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श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के महानायक थे परमहंस
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दिगंबर अखाड़े में कार्यक्रम का शुभारंभ करते मुख्यमंत्री योगी व संत।
- फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि परमहंस जी महाराज का पूरा जीवन देश, धर्म व समाज के लिए समर्पित रहा। वे श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के महानायक थे।
अयोध्या को कार्यक्षेत्र व साधनास्थली बनाकर उन्होंने धार्मिक, आध्यात्मिक, रचनात्मक कार्यों को नई गति दी। इसमें श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति आंदोलन का महत्वपूर्ण पड़ाव था।
विहिप के नेतृत्व में श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति आंदोलन का अभियान आगे बढ़ा, उसने देश के अंदर आमजन के मन में भारत की संस्कृति, परंपरा, आध्यात्मिक चेतना के प्रति एक नया गौरव का भाव पैदा करने में सफलता प्राप्त की।
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महंत रामचंद्रदास परमहंस को श्रद्घांजलि देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह ऐसा सांस्कृतिक आंदोलन था जिसने आजादी के बाद सुप्त भारतीय चेतना को जगाने का काम किया।
इस आंदोलन अग्रिम सेनापति थे महंत रामचंद्र दास परमहंस। 1949 में रामलला के प्रगटीकरण के साथ जो यात्रा प्रारंभ हुई, जो कार्ययोजना बनी, वह उनके अंतिम सांस तक जारी रही।
बस एक ध्येय था रामजन्मभूमि मुक्त होनी चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 1990 में कारसेवकों पर तत्कालीन सरकार ने कायराना हमला किया था, जिसमें एक दर्जन कारसेवक हताहत हुए थे।
महंत परमहंस दास ने उन कारसेवकों की स्मृति में दिगंबर अखाडे़ में स्मारक बनवाया। दिगंबर अखाड़े में प्रवेश होते ही उन कारसेवकों की स्मृति जीवंत हो उठती है।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि गोरक्षपीठ रामजन्मभूमि आंदोलन से 1934 से जुड़ी है। अशोक सिंहल जी आंदोलन के केंद्र बिंदु थे। उन्होंने पूज्य संतों को एक मंच पर लाकर इस अभियान से जोड़ा।
मेरे पूज्य दादा गुरु महंत दिग्विजय नाथ 1934 में इस अभियान के साथ जुड़े। 1949 में जब रामलला का प्रगटीकरण होता है उस समय उनकी भूमिका और उसके बाद रामजन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के अध्यक्ष के रूप में मेरे पूज्य गुरुदेव महंत अवैद्यनाथ जी महाराज की भूमिका सर्वविदित है।
राममंदिर को लेकर उतावलेपन पर मुख्यमंत्री ने समझाते हुए कहा कि हमें वर्तमान में इस बात को याद रखना होगा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की मर्यादा का पालन करना है।
विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य न खोना, धैर्य बनाए रखते हुए अपने अभीष्ट को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करना होगा। कहीं से चुनौती आती है तो उस चुनौती का डटकर मुकाबला करना ही राम की धीरता है, यही राम की मर्यादा है। राम की उस मर्यादा का पालन आज के समय में अत्यंत आवश्यक है।
ज.गु.वासुुुदेवाचार्य विद्या भास्कर जी महाराज ने कहा कि योगी सरकार में सरयू की धारा छूट जाने के कारण जो घाट विलुप्त हो गए थे उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए प्रयास हो रहा है वह सराहनीय है।
मणिरामदास की छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास ने कहा कि परमहंस रामजन्मभूमि ही नहीं राष्ट्र व हिंदुत्व के लिए जीवन पर्यंत संघर्ष व गर्जना करते रहे।
पूर्व गृहराज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि जब भी रामजन्मभूमि की बात होगी तो परमहंस का नाम जरूर आएगा। जो रामलला चाहेंगे वही निर्णय कोर्ट भी करेगी।
दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास ने कहा कि मोदी व योगी के काल में ही राममंदिर का निर्माण होगा। इस अवसर पर कुम्हारों ने मिट्टी से निर्मित बर्तन भेंट किया जिसे मुख्यमंत्री ने सराहा।
दिगंबर अखाड़ा के सचिव आशुतोष सिंह, कौस्तुभमणि आचारी व अन्य द्वारा मुख्यमंत्री को दीपोत्सव का चित्र भेंट किया गया। संचालन महंत डॉ.रामानंद दास ने किया।
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अयोध्या को कार्यक्षेत्र व साधनास्थली बनाकर उन्होंने धार्मिक, आध्यात्मिक, रचनात्मक कार्यों को नई गति दी। इसमें श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति आंदोलन का महत्वपूर्ण पड़ाव था।
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विहिप के नेतृत्व में श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति आंदोलन का अभियान आगे बढ़ा, उसने देश के अंदर आमजन के मन में भारत की संस्कृति, परंपरा, आध्यात्मिक चेतना के प्रति एक नया गौरव का भाव पैदा करने में सफलता प्राप्त की।
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महंत रामचंद्रदास परमहंस को श्रद्घांजलि देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह ऐसा सांस्कृतिक आंदोलन था जिसने आजादी के बाद सुप्त भारतीय चेतना को जगाने का काम किया।
इस आंदोलन अग्रिम सेनापति थे महंत रामचंद्र दास परमहंस। 1949 में रामलला के प्रगटीकरण के साथ जो यात्रा प्रारंभ हुई, जो कार्ययोजना बनी, वह उनके अंतिम सांस तक जारी रही।
बस एक ध्येय था रामजन्मभूमि मुक्त होनी चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 1990 में कारसेवकों पर तत्कालीन सरकार ने कायराना हमला किया था, जिसमें एक दर्जन कारसेवक हताहत हुए थे।
महंत परमहंस दास ने उन कारसेवकों की स्मृति में दिगंबर अखाडे़ में स्मारक बनवाया। दिगंबर अखाड़े में प्रवेश होते ही उन कारसेवकों की स्मृति जीवंत हो उठती है।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि गोरक्षपीठ रामजन्मभूमि आंदोलन से 1934 से जुड़ी है। अशोक सिंहल जी आंदोलन के केंद्र बिंदु थे। उन्होंने पूज्य संतों को एक मंच पर लाकर इस अभियान से जोड़ा।
मेरे पूज्य दादा गुरु महंत दिग्विजय नाथ 1934 में इस अभियान के साथ जुड़े। 1949 में जब रामलला का प्रगटीकरण होता है उस समय उनकी भूमिका और उसके बाद रामजन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के अध्यक्ष के रूप में मेरे पूज्य गुरुदेव महंत अवैद्यनाथ जी महाराज की भूमिका सर्वविदित है।
राममंदिर को लेकर उतावलेपन पर मुख्यमंत्री ने समझाते हुए कहा कि हमें वर्तमान में इस बात को याद रखना होगा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की मर्यादा का पालन करना है।
विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य न खोना, धैर्य बनाए रखते हुए अपने अभीष्ट को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करना होगा। कहीं से चुनौती आती है तो उस चुनौती का डटकर मुकाबला करना ही राम की धीरता है, यही राम की मर्यादा है। राम की उस मर्यादा का पालन आज के समय में अत्यंत आवश्यक है।
ज.गु.वासुुुदेवाचार्य विद्या भास्कर जी महाराज ने कहा कि योगी सरकार में सरयू की धारा छूट जाने के कारण जो घाट विलुप्त हो गए थे उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए प्रयास हो रहा है वह सराहनीय है।
मणिरामदास की छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास ने कहा कि परमहंस रामजन्मभूमि ही नहीं राष्ट्र व हिंदुत्व के लिए जीवन पर्यंत संघर्ष व गर्जना करते रहे।
पूर्व गृहराज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि जब भी रामजन्मभूमि की बात होगी तो परमहंस का नाम जरूर आएगा। जो रामलला चाहेंगे वही निर्णय कोर्ट भी करेगी।
दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास ने कहा कि मोदी व योगी के काल में ही राममंदिर का निर्माण होगा। इस अवसर पर कुम्हारों ने मिट्टी से निर्मित बर्तन भेंट किया जिसे मुख्यमंत्री ने सराहा।
दिगंबर अखाड़ा के सचिव आशुतोष सिंह, कौस्तुभमणि आचारी व अन्य द्वारा मुख्यमंत्री को दीपोत्सव का चित्र भेंट किया गया। संचालन महंत डॉ.रामानंद दास ने किया।