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जाड़े में दम तोड़ रही हैंडपंप की सांसें
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 04 Jan 2016 01:00 AM IST
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भीतरगांव क्षेत्र में जनवरी के महीने में ही हैंडपंप जवाब देने लगे हैं। पानी का संकट देखकर यहां के लोग आने वाली गर्मी को यादकर अभी से सिहर उठते हैं।
विकास खंड मुख्यालय से सटे लोहिया समग्र गांव तिवारीपुर में पेयजल संकट के हालात बानगी भर हैं। जहां 52 हैंडपंपों में 41 ने जवाब दे दिया।
कुछ में एक-दो बाल्टी पानी निकलने के बाद बालू आने लगता है। जल निगम के जेई विवेकानंद तिवारी ने बताया कि गांवों में भूगर्भ जलस्तर 100 से लेकर 120 फिट नीचे है। कम गहराई में लगे हैंडपंपों में समस्या पैदा हो रही है।
रविवार को विकासखंड क्षेत्र के गांव तिवारीपुर में समाचार प्रतिनिधि पहुंचे तो उन्हें पानी पर अलग नजारा दिखाई दिया। एक हैंडपंप को कई ग्रामीण घेरे हुए थे। पूछने पर पता चला कि गांव के अधिकतर हैंडपंप ठूंठ हो गए, जो चल रहे हैं उसमें एक-दो बाल्टी साफ पानी के बाद कीचड़ आने लगता है।
गांव के प्रधान फूलसिंह यादव और ग्रामीणों देवनरायण, बउवन, परदेशी, बैकुंठ शुक्ला, देवीप्रसाद यादव, सूर्यकांत तिवारी, शिवेंद्र, भूरा और सिद्धार्थ सिंह ने बताया कि उनके गांव के अलावा पड़ोसी गांवों पसेमा, पासीखेड़ा, मलखानपुर, बारीगांव, पालपुर, मड़ेपुर, शाहपुर, बेरीखेड़ा, बिरहर, खुचकीपुर, हरीपुर, इटहरा, बौहार, उदयीपुर-गुगुरा और पालपुर सहित कई गांवों में भी यही हालात हैं।
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स्थानीय निवासियों का कहना है कि आठ साल पहले डार्क जोन घोषित किया गया, गहरी बोरिंग पर रोक लगाई गई थी। बावजूद इसके सुझाव को ठंडे बस्ते में डालने से समस्या जस की तस बनी है।
ग्रामीण पवन कुमार यादव ने बताया कि 20 से अधिक हैंडपंपों में अतिरिक्त पाइप डलवाने के लिए संबंधित विभाग को शिकायती पत्र लिखा है।
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विकास खंड मुख्यालय से सटे लोहिया समग्र गांव तिवारीपुर में पेयजल संकट के हालात बानगी भर हैं। जहां 52 हैंडपंपों में 41 ने जवाब दे दिया।
कुछ में एक-दो बाल्टी पानी निकलने के बाद बालू आने लगता है। जल निगम के जेई विवेकानंद तिवारी ने बताया कि गांवों में भूगर्भ जलस्तर 100 से लेकर 120 फिट नीचे है। कम गहराई में लगे हैंडपंपों में समस्या पैदा हो रही है।
रविवार को विकासखंड क्षेत्र के गांव तिवारीपुर में समाचार प्रतिनिधि पहुंचे तो उन्हें पानी पर अलग नजारा दिखाई दिया। एक हैंडपंप को कई ग्रामीण घेरे हुए थे। पूछने पर पता चला कि गांव के अधिकतर हैंडपंप ठूंठ हो गए, जो चल रहे हैं उसमें एक-दो बाल्टी साफ पानी के बाद कीचड़ आने लगता है।
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गांव के प्रधान फूलसिंह यादव और ग्रामीणों देवनरायण, बउवन, परदेशी, बैकुंठ शुक्ला, देवीप्रसाद यादव, सूर्यकांत तिवारी, शिवेंद्र, भूरा और सिद्धार्थ सिंह ने बताया कि उनके गांव के अलावा पड़ोसी गांवों पसेमा, पासीखेड़ा, मलखानपुर, बारीगांव, पालपुर, मड़ेपुर, शाहपुर, बेरीखेड़ा, बिरहर, खुचकीपुर, हरीपुर, इटहरा, बौहार, उदयीपुर-गुगुरा और पालपुर सहित कई गांवों में भी यही हालात हैं।
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स्थानीय निवासियों का कहना है कि आठ साल पहले डार्क जोन घोषित किया गया, गहरी बोरिंग पर रोक लगाई गई थी। बावजूद इसके सुझाव को ठंडे बस्ते में डालने से समस्या जस की तस बनी है।
ग्रामीण पवन कुमार यादव ने बताया कि 20 से अधिक हैंडपंपों में अतिरिक्त पाइप डलवाने के लिए संबंधित विभाग को शिकायती पत्र लिखा है।