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बैंकों में उमड़ी जरूरतमंदों की भीड़
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर देहात
Updated Wed, 14 Dec 2016 02:02 AM IST
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एचडीएफसी बैंक अकबरपुर में लगी लंबी कतार।
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तीन दिन के अवकाश के बाद खुले बैंकों में रुपये जमा करने और निकालने लिए लोगों की भीड़ उमड़ी। बैंकों में भीड़ का आलम यह था कि बैकों के बाहर तक लोग लाइन लगाए खड़े नजर आए। तीन दिन की छुट्टी होने से लोग काफी परेशान रहे। बंद हुए पुराने नोट जमा करने की तारीख नजदीक आते ही बैंकों में भीड़ उमड़नी शुरू हो गई। वहीं नोटबंदी को एक माह से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
मंगलवार को तीन दिन की छुट्टी के बाद खुले बैंकों में लोगों की जबरदस्त भीड़ नजर आई। बैंक खुलने से पहले ही लोग जमा होना शुरू हो गए। बैंक खुलते ही लोगों की भीड़ काउंटर पर एकत्रित हो गई। बैंककर्मियों ने लोगों से लाइन में आकर रुपये जमा व निकालने का अनुरोध किया, लेकिन भीड़ के न सुनने पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने लोगों को कतार में लगवाया।
वहीं नोटबंदी को एक माह से अधिक का समय बीत गया है, लेकिन लोगों को समस्या से निजात नहीं मिल रही है। बैंकों में पर्याप्त कैश न होेने से खाताधारकों को रुपये नहीं मिल रहे है। बैंकों में प्रति ग्राहक 24 हजार रुपये देने का फरमान बैंक में हवा हवाई साबित हो रहा है। लोगों ने बताया कि बैंक कर्मी कैश न होने की बात कहकर पांच से दस हजार रुपये ही देते है।
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वहीं बैंक कर्मी कैश की किल्लत पर रिजर्व बैंक के पाले में गेंद फेंक देते हैं। नोटबंदी के संकट को दूर करने के लिए स्वाइप मशीनों को बाजार में उतारा गया, लेकिन ग्रामीणों में इसकी जानकारी न होने व गलत इस्तेमाल होने के डर से सफलता नहीं मिल रही है।
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मंगलवार को तीन दिन की छुट्टी के बाद खुले बैंकों में लोगों की जबरदस्त भीड़ नजर आई। बैंक खुलने से पहले ही लोग जमा होना शुरू हो गए। बैंक खुलते ही लोगों की भीड़ काउंटर पर एकत्रित हो गई। बैंककर्मियों ने लोगों से लाइन में आकर रुपये जमा व निकालने का अनुरोध किया, लेकिन भीड़ के न सुनने पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने लोगों को कतार में लगवाया।
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वहीं नोटबंदी को एक माह से अधिक का समय बीत गया है, लेकिन लोगों को समस्या से निजात नहीं मिल रही है। बैंकों में पर्याप्त कैश न होेने से खाताधारकों को रुपये नहीं मिल रहे है। बैंकों में प्रति ग्राहक 24 हजार रुपये देने का फरमान बैंक में हवा हवाई साबित हो रहा है। लोगों ने बताया कि बैंक कर्मी कैश न होने की बात कहकर पांच से दस हजार रुपये ही देते है।
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वहीं बैंक कर्मी कैश की किल्लत पर रिजर्व बैंक के पाले में गेंद फेंक देते हैं। नोटबंदी के संकट को दूर करने के लिए स्वाइप मशीनों को बाजार में उतारा गया, लेकिन ग्रामीणों में इसकी जानकारी न होने व गलत इस्तेमाल होने के डर से सफलता नहीं मिल रही है।