास नहीं दिया गया। सुविधा शुल्क मांगने की जानकारी ब्लाक के अधिकारियों को दी पर अनसुनी कर दी गई। कुंवरलाल का कहना है कि रिश्वत न देने के कारण उसे आवास नहीं मिल सका।
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यदि इंदिरा आवास के तहत पक्का घर बन गया होता तो शायद आज उसकी बेटियां, नाती व नातिन जिंदा होती। ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि राजपाल सिंह का कहना है कि कुंवरलाल इंदिरा आवास के लिए पात्र है, लेकिन उसे आवास न मिल पाने के लिए पूर्व के प्रधान व रोजगार सेवक जिम्मेदार हैं। उनके कार्यकाल में कोई इंदिरा या लोहिया आवास नहीं आवंटित हुआ है। उनके कार्यकाल में पहली बार प्रधानमंत्री आवास योजना शुरू हुई, जिसके लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया में कुंवरलाल का नाम वह शामिल कराएंगे।
=राजपाल सिंह का कहना है कि रोजगार सेवक की भ्रष्ट कार्यप्रणाली से आजिज आकर ही उन्होंने उनसे काम कराना बंद कर दिया है। उसके द्वारा अवैध वसूली करने की शिकायतें सचिव से लेकर बीडीओ तक से की हैं।