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ये माननीय सचिवालय में कर रहे थे 'धंधा'

Mon, 01 Jul 2013 12:30 PM IST
लखनऊ/ इंटरनेट डेस्क
लखनऊ/ इंटरनेट डेस्क Updated Mon, 01 Jul 2013 12:30 PM IST
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fraud racket caught in secretariate

विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय के ओएसडी आरसी मिश्र और निजी सचिव जय किशोर द्विवेदी की दिक्कतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। रविवार को पुलिस ने इन दोनों के कई और कारनामों का खुलासा किया।

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कई जिलों तक फैला था इनका गोरखधंधा
पुलिस के मुताबिक सचिवालय के ये जालसाज अफसर हर फन में माहिर थे। शस्त्र का लाइसेंस लेना हो, हैंडपंप लगवाना हो या फिर स्थानांतरण या नौकरी संबंधी काम हो, सुविधा शुल्क लेकर ये दोनों तत्काल काम कराते थे। सूबे के कई जिलों में इनका साम्राज्य था। ये शासन के पैड पर निजी सचिव की हैसियत से सिफारिशी पत्र लिखते थे।
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जरूरत पड़ने पर फोन करके भी काम कराते थे।

नौकरी तक दिलाने का देते थे झांसा
यह सिफारिश मोटी रकम वसूलने के लिए की जाती थी। वादी की मानें तो उसने दस हजार रुपये देकर शस्त्र लाइसेंस व पांच हजार रुपये देकर हैंडपंप लगवाने की सिफारिश कराई थी। उसने पुलिस को निजी सचिव द्वारा सिफारिश में लिखे गए कई पत्र सौंपे हैं। पुलिस उसकी जांच कर रही है।
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शिक्षा विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर विधानसभा अध्यक्ष के ओएसडी आरसी मिश्र और निजी सचिव जय किशोर द्विवेदी सचिवालय से अपना गोरखधंधा चला रहे थे।

27 जून को पुलिस ने इसका खुलासा कर दोनों अफसरों का नाम उजागर किया। सीओ हजरतगंज दिनेश यादव ने बताया कि मुकदमा दर्ज कराने वाले इटावा के उमेश कुमार सिंह ने पुलिस को सिफारिशी पत्रों के दस्तावेज सौंपे हैं। इन्हीं पत्रों से पता चला कि ये जालसाज अफसर अपने ओहदे का रौब दिखाकर जनपदों के जिलाधिकारी, सीडीओ और अन्य अफसरों से काम कराते थे।

खूब ऐंठते थे पैसा
इसके एवज में वे मोटी रकम वसूलते थे। वादी ने स्वीकार किया कि दस हजार रुपये देकर आरसी मिश्र से शस्त्र लाइसेंस की सिफारिश कराई और फोन कराया जिस पर लाइसेंस एक सप्ताह में मिल गया।


छह जून 2011 को निजी सचिव ने जिलाधिकारी इटावा को बछेड़ी के चकरनगर निवासी गौरव तिवारी पुत्र बनवारी लाल तिवारी के लिए पत्र लिखा था।

इटावा के ही एक गांव में किसान के घर हैंडपंप लगवाने के लिए पांच हजार रुपये देने की बात उन्होंने कुबूली। प्रदेश व जिले स्तर पर स्थानांतरण व नौकरी दिलाने के नाम पर भी आरोपी अफसरों ने जमकर लूट-खसोट की। पुलिस इन सिफारिशी पत्रों को कब्जे में लेकर जांच पड़ताल कर रही है।

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