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150 साल पुराने निचली गंग नहर पुल दे गए जवाब
अमर उजाला ब्यूूराो
Updated Mon, 04 Apr 2016 01:07 AM IST
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तहसील क्षेत्र को कानपुर देहात, औरैया, इटावा, कन्नौज जिलों से जोड़ने वाले निचली गंग नहर के सभी पुल कई दशक पहले ही मियाद खो चुके हैं।
नहर पर बने तीन पुलों पर सर्वाधिक वाहनों का आवागमन हैं। इनमें आइमा, भौसाना नहर पुल को पीडब्लूडी ने पहले ही बंद कर दिया है, जबकि शेष सभी पर भारी वाहनों के गुजरने से दुर्घटना की आशंका भी पीडब्लूडी के अधिकारियों ने जताई है।
आइमा और शिवराजपुर के मध्य अब सिर्फ ककवन के पुल पर ही वाहनों का आवागमन सर्वाधिक है। ऐसे में हाईवे निर्माण में लगे डंपर व ओवरलोड वाहनों के गुजरने से पुल क्षतिग्रस्त हो सकता है।
अंग्रेज शासकों ने क्षेत्र की सिंचाई के लिए निचली गंग नहर का निर्माण कराया था। इस नहर से कई जिलों, विकास खंडों में बड़ी संख्या में खेतों की सिंचाई होती है। कानपुर महानगर की कई औद्योगिक इकाइयों और पनकी पावर हाउस प्लांट को पानी की सप्लाई भी इसी नहर से की जाती है। जबकि उत्तरीपुरा में लग रहे 1,320 मेगावाट क्षमता के विद्युत संयंत्र को भी इसी नहर से जल की आपूर्ति की जाएगी।
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कन्नौज जिले के भी एक बड़े भूभाग को इसी नहर से सिंचाई का पानी मिलता है, लेकिन इसके बाद भी इस नहर की खस्ताहाल पटरी, आवागमन के जर्जर पुलों, सिंचाई विभाग की चौकियां, झालें, कोठियां सहित कई संपत्तियां अनदेखी व दुर्दशा का शिकार हैं। इसी नहर से सरकार को भारी राजस्व भी मिलता है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण ककवन, खरपतपुर झाल के भवन धराशाई हो चुके हैं। विभाग की संपत्ति को नशेड़ी व अन्य अराजक तत्व नुकसान पहुंचा रहे हैं। उधर बिल्हौर और कानपुर देहात को जोड़नी वाली नहर पर वर्ष 1850 के करीब आवागमन के लिए बना पुल अब अपनी मियाद खो चुका हैं।
होली के दिन ही भौसाना नहर पुल से एक ट्रक नहर में जा गिरा था, इसी तरह आइमा पुल को पीडब्लूडी ने पूरी तरह बंद कर दिया है। लोकनिर्माण विभाग ने सभी पुलों से पल्ला झाड़ लिया है। मियाद खो चुके नहर पर बने सभी पुल क्षतिग्रस्त होने से आसपास गांवों के हजारों लोगों के लिए परेशानी बना हैं।
क्षेत्र के दो प्रमुख पुलों आइमा व भौसाना के बंद होने से इनका पूरा ट्रैफिक अब ककवन नहर पुल पर आ गया है। इस कारण और भी डर है। अभी बिल्हौर मकनपुर बाया रसूलाबाद, शिवराजपुर-शिवली मार्ग पर आवागमन पूरी तरह बंद है। ककवन पुलिस ने वाहनों को रोकने के लिए आइमा पुल पर बैरीकेटिंग कर सिपाहियों की ड्यूटी लगाई है।
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नहर पर बने तीन पुलों पर सर्वाधिक वाहनों का आवागमन हैं। इनमें आइमा, भौसाना नहर पुल को पीडब्लूडी ने पहले ही बंद कर दिया है, जबकि शेष सभी पर भारी वाहनों के गुजरने से दुर्घटना की आशंका भी पीडब्लूडी के अधिकारियों ने जताई है।
आइमा और शिवराजपुर के मध्य अब सिर्फ ककवन के पुल पर ही वाहनों का आवागमन सर्वाधिक है। ऐसे में हाईवे निर्माण में लगे डंपर व ओवरलोड वाहनों के गुजरने से पुल क्षतिग्रस्त हो सकता है।
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अंग्रेज शासकों ने क्षेत्र की सिंचाई के लिए निचली गंग नहर का निर्माण कराया था। इस नहर से कई जिलों, विकास खंडों में बड़ी संख्या में खेतों की सिंचाई होती है। कानपुर महानगर की कई औद्योगिक इकाइयों और पनकी पावर हाउस प्लांट को पानी की सप्लाई भी इसी नहर से की जाती है। जबकि उत्तरीपुरा में लग रहे 1,320 मेगावाट क्षमता के विद्युत संयंत्र को भी इसी नहर से जल की आपूर्ति की जाएगी।
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कन्नौज जिले के भी एक बड़े भूभाग को इसी नहर से सिंचाई का पानी मिलता है, लेकिन इसके बाद भी इस नहर की खस्ताहाल पटरी, आवागमन के जर्जर पुलों, सिंचाई विभाग की चौकियां, झालें, कोठियां सहित कई संपत्तियां अनदेखी व दुर्दशा का शिकार हैं। इसी नहर से सरकार को भारी राजस्व भी मिलता है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण ककवन, खरपतपुर झाल के भवन धराशाई हो चुके हैं। विभाग की संपत्ति को नशेड़ी व अन्य अराजक तत्व नुकसान पहुंचा रहे हैं। उधर बिल्हौर और कानपुर देहात को जोड़नी वाली नहर पर वर्ष 1850 के करीब आवागमन के लिए बना पुल अब अपनी मियाद खो चुका हैं।
होली के दिन ही भौसाना नहर पुल से एक ट्रक नहर में जा गिरा था, इसी तरह आइमा पुल को पीडब्लूडी ने पूरी तरह बंद कर दिया है। लोकनिर्माण विभाग ने सभी पुलों से पल्ला झाड़ लिया है। मियाद खो चुके नहर पर बने सभी पुल क्षतिग्रस्त होने से आसपास गांवों के हजारों लोगों के लिए परेशानी बना हैं।
क्षेत्र के दो प्रमुख पुलों आइमा व भौसाना के बंद होने से इनका पूरा ट्रैफिक अब ककवन नहर पुल पर आ गया है। इस कारण और भी डर है। अभी बिल्हौर मकनपुर बाया रसूलाबाद, शिवराजपुर-शिवली मार्ग पर आवागमन पूरी तरह बंद है। ककवन पुलिस ने वाहनों को रोकने के लिए आइमा पुल पर बैरीकेटिंग कर सिपाहियों की ड्यूटी लगाई है।