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छठ पर सरयू किनारे उमड़ी आस्था
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छठ पर्व पर सूर्य को अर्घ्य देतीं महिलाएं।
- फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। कांचिहि बांस की बहंगिया, बहंगी लचकत जाए...। हंसि-हंसि बोलेले महादेव सुना ए छठि मइया... जैसे लोकगीतों के बीच शनिवार को रामनगरी सहित ग्रामीण क्षेत्रों में छठ पूजा की धूम रही।
अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी पर शनिवार को जुड़वा नगरों समेत जिलेभर में परिवार समेत व्रती महिलाओं का सरयू नदी समेत जलाशयों के घाटों पर सैलाब उमड़ा।
आस्था के महापर्व छठ उत्सव पर सूर्यास्त के पहले सरयू तट की ओर जाने वाले मार्गों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। कई व्रती दंडवत लेटकर घाटों तक पहुंचीं।
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नगर में गुप्तारघाट से लेकर अयोध्या में संत तुलसी दास, नयाघाट घाट, पक्का घाट, आरती घाट समेत कुंडों पर मेले का माहौल रहा। महिलाओं ने विधिपूर्वक भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना के बाद अर्घ्य दिया।
इसके बाद घाटों पर सजाई गई वेदी पर 31 प्रकार के फल व पकवान चढ़ाकर छठ माता से बच्चों व परिवार के लिए प्रार्थना की गई। फिर महाआरती हुई। रविवार को सुबह सप्तमी तिथि पर सूर्योदय के समय सूर्य को अर्घ्य देकर महाआरती की जाएगी। इसके बाद व्रती महिलाएं निराजल-निराहार व्रत का पारण करेंगे।
उसके बाद महोत्सव का समापन होगा। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों गोसाईगंज, रूदौली, सोहावल, रौनाही आदि में घाटों, जलाशयों पर पूजा-अर्चना के लिए व्रती महिलाओं एवं भक्तों की भीड़ देर रात तक जुटी रही।
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अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी पर शनिवार को जुड़वा नगरों समेत जिलेभर में परिवार समेत व्रती महिलाओं का सरयू नदी समेत जलाशयों के घाटों पर सैलाब उमड़ा।
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आस्था के महापर्व छठ उत्सव पर सूर्यास्त के पहले सरयू तट की ओर जाने वाले मार्गों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। कई व्रती दंडवत लेटकर घाटों तक पहुंचीं।
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नगर में गुप्तारघाट से लेकर अयोध्या में संत तुलसी दास, नयाघाट घाट, पक्का घाट, आरती घाट समेत कुंडों पर मेले का माहौल रहा। महिलाओं ने विधिपूर्वक भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना के बाद अर्घ्य दिया।
इसके बाद घाटों पर सजाई गई वेदी पर 31 प्रकार के फल व पकवान चढ़ाकर छठ माता से बच्चों व परिवार के लिए प्रार्थना की गई। फिर महाआरती हुई। रविवार को सुबह सप्तमी तिथि पर सूर्योदय के समय सूर्य को अर्घ्य देकर महाआरती की जाएगी। इसके बाद व्रती महिलाएं निराजल-निराहार व्रत का पारण करेंगे।
उसके बाद महोत्सव का समापन होगा। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों गोसाईगंज, रूदौली, सोहावल, रौनाही आदि में घाटों, जलाशयों पर पूजा-अर्चना के लिए व्रती महिलाओं एवं भक्तों की भीड़ देर रात तक जुटी रही।