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रिक्शा चलाकर दिलाई सजा

Thu, 28 Apr 2016 11:24 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद Updated Thu, 28 Apr 2016 11:24 PM IST
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whipping administered by running rickshaw
चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय - फोटो : file photo
हिम्मत हो तो मघई जैसी। उसे 28 साल तक लाठी से की गई पिटाई याद रही। पेशी दर पेशी उसने अदालत में चल रहे मुकदमे में हार नहीं मानी। रिक्शा चलाकर उसने बीबी बच्चों को तो संभाला ही प्राइवेट वकील करके उसकी फीस भी अदा की।
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खैर उसकी हिम्मत और मेहनत रंग लाई और कोर्ट ने गंभीर चोट पहुंचाने के चार आरोपियों को ढाई-ढाई साल के कारावास से दंडित किया। कोर्ट ने प्रत्येक पर पांच हजार रुपये जुर्माना भी किया। फैसला अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रवीश कुमार अत्री की कोर्ट से बृहस्पतिवार को हुआ। मामला इनायतनगर थाने के गांव पलिया लोहानी का है। 
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वादी के अधिवक्ता पूर्व एडीजीसी वीपी सागर ने बताया कि घटना 1 जनवरी 1988 की है। इसी गांव के रहनेवाले राजेश कुमार, राम लौट, राम सिंगारी व राकेश कुमार गांव के ही मघई के दरवाजे पर नींव खोद रहे थे। मघई ने यह कहते हुए मना किया कि रास्ता बंद हो जाएगा तो चारों ने राम सिंगारी के ललकारने पर लाठी डंडे से उसे मारा पीटा। गोहार पर बचाने पहुंचे सहदेव और सघई की मारपीट में हड्डी टूट गई।
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इसकी रिपोर्ट मघई ने चारों के खिलाफ लिखाई थी। वैसे तो स्टेट केस की पैरवी के लिए सरकारी वकील मुहैया कराए जाते हैं, लेकिन मघई ने प्राइवेट वकील किया और रिक्शा चला कर उसकी फीस दी। लगातार 28 वर्ष तक पेशी दर पेशी अदालत पहुंचता रहा। गुरुवार को उसकी मेहनत रंग लाई। कोर्ट ने सुनवाई के बाद चारों को सजा दी। 

हत्या के आरोपी का कोर्ट में सरेंडर 
फैजाबाद। कुमारगंज थाना क्षेत्र के शाहिद हत्याकांड में गुरुवार को एक आरोपी ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया। सीजेएम रवीन्द्र प्रसाद गुप्त ने उसे न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया। फौजदारी के अधिवक्ता सईद खान ने बताया कि घटना बीते 13 अप्रैल की है। कुमारगंज थाने के रानीपुर गांव के शाहिद अपने ट्यूबवेल पर गया था।


तभी उस पर तमंचे और बांके से हमला बोल दिया गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। इसकी रिपोर्ट लतीफ, अलीम, इंतजार, आमिर, मुईद, आमिन, सईद अहमद, जहूर अहमद के खिलाफ लिखाई गई थी। गुरुवार को आरोपी लतीफ ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया। 
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