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...जब गैंगरेप की शिकार फूलन ने उठा ली थी बंदूक
कानपुर/ब्यूरो
Updated Wed, 09 Jan 2013 06:19 PM IST
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दिल्ली गैंगरेप की गूंज पूरे देश में सुनाई पड़ रही है। हर तरफ से सिर्फ एक ही आवाज आ रही है कि इस वीभत्स घटना के दोषियों को फांसी दी जाए। वहीं, गैंगरेप से जुड़ी एक घटना ऐसी भी है, जिसमें दरिंदगी की शिकार महिला ने खुद दरिंदों को मौत की सजा दी थी। उस महिला का नाम है फूलन देवी। पुलिस-प्रशासन की सुस्त व्यवस्था से त्रस्त फूलन देवी ने गैंगरेप के दोषियों को खुद ही सजा दे डाली थी।
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फूलन देवी के साथ लालाराम और उसके साथियों ने बेहमई गांव में गैंगरेप किया था। गैंगरेप के खिलाफ फूलन देवी ने बंदूक उठाई और खुद का गैंग बनाकर चंबल में उतर गई। फूलन देवी ने 14 फरवरी 1981 को बेहमई गांव में गैंगरेप के दोषी 22 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था।
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इस मामले में पहले चार डकैत फूलनदेवी, मुस्तकीम, रामऔतार और लल्लू को नामजद किया गया था। बाद में 30-35 अन्य लोग नामजद किए गए। यह मामला इतना चर्चित हुआ था कि मुख्य अभियुक्त फूलनदेवी पर कई फिल्में बन चुकी हैं। फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ ने तो विदेश में भी डंका बजाया था। 1981 में ही अलग-अलग सभी अभियुक्तों की चार्जशीट दाखिल की गई।
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इस घटना के मुख्य आरोपी फूलन देवी, मुस्तकीम, लल्लू और रामऔतार की मौत हो चुकी है। इस मुकदमे में करीब 600 तारीखें पड़ चुकी हैं और ज्यादातर गवाहों की मौत हो चुकी है। पुलिस की लापरवाही का आलम यह है कि कई अभियुक्त अभी तक फरार चल रहे हैं। जमानत मिलने के बावजूद जमानतगीरों की व्यवस्था न होने से एक अभियुक्त जेल में है।
अभियुक्त श्यामबाबू (गांव साला, औरैया), विश्वनाथ उर्फ पुतानी उर्फ अशोक (महेशपुर, सिकंदरा) और रामरतन (ग्राम पाल जालौन) फरार चल रहे हैं। कोर्ट से इनकी गिरफ्तारी और कुर्की के आदेश हैं लेकिन पुलिस गिरफ्तारी तो दूर, कुर्की तामील तक नहीं करा पा रही है। जालौन निवासी राम सिंह आठ दिसंबर 2010 से इस मामले में कानपुर देहात जेल में बंद है। दो जून 2012 को एडीजे-7 कानपुर देहात कोर्ट से 30-30 हजार की दो जमानतों पर उसे रिहा करने का आदेश हो गया था, लेकिन जमानतगीर न मिलने के कारण वह जेल में है।