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आग से बचने के तौर-तरीके समझाए
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 25 Aug 2016 01:42 AM IST
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.हाल के अंदर सिलेंडर में लगी आग बुझाने का डैमो दिखाते फायर कर्मी।
- फोटो : अमर उजाला
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अग्निशमन विभाग ने अकबरपुर डिग्री कालेज सभागार में जन जागरूकता अभियान के तहत एक कार्यक्रम में छात्रों को आग से बचाव के तरीके समझाएं।
मुख्य वक्ता उप निदेशक फायर सर्विस कानपुर-झांसी परिक्षेत्र पीपी अवस्थी ने कहा कि भवन ऐसा होना चाहिए, जिसमें फंसे व्यक्ति को आपातकाल में आसानी से निकाला जा सके।
फैक्ट्री भवन, स्कूल, गेस्टहाउस, बहुमंजिली भवनों में मुख्य जीना के अतिरिक्त फायर स्केप होना चाहिए। जीने के पास होजरील का प्रबंध होना चाहिए। रिजर्व वाटर टैंक भी होना आवश्यक है। फायर पंप लगाए जाएं। इलेक्ट्रानिक फायर एलार्म सिस्टम हो। आग की सूचना फौरन पुलिस व फायर कंट्रोल रूम को दें।
अग्निशमन अधिकारी शिवदरस ने कहा कि प्रशिक्षण पाने वाले विद्यार्थी व फैक्ट्रियों, वर्कशाप, शो-रूम, पेट्रोल पंप में काम करने वाले कर्मचारी कम से कम अपने चार दोस्तों या आस-पास रहने वालों को प्रशिक्षित करें।
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मुख्य अग्निशमन अधिकारी वीपी सिंह ने कहा कि धुआं के फैलाव की रोकथाम के लिए उचित उपाय करें। वेंटीलेशन की व्यवस्था जरूर करें। सोसाइटी फार ग्रीन इंडिया हाईटेक सिटी के सचिव रजत गुप्ता ने कहा कि आग की घटनाओं में कमी लाने के लिए स्कूल व कालेजों को माध्यम बनाना बेहतर कदम है।
मुख्य मास्टर ट्रेनर आपदा प्रबंधन लखन शुक्ला ने बताया कि आग से झुलसने या जलने पर पीड़ित को तत्काल प्राथमिक उपचार देकर अस्पताल भिजवाएं। फर्स्ट एड का उपयोग घायल की जान बचाने में कारगर होता है।
खचाखच भरे हाल में सिलेंडर में आग का प्रदर्शन- कानपुर देहात। अकबरपुर महाविद्यालय के खचाखच भरे सभागार में ही गैस सिलेंडर में आग लगाकर प्रदर्शन किया। लेकिन सुरक्षा को देखकर पुलिस अधीक्षक व अन्य अधिकारियों ने जब आपत्ति की तो खुले मैदान में प्रदर्शन दिखाया गया।
हुआ यूं कि घरेलू सिलेंडर में आग से बचाव के प्रति स्टूडेंट्स व कर्मियों को जागरूक करने के दौरान सभागार में एक सिलेंडर में आग लगाई गई। तेज लपटे उठने के बाद दमकल कर्मी आग बुझाने के उपाय बताने लगे। इस पर एसपी पुष्पांजलि ने दखल दिया। अधिकारियों ने कहा कि हाल खचाखच भरा है। ऐसे में भगदड़ मच सकती है। ऐसे प्रदर्शन आगे से खुले स्थान पर कराया जाएं।
अग्निशमन अधिकारी शिवदरस प्रसाद का कहना है कि सिलेंडर में आग आम तौर पर किचन व घरों में ही लगती है। बेहतर डेमो पेश करने के लिए हाल के अंदर सिलेंडर ले जाकर ऐसा किया गया। इसमें नियमानुसार कुछ भी गलत नहीं है। बल्कि वास्तविक दृश्य उत्पन्न होता है।
जब तक सिलेंडर से अधिकतम पौने एक मीटर दायरे में लपटें फैलती हैं, लोग डरकर उसे जमीन पर पलटने या उलटने-पुलटने लगते हैं। कई बार तो कपड़े से सिलेंडर को ढंकने का प्रयास करते हैं। ऐसा करने के बजाय रेगुलेटर लगाए जाने वाले स्थान पर से आग बुझानी चाहिए। हाल में जलते सिलेंडर से डेमो में कोई खतरा नहीं था।
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मुख्य वक्ता उप निदेशक फायर सर्विस कानपुर-झांसी परिक्षेत्र पीपी अवस्थी ने कहा कि भवन ऐसा होना चाहिए, जिसमें फंसे व्यक्ति को आपातकाल में आसानी से निकाला जा सके।
फैक्ट्री भवन, स्कूल, गेस्टहाउस, बहुमंजिली भवनों में मुख्य जीना के अतिरिक्त फायर स्केप होना चाहिए। जीने के पास होजरील का प्रबंध होना चाहिए। रिजर्व वाटर टैंक भी होना आवश्यक है। फायर पंप लगाए जाएं। इलेक्ट्रानिक फायर एलार्म सिस्टम हो। आग की सूचना फौरन पुलिस व फायर कंट्रोल रूम को दें।
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अग्निशमन अधिकारी शिवदरस ने कहा कि प्रशिक्षण पाने वाले विद्यार्थी व फैक्ट्रियों, वर्कशाप, शो-रूम, पेट्रोल पंप में काम करने वाले कर्मचारी कम से कम अपने चार दोस्तों या आस-पास रहने वालों को प्रशिक्षित करें।
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मुख्य अग्निशमन अधिकारी वीपी सिंह ने कहा कि धुआं के फैलाव की रोकथाम के लिए उचित उपाय करें। वेंटीलेशन की व्यवस्था जरूर करें। सोसाइटी फार ग्रीन इंडिया हाईटेक सिटी के सचिव रजत गुप्ता ने कहा कि आग की घटनाओं में कमी लाने के लिए स्कूल व कालेजों को माध्यम बनाना बेहतर कदम है।
मुख्य मास्टर ट्रेनर आपदा प्रबंधन लखन शुक्ला ने बताया कि आग से झुलसने या जलने पर पीड़ित को तत्काल प्राथमिक उपचार देकर अस्पताल भिजवाएं। फर्स्ट एड का उपयोग घायल की जान बचाने में कारगर होता है।
खचाखच भरे हाल में सिलेंडर में आग का प्रदर्शन- कानपुर देहात। अकबरपुर महाविद्यालय के खचाखच भरे सभागार में ही गैस सिलेंडर में आग लगाकर प्रदर्शन किया। लेकिन सुरक्षा को देखकर पुलिस अधीक्षक व अन्य अधिकारियों ने जब आपत्ति की तो खुले मैदान में प्रदर्शन दिखाया गया।
हुआ यूं कि घरेलू सिलेंडर में आग से बचाव के प्रति स्टूडेंट्स व कर्मियों को जागरूक करने के दौरान सभागार में एक सिलेंडर में आग लगाई गई। तेज लपटे उठने के बाद दमकल कर्मी आग बुझाने के उपाय बताने लगे। इस पर एसपी पुष्पांजलि ने दखल दिया। अधिकारियों ने कहा कि हाल खचाखच भरा है। ऐसे में भगदड़ मच सकती है। ऐसे प्रदर्शन आगे से खुले स्थान पर कराया जाएं।
अग्निशमन अधिकारी शिवदरस प्रसाद का कहना है कि सिलेंडर में आग आम तौर पर किचन व घरों में ही लगती है। बेहतर डेमो पेश करने के लिए हाल के अंदर सिलेंडर ले जाकर ऐसा किया गया। इसमें नियमानुसार कुछ भी गलत नहीं है। बल्कि वास्तविक दृश्य उत्पन्न होता है।
जब तक सिलेंडर से अधिकतम पौने एक मीटर दायरे में लपटें फैलती हैं, लोग डरकर उसे जमीन पर पलटने या उलटने-पुलटने लगते हैं। कई बार तो कपड़े से सिलेंडर को ढंकने का प्रयास करते हैं। ऐसा करने के बजाय रेगुलेटर लगाए जाने वाले स्थान पर से आग बुझानी चाहिए। हाल में जलते सिलेंडर से डेमो में कोई खतरा नहीं था।