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कॉपी-किताबों के दामों में 25 फीसदी तक इजाफा
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अयोध्या। पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस सिलेंडरों की बढ़ती कीमतों से जहां एक ओर आम आदमी परेशान है। वहीं, अब अपने नौनिहालों की कॉपी-किताब खरीदने में कमर टूट रही है। यहां भी महंगाई की मार पड़ी है।
इस बार कॉपी-किताबों के दाम भी करीब 15 से 25 फीसदी बढ़ गए हैं। स्टेशनरी के दुकानदारों का कहना है कि कागज के दामों में वृद्धि के चलते यह बढ़ोतरी हुई है।
दो वर्ष से कोरोना के चलते बिना पढ़ाई के स्कूल फीस भर रहे अभिभावकों को इस साल कॉपी-किताबों की बढ़ी हुई कीमतों ने परेशान कर दिया है।
हालांकि दो साल से कोरोना संक्रमण के चलते बच्चों की ऑनलाइन क्लास चलने से अभिभावकों को किताब-कॉपियों पर कम खर्च करना पड़ा था। अब कोरोना का कहर कम होने पर एक बार फिर सभी स्कूल खुल गए हैं और बच्चों की ऑफलाइन पढ़ाई शुरू हो गई है।
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एक अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र भी शुरू हो गया है। बच्चों के दाखिले की प्रक्रिया जारी है। स्टेशनरी के दुकानों पर पहुंच रहे अभिभावकों का कॉपी-किताब के दाम सुनकर पसीना छूट रहा है।
पिछले साल की अपेक्षा इस बार कॉपियों के दाम 15 से 25 प्रतिशत बढ़े हैं, जबकि किताबों के दामों में भी 10 से 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। कॉपियों की कीमतों में दो तरीके से इजाफा किया गया है।
एक तरफ ब्रांडेड कंपनियों ने कॉपियों के दाम बढ़ाने की जगह कॉपियों के पेज कम कर दिए, जबकि कुछ कंपनियों ने साइज ही छोटा कर दिया है। इसके अलावा लोकल ब्रांड की कॉपियों ने दाम बढ़ाने के साथ कुछ पेजों की संख्या भी घटाई है।
164 पेज की कॉपी पहले 30 रुपये में आती थी, जो अब 35 से 40 रुपये की हो गई। 28 पेज की कॉपी 5 रुपये में आती थी, जो अब 20 पेज की होने के साथ 8 से 10 रुपये में मिल रही है।
रफ रजिस्टर पहले 20 से 30 रुपये में आता था। इसके दाम अब करीब 40 रुपये हो गए हैं। 120 पेज की कॉपी 25 रुपये की थी, वह अब 35 रुपये में मिल रही है। इसके अलावा रबर, पेंसिल या शॉर्पनर के सेट भी अब 60-65 रुपये हो गए हैं।
फैजाबाद शहर में स्टेशनरी की दुकान करने वाले दुकानदार सुशील अग्रवाल ने बताया कि कागज के दाम बढ़ने से कापियों के दामों में इजाफा हुआ है।
अयोध्या परिक्रमा मार्ग निवासी बैंककर्मी सत्यप्रकाश पांडेय की एक बेटी कक्षा दो में व एक कक्षा पांच में हैं। वह दोनों शहर के एक प्रतिष्ठित अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में अध्ययन करतीं हैं।
जब वह उनकी कॉपी-किताब लेने चिह्नित दुकान पर गए तो वहां हर कक्षा की कॉपी-किताबों का सेट पहले से पैक रखा था। कक्षा दो का पैक 4100 रुपये में व कक्षा पांच का पैक 4950 रुपये में मिला।
पूछने पर दुकानदार ने बताया इस बार दाम बढ़ गए हैं। सत्यप्रकाश का कहना है कि पहले डीजल-पेट्रोल व रसोई गैस ने रुलाया, रही सही कसर कॉपी-किताब के दामों ने पूरी कर दी।
एक अन्य अभिभावक रानू पांडेय कहते हैं कि स्कूलों के हिसाब से कॉपी-किताबों के दाम भी अलग-अलग हैं। जिन स्कूलों की फीस अधिक है, उनकी ड्रेस सहित अन्य सामग्री भी महंगी है।
अब दामों में इजाफा होने से दोहरी मार पड़ रही है। कहा कि इन दिनों हर तरफ महंगाई की मार ने आम लोगों का बजट बिगाड़ दिया है। वंदना मौर्या कहतीं हैं कि हर साल किताबों-कॉपियों सहित अन्य सामग्री के दाम बढ़ते हैं, ऐसे में आम लोगों को बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढ़ाना मुश्किल हो गया है।
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इस बार कॉपी-किताबों के दाम भी करीब 15 से 25 फीसदी बढ़ गए हैं। स्टेशनरी के दुकानदारों का कहना है कि कागज के दामों में वृद्धि के चलते यह बढ़ोतरी हुई है।
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दो वर्ष से कोरोना के चलते बिना पढ़ाई के स्कूल फीस भर रहे अभिभावकों को इस साल कॉपी-किताबों की बढ़ी हुई कीमतों ने परेशान कर दिया है।
हालांकि दो साल से कोरोना संक्रमण के चलते बच्चों की ऑनलाइन क्लास चलने से अभिभावकों को किताब-कॉपियों पर कम खर्च करना पड़ा था। अब कोरोना का कहर कम होने पर एक बार फिर सभी स्कूल खुल गए हैं और बच्चों की ऑफलाइन पढ़ाई शुरू हो गई है।
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एक अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र भी शुरू हो गया है। बच्चों के दाखिले की प्रक्रिया जारी है। स्टेशनरी के दुकानों पर पहुंच रहे अभिभावकों का कॉपी-किताब के दाम सुनकर पसीना छूट रहा है।
पिछले साल की अपेक्षा इस बार कॉपियों के दाम 15 से 25 प्रतिशत बढ़े हैं, जबकि किताबों के दामों में भी 10 से 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। कॉपियों की कीमतों में दो तरीके से इजाफा किया गया है।
एक तरफ ब्रांडेड कंपनियों ने कॉपियों के दाम बढ़ाने की जगह कॉपियों के पेज कम कर दिए, जबकि कुछ कंपनियों ने साइज ही छोटा कर दिया है। इसके अलावा लोकल ब्रांड की कॉपियों ने दाम बढ़ाने के साथ कुछ पेजों की संख्या भी घटाई है।
164 पेज की कॉपी पहले 30 रुपये में आती थी, जो अब 35 से 40 रुपये की हो गई। 28 पेज की कॉपी 5 रुपये में आती थी, जो अब 20 पेज की होने के साथ 8 से 10 रुपये में मिल रही है।
रफ रजिस्टर पहले 20 से 30 रुपये में आता था। इसके दाम अब करीब 40 रुपये हो गए हैं। 120 पेज की कॉपी 25 रुपये की थी, वह अब 35 रुपये में मिल रही है। इसके अलावा रबर, पेंसिल या शॉर्पनर के सेट भी अब 60-65 रुपये हो गए हैं।
फैजाबाद शहर में स्टेशनरी की दुकान करने वाले दुकानदार सुशील अग्रवाल ने बताया कि कागज के दाम बढ़ने से कापियों के दामों में इजाफा हुआ है।
अयोध्या परिक्रमा मार्ग निवासी बैंककर्मी सत्यप्रकाश पांडेय की एक बेटी कक्षा दो में व एक कक्षा पांच में हैं। वह दोनों शहर के एक प्रतिष्ठित अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में अध्ययन करतीं हैं।
जब वह उनकी कॉपी-किताब लेने चिह्नित दुकान पर गए तो वहां हर कक्षा की कॉपी-किताबों का सेट पहले से पैक रखा था। कक्षा दो का पैक 4100 रुपये में व कक्षा पांच का पैक 4950 रुपये में मिला।
पूछने पर दुकानदार ने बताया इस बार दाम बढ़ गए हैं। सत्यप्रकाश का कहना है कि पहले डीजल-पेट्रोल व रसोई गैस ने रुलाया, रही सही कसर कॉपी-किताब के दामों ने पूरी कर दी।
एक अन्य अभिभावक रानू पांडेय कहते हैं कि स्कूलों के हिसाब से कॉपी-किताबों के दाम भी अलग-अलग हैं। जिन स्कूलों की फीस अधिक है, उनकी ड्रेस सहित अन्य सामग्री भी महंगी है।
अब दामों में इजाफा होने से दोहरी मार पड़ रही है। कहा कि इन दिनों हर तरफ महंगाई की मार ने आम लोगों का बजट बिगाड़ दिया है। वंदना मौर्या कहतीं हैं कि हर साल किताबों-कॉपियों सहित अन्य सामग्री के दाम बढ़ते हैं, ऐसे में आम लोगों को बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढ़ाना मुश्किल हो गया है।