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महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड ठप, प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
Updated Tue, 23 May 2017 10:49 PM IST
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जिला महिला अस्पताल में भोर से अल्ट्रासाउंड के लिए आईं दूर-दूर से महिलाओं का धैर्य अस्पताल खुलने के दो घंटे बाद जवाब दे गया। अल्ट्रासाउंड कक्ष का ताला तो खुला, मगर रेडियोलॉजिस्ट नदारद रहे। बौखलाई तमाम महिला मरीजों और तीमारदारों ने हंगामा करने के साथ अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
ज्यादातर महिलाएं प्रसूता थीं, जिनकी तकलीफ देख हर कोई उनके साथ खड़ा होने लगा। हालात विस्फोटक होते देख सीएमएस ने मसौधा सीएचसी अधीक्षक को बुलाकर किसी तरह दोपहर में अल्ट्रासाउंड शुरू कराया। हालांकि कई मरीजों को बैरंग लौटना पड़ा।
जिला महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मुफ्त है, जबकि निजी जांच केंद्रों पर पांच सौ से एक हजार रुपये लगते हैं। लिहाजा मंगलवार को सुबह छह बजे से ही अल्ट्रासाउंड कराने वालों की भीड़ लगनी शुरू हो गईं, इसमें अधिकांश प्रसूताएं थीं।
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तीन माह से लेकर आखिरी माह तक में बच्चे की स्थिति जानने के लिए डॉक्टर ने रिकमेंड किया था। मगर सुबह 10 बजे सैकड़ों की तादाद में पर्चा लेकर कतार में खड़ी महिलाएं भीषण गर्मी में गश खाकर गिरने लगीं।
किरन निवासी कोडरा सुबह सात बजे से आई थीं, मंजू निवासी छावनी 7 बजे आईं थी, रेनू निवासी साहबगंज सुबह 9 बजे आई थीं। इसी तरह भरतकुंड से आजमी, बरौली से पूर्णिमा वर्मा, बभनागवां से वासिया बानो, बीकापुर से छाया चतुर्वेदी का कहना था कि वह सुबह सात बजे अल्ट्रासाउंड कराने के लिए आई हैं, लेकिन जांच नहीं हो रही है।
टकशाल की रहने वाली शमा बानो के पेट में साढ़े आठ माह का बच्चा है। वह जांच कराने के लिए तपती धूम में अस्पताल में लाइन लगाए रहीं, लेकिन जब साढ़े दस बजे तक चिकित्सक नहीं आए तो उनका भी धैर्य जवाब दे दिया।
इसी प्रकार साहबगंज की रुमाना और गोसाईगंज की हीना खान भी अपना अल्ट्रासाउंड कराने के लिए सुबह से चिकित्सक के आने का इंतजार कर रही थी। डॉक्टर के नहीं आने पर इन सभी मरीजों ने तीमारदारों संग अस्पताल में हंगामा करना शुरू कर दिया।
यह हंगामा इतना बढ़ा कि अल्ट्रासाउंड करने वाले कर्मी महिलाओं के कोपभाजन का शिकार होते-होते बचे। कर्मियों का कहना था कि बगैर डॉक्टर वे कुछ नहीं कर सकते। डॉक्टर 45 दिन की ट्रेनिंग में गए हैं। इसके बाद अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गई।
हालात बिगड़ते होते देख सीएमएस डॉ. एसपी बंसल साढ़े ग्यारह बजे मौके पर आए। उनके साथ मसौधी सीएचसी के अधीक्षक डॉ. राजेश दुबे भी थे। किसी तरह लोगों को समझाकर डॉ. दूबे से अल्ट्रासाउंड जांच शुरू कराई गई।
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ज्यादातर महिलाएं प्रसूता थीं, जिनकी तकलीफ देख हर कोई उनके साथ खड़ा होने लगा। हालात विस्फोटक होते देख सीएमएस ने मसौधा सीएचसी अधीक्षक को बुलाकर किसी तरह दोपहर में अल्ट्रासाउंड शुरू कराया। हालांकि कई मरीजों को बैरंग लौटना पड़ा।
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जिला महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मुफ्त है, जबकि निजी जांच केंद्रों पर पांच सौ से एक हजार रुपये लगते हैं। लिहाजा मंगलवार को सुबह छह बजे से ही अल्ट्रासाउंड कराने वालों की भीड़ लगनी शुरू हो गईं, इसमें अधिकांश प्रसूताएं थीं।
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तीन माह से लेकर आखिरी माह तक में बच्चे की स्थिति जानने के लिए डॉक्टर ने रिकमेंड किया था। मगर सुबह 10 बजे सैकड़ों की तादाद में पर्चा लेकर कतार में खड़ी महिलाएं भीषण गर्मी में गश खाकर गिरने लगीं।
किरन निवासी कोडरा सुबह सात बजे से आई थीं, मंजू निवासी छावनी 7 बजे आईं थी, रेनू निवासी साहबगंज सुबह 9 बजे आई थीं। इसी तरह भरतकुंड से आजमी, बरौली से पूर्णिमा वर्मा, बभनागवां से वासिया बानो, बीकापुर से छाया चतुर्वेदी का कहना था कि वह सुबह सात बजे अल्ट्रासाउंड कराने के लिए आई हैं, लेकिन जांच नहीं हो रही है।
टकशाल की रहने वाली शमा बानो के पेट में साढ़े आठ माह का बच्चा है। वह जांच कराने के लिए तपती धूम में अस्पताल में लाइन लगाए रहीं, लेकिन जब साढ़े दस बजे तक चिकित्सक नहीं आए तो उनका भी धैर्य जवाब दे दिया।
इसी प्रकार साहबगंज की रुमाना और गोसाईगंज की हीना खान भी अपना अल्ट्रासाउंड कराने के लिए सुबह से चिकित्सक के आने का इंतजार कर रही थी। डॉक्टर के नहीं आने पर इन सभी मरीजों ने तीमारदारों संग अस्पताल में हंगामा करना शुरू कर दिया।
यह हंगामा इतना बढ़ा कि अल्ट्रासाउंड करने वाले कर्मी महिलाओं के कोपभाजन का शिकार होते-होते बचे। कर्मियों का कहना था कि बगैर डॉक्टर वे कुछ नहीं कर सकते। डॉक्टर 45 दिन की ट्रेनिंग में गए हैं। इसके बाद अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गई।
हालात बिगड़ते होते देख सीएमएस डॉ. एसपी बंसल साढ़े ग्यारह बजे मौके पर आए। उनके साथ मसौधी सीएचसी के अधीक्षक डॉ. राजेश दुबे भी थे। किसी तरह लोगों को समझाकर डॉ. दूबे से अल्ट्रासाउंड जांच शुरू कराई गई।