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63 वटुकों को धारण कराए गए यज्ञोपीवीत
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 25 Feb 2016 01:09 AM IST
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घाटमपुर कसबे के कूष्मांडा देवी मंदिर परिसर की यज्ञशाला में आयोजित किए गए संस्कार महोत्सव में 63 वटुकों को यज्ञोपवीत धारण कराए गए।
भानुपुरा पीठ (मध्य प्रदेश) के शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ ने वटुकों को आशीर्वाद प्रदान किया। कसबे की मानव संस्कार समिति के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सुबह से ही कूष्मांडा देवी मंदिर परिसर में भीड़ एकत्र होनी शुरू हो गई। लोग अपने बच्चों को यज्ञोपवीत धारण करवाने के लिए पहले से समिति में रजिस्ट्रेशन करवा चुके थे।
सुबह 9 बजे से यज्ञोपवीत संस्कार शुरू हुआ। आचार्यों ने वटुकों का मंडन करवाने के बाद उनको दंड और मृगचर्म धारण करवाया। इसके बाद यज्ञोपवीत संस्कार की रस्में शुरू हुईं। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ वेदिकाओं में कराए हवन गए में आहुतियां डलवाई गईं।
आचार्यों ने वटुकों को ब्रह्मचर्य धारण करने के महत्व को समझाने के साथ ही विद्या अध्ययन करने और कराने के बारे में भी बताया।
कहा कि यज्ञोपवीत धारण करने का तात्पर्य है कि अब हम शिक्षा ग्रहण करने के साथ ही अपने से बड़ों का आदर और उनकी सेवा करना भी सीखें। वटुकों ने आचार्यों के बताए सूत्रों का पालन करने की शपथ ली। वहीं भिक्षाटन कार्यक्रम में माताओं ने वटुकों की झोली और पत्तलों में अन्न, वस्त्र, फल और मेवा-मिष्ठान्न प्रदान किए। आयोजन में मानव संस्कार सेवा समिति से जुड़े लोग मौजूद रहे।
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भानुपुरा पीठ (मध्य प्रदेश) के शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ ने वटुकों को आशीर्वाद प्रदान किया। कसबे की मानव संस्कार समिति के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सुबह से ही कूष्मांडा देवी मंदिर परिसर में भीड़ एकत्र होनी शुरू हो गई। लोग अपने बच्चों को यज्ञोपवीत धारण करवाने के लिए पहले से समिति में रजिस्ट्रेशन करवा चुके थे।
सुबह 9 बजे से यज्ञोपवीत संस्कार शुरू हुआ। आचार्यों ने वटुकों का मंडन करवाने के बाद उनको दंड और मृगचर्म धारण करवाया। इसके बाद यज्ञोपवीत संस्कार की रस्में शुरू हुईं। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ वेदिकाओं में कराए हवन गए में आहुतियां डलवाई गईं।
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आचार्यों ने वटुकों को ब्रह्मचर्य धारण करने के महत्व को समझाने के साथ ही विद्या अध्ययन करने और कराने के बारे में भी बताया।
कहा कि यज्ञोपवीत धारण करने का तात्पर्य है कि अब हम शिक्षा ग्रहण करने के साथ ही अपने से बड़ों का आदर और उनकी सेवा करना भी सीखें। वटुकों ने आचार्यों के बताए सूत्रों का पालन करने की शपथ ली। वहीं भिक्षाटन कार्यक्रम में माताओं ने वटुकों की झोली और पत्तलों में अन्न, वस्त्र, फल और मेवा-मिष्ठान्न प्रदान किए। आयोजन में मानव संस्कार सेवा समिति से जुड़े लोग मौजूद रहे।
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