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वाहन नहीं फिर भी किया सवा लाख का भुगतान
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 04 Feb 2016 12:06 AM IST
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सीएचसी मिल्कीपुर में वाहन मद में एक लाख 26 हजार रुपये का भुगतान हो गया, लेकिन जिसके नाम भुगतान हुआ है, उसके नाम से वाहन तक नहीं है। मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा तो अब मामले की जांच महानिदेशक परिवार कल्याण को सौंप दी गई है।
फर्जी तरीके से धन भुगतान का खुलासा मुन्नू यादव की ओर से स्वास्थ्य महकमे में लगाई गई आरटीआई से हुआ है। इसके बाद उन्होंने इसकी शिकायत सीएम से की है। चिकित्सा विभाग के उप सचिव आरएन सिंह ने सूचना दी है कि डीजी हेल्थ की जांच पूरी होते ही दोषी अधिकारी और लिपिक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बताते हैं कि सीएचसी मिल्कीपुर में वाहन मद में एक लाख 26 हजार रुपए का फर्जी भुगतान कर दिया गया। तत्कालीन अधीक्षक मिल्कीपुर डॉ. अरुण कुमार गुप्त ने जिस व्यक्ति के नाम धन का भुगतान किया उस व्यक्ति के नाम वाहन है ही नहीं।
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मामला वित्तीय वर्ष 2010 का है। मिल्कीपुर अधीक्षक की शिकायत सीएम कार्यालय में की गई थी। मुन्नू यादव की शिकायत पर मुख्यमंत्री कार्यालय से जांच स्वास्थ्य महानिदेशक परिवार कल्याण को सौंप दी गई है।
चिकित्सा अनुभाग के उपसचिव एवं जनसूचना अधिकारी रवीन्द्रनाथ सिंह ने मांगी गई सूचना के तहत जानकारी दी है कि महानिदेशक परिवार कल्याण स्तर से जांच की जा रही है। जांच पूरी होने पर दोषी चिकित्सक और लिपिक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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फर्जी तरीके से धन भुगतान का खुलासा मुन्नू यादव की ओर से स्वास्थ्य महकमे में लगाई गई आरटीआई से हुआ है। इसके बाद उन्होंने इसकी शिकायत सीएम से की है। चिकित्सा विभाग के उप सचिव आरएन सिंह ने सूचना दी है कि डीजी हेल्थ की जांच पूरी होते ही दोषी अधिकारी और लिपिक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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बताते हैं कि सीएचसी मिल्कीपुर में वाहन मद में एक लाख 26 हजार रुपए का फर्जी भुगतान कर दिया गया। तत्कालीन अधीक्षक मिल्कीपुर डॉ. अरुण कुमार गुप्त ने जिस व्यक्ति के नाम धन का भुगतान किया उस व्यक्ति के नाम वाहन है ही नहीं।
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मामला वित्तीय वर्ष 2010 का है। मिल्कीपुर अधीक्षक की शिकायत सीएम कार्यालय में की गई थी। मुन्नू यादव की शिकायत पर मुख्यमंत्री कार्यालय से जांच स्वास्थ्य महानिदेशक परिवार कल्याण को सौंप दी गई है।
चिकित्सा अनुभाग के उपसचिव एवं जनसूचना अधिकारी रवीन्द्रनाथ सिंह ने मांगी गई सूचना के तहत जानकारी दी है कि महानिदेशक परिवार कल्याण स्तर से जांच की जा रही है। जांच पूरी होने पर दोषी चिकित्सक और लिपिक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।