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दहेज हत्या में पति को दस वर्ष की कैद
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 14 Jun 2018 01:09 AM IST
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कोर्ट का फैसला।
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कानपुर देहात। अकबरपुर कोतवाली के नबीपुर में पत्नी की हत्या में दोषी पाए जाने पर अदालत ने पति को दस वर्ष की सजा सुनाई। वहीं, साक्ष्य के अभाव में विवाहिता के ससुर दोषमुक्त कर दिया गया। मामले की सुनवाई अपर जिला सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय के यहां चल रही थी।
शिवनी कुरारा हमीरपुर के रामजीवन ने 14 अप्रैल 2011 को अकबरपुर कोतवाली में तहरीर देकर बताया था कि उसकी पुत्री रूबी उर्फ गुड़िया की पति धर्मेंद्र उर्फ करियल व ससुर महेश विश्वकर्मा ने मिलकर हत्या कर दी। वह दहेज मेें बाइक व सोने की जंजीर की मांग कर रहे थे। उसकी शादी 9 फरवरी 2011 को हुई थी। इसके बाद से उसे लगातार परेशान किया जा रहा था।
13 अप्रैल की रात उसे पीटा, वहीं मौत हो जाने पर शव को फांसी पर लटका दिया था। मामले की सुनवाई अपर जिला सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय रणजीत सिंह की अदालत में चल रही थी। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया था।
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बुधवार को दोष सिद्ध हो जाने पर अदालत ने पति धर्मेंद्र को दस वर्ष की कैद व दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। साक्ष्यों के अभाव में मृतका के ससुर को दोषमुक्त कर दिया गया। शासकीय अधिवक्ता उदयवीर सिंह गौर ने बताया कि जुर्माना अदा न करने पर अभियुक्त को तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतान पड़ेगा।
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शिवनी कुरारा हमीरपुर के रामजीवन ने 14 अप्रैल 2011 को अकबरपुर कोतवाली में तहरीर देकर बताया था कि उसकी पुत्री रूबी उर्फ गुड़िया की पति धर्मेंद्र उर्फ करियल व ससुर महेश विश्वकर्मा ने मिलकर हत्या कर दी। वह दहेज मेें बाइक व सोने की जंजीर की मांग कर रहे थे। उसकी शादी 9 फरवरी 2011 को हुई थी। इसके बाद से उसे लगातार परेशान किया जा रहा था।
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13 अप्रैल की रात उसे पीटा, वहीं मौत हो जाने पर शव को फांसी पर लटका दिया था। मामले की सुनवाई अपर जिला सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय रणजीत सिंह की अदालत में चल रही थी। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया था।
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बुधवार को दोष सिद्ध हो जाने पर अदालत ने पति धर्मेंद्र को दस वर्ष की कैद व दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। साक्ष्यों के अभाव में मृतका के ससुर को दोषमुक्त कर दिया गया। शासकीय अधिवक्ता उदयवीर सिंह गौर ने बताया कि जुर्माना अदा न करने पर अभियुक्त को तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतान पड़ेगा।