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दूसरे दिन ही पस्त हुआ ‘हौसला’
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
Updated Sat, 16 Jul 2016 10:41 PM IST
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आंगनबाड़ी केंद्र लखौरी में पसरा सन्नाटा।
- फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी हौसला पोषण योजना को शुरुआत के दूसरे ही दिन झटका लगा है। पड़ताल में कई आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताले लटकते मिले तो प्रधानों से इसके खर्च से हाथ खींचने की बात सामने आई। जहां भोजन बने भी वह मेन्यू के अनुसार नहीं बताए गए।
अव्यवस्था के बीच संचालित हो रही योजना को लेकर महिलाओं व बच्चों में भी उत्साह नहीं रहा। ज्यादातर महिलाओं और अतिकुपोषित बच्चों ने केंद्र से किनारा किया। सोहावल प्रतिनिधि के मुताबिक, सुबह 11 से दो बजे के बीच केंद्रों के भ्रमण के दौरान ब्लॉक क्षेत्र के तहसीनपुर, लखौरी, रौनाही सहित कई केंद्रों पर ताला बंद रहा।
एमडीएम समय में भी कोई मौजूद नहीं मिला जब कि धन्नीपुर केंद्र पर मौजूद कार्यकर्त्री रामवती यादव ने बताया केंद्र खुला है लेकिन प्रधान ने राशन व वितरण सामग्री नहीं उपलब्ध कराया, इसलिए कोई नहीं आया। कुछ ऐसा ही हाल तहसीनपुर केंद्र का भी रहा।
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यहां की कार्यकर्त्री कृष्णा देवी ने भोजन बनवाया लेकिन खाने वाली गर्भवती महिलाएं ही नदारद रही। कार्यकर्त्री घर-घर महिलाओं को बुलाती नजर आईं। लखौरी और रौनाही दोनों केंद्र वीआईपी माने जाते हैं। एक पूर्व प्रमुख के गांव का है तो दूसरा वर्तमान प्रमुख के गांव का है जहां पहले दिन की शुरुआत जोरदार रही।
कार्यवाहक सीडीपीओ इंदुमती ने बताया कि अभी प्रधानों के खाते में योजना का धन नहीं गया है, इसलिए खर्च से हाथ खींच रहे हैं। कुछ केंद्रों पर भोजन बना है। लापरवाही बरतने वालों पर विभाग कार्रवाई करेगा। हैरिंग्टनगंज प्रतिनिधि के मुताबिक, व्यवस्था कागजी बन रही है।
कार्यक्रम में कुपोषित बच्चों व गर्भवती महिलाओं को मेन्यू के अनुसार आहार नहीं मिल पाया। कहीं पर तहरी तो कहीं पर सोयाबीन की सब्जी व चावल बांटे गए। कुछ जगहों पर फल व पौष्टिक आहार देने की मात्र औपचारिकता भर की गई।
नाम न छापने की शर्त पर एक आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री ने बताया कि सरकार ने कार्यक्रम तो शुरू कर दिया लेकिन इस योजना के लिए अभी तक धन नहीं दिया है। ऐसे में प्रधान और वीडीओ व्यवस्था की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री व सहायिकाएं खुद अपनी नौकरी बचाने के लिए टूटी-फूटी व्यवस्था कर रही हैं। ग्राम जोहन में तीन केंद्र हैं लेकिन यहां पर योजना की जानकारी ही नहीं है न ही कोई व्यवस्था थी। स्वर्णवर्षा में सब्जी चावल की व्यवस्था रही।
यहां पर फल में नाशपाती की व्यवस्था थी। गर्भवती महिलाओं की संख्या केंद्रों पर नाममात्र की रही। बीकापुर प्रतिनिधि के मुताबिक, शनिवार को ज्यादातर केंद्र पर लाभार्थियों की संख्या नाममात्र की रही। सहजपुर आंगनबाड़ी केंद्र पर 17 गर्भवती महिलाओं में 10 व तीन अतिकुपोषित बच्चे मौजूद रहे।
तोरोमाफ ी केंद्र पर 10 में छह गर्भवती महिलाएं और तीन बच्चे ही आए। कार्यकर्त्री मुन्नी मौर्या ने बताया कि बुलाने के बाद भी केंद्र पर महिलाएं नहीं आ रही है। पालीपुरवा में 20 में छह महिलाएं तथा पांच में तीन बच्चे ही पहुंचे।
आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री सरिता सिंह इंतजार करती रहीं। पुहपी में 12 में चार महिलाएं व नियायी में 10 में दो महिलाएं आहार लेने पहुंची। मेन्यू में शनिवार को सब्जी चावल एक मौसमी फल व बच्चों को घी, बिस्कुट व हलवा दिया गया।
सीडीपीओ सीमा कनौजिया ने बताया कि 184 केंद्रों के संचालन के लिए सात सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। तारुन प्रतिनिधि के मुताबिक, हौसला पोषण योजना दूसरे दिन ही धड़ाम हो गई। इस योजना के संचालित करने के लिए प्रधान व आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री का संयुक्त खाता भी योजना के शुरू होने के पहले तो खोल दिया गया लेकिन बजट ही नहीं दिया गया।
इसके कारण कई केंद्रों पर अव्यवस्था रही। बता दें कि हौसला पोषण योजना के तहत जिले के 11 ब्लॉकों में 24,970 गर्भवती महिलाएं हैं तो सभी ब्लॉकों में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 9584 है।
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अव्यवस्था के बीच संचालित हो रही योजना को लेकर महिलाओं व बच्चों में भी उत्साह नहीं रहा। ज्यादातर महिलाओं और अतिकुपोषित बच्चों ने केंद्र से किनारा किया। सोहावल प्रतिनिधि के मुताबिक, सुबह 11 से दो बजे के बीच केंद्रों के भ्रमण के दौरान ब्लॉक क्षेत्र के तहसीनपुर, लखौरी, रौनाही सहित कई केंद्रों पर ताला बंद रहा।
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एमडीएम समय में भी कोई मौजूद नहीं मिला जब कि धन्नीपुर केंद्र पर मौजूद कार्यकर्त्री रामवती यादव ने बताया केंद्र खुला है लेकिन प्रधान ने राशन व वितरण सामग्री नहीं उपलब्ध कराया, इसलिए कोई नहीं आया। कुछ ऐसा ही हाल तहसीनपुर केंद्र का भी रहा।
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यहां की कार्यकर्त्री कृष्णा देवी ने भोजन बनवाया लेकिन खाने वाली गर्भवती महिलाएं ही नदारद रही। कार्यकर्त्री घर-घर महिलाओं को बुलाती नजर आईं। लखौरी और रौनाही दोनों केंद्र वीआईपी माने जाते हैं। एक पूर्व प्रमुख के गांव का है तो दूसरा वर्तमान प्रमुख के गांव का है जहां पहले दिन की शुरुआत जोरदार रही।
कार्यवाहक सीडीपीओ इंदुमती ने बताया कि अभी प्रधानों के खाते में योजना का धन नहीं गया है, इसलिए खर्च से हाथ खींच रहे हैं। कुछ केंद्रों पर भोजन बना है। लापरवाही बरतने वालों पर विभाग कार्रवाई करेगा। हैरिंग्टनगंज प्रतिनिधि के मुताबिक, व्यवस्था कागजी बन रही है।
कार्यक्रम में कुपोषित बच्चों व गर्भवती महिलाओं को मेन्यू के अनुसार आहार नहीं मिल पाया। कहीं पर तहरी तो कहीं पर सोयाबीन की सब्जी व चावल बांटे गए। कुछ जगहों पर फल व पौष्टिक आहार देने की मात्र औपचारिकता भर की गई।
नाम न छापने की शर्त पर एक आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री ने बताया कि सरकार ने कार्यक्रम तो शुरू कर दिया लेकिन इस योजना के लिए अभी तक धन नहीं दिया है। ऐसे में प्रधान और वीडीओ व्यवस्था की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री व सहायिकाएं खुद अपनी नौकरी बचाने के लिए टूटी-फूटी व्यवस्था कर रही हैं। ग्राम जोहन में तीन केंद्र हैं लेकिन यहां पर योजना की जानकारी ही नहीं है न ही कोई व्यवस्था थी। स्वर्णवर्षा में सब्जी चावल की व्यवस्था रही।
यहां पर फल में नाशपाती की व्यवस्था थी। गर्भवती महिलाओं की संख्या केंद्रों पर नाममात्र की रही। बीकापुर प्रतिनिधि के मुताबिक, शनिवार को ज्यादातर केंद्र पर लाभार्थियों की संख्या नाममात्र की रही। सहजपुर आंगनबाड़ी केंद्र पर 17 गर्भवती महिलाओं में 10 व तीन अतिकुपोषित बच्चे मौजूद रहे।
तोरोमाफ ी केंद्र पर 10 में छह गर्भवती महिलाएं और तीन बच्चे ही आए। कार्यकर्त्री मुन्नी मौर्या ने बताया कि बुलाने के बाद भी केंद्र पर महिलाएं नहीं आ रही है। पालीपुरवा में 20 में छह महिलाएं तथा पांच में तीन बच्चे ही पहुंचे।
आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री सरिता सिंह इंतजार करती रहीं। पुहपी में 12 में चार महिलाएं व नियायी में 10 में दो महिलाएं आहार लेने पहुंची। मेन्यू में शनिवार को सब्जी चावल एक मौसमी फल व बच्चों को घी, बिस्कुट व हलवा दिया गया।
सीडीपीओ सीमा कनौजिया ने बताया कि 184 केंद्रों के संचालन के लिए सात सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। तारुन प्रतिनिधि के मुताबिक, हौसला पोषण योजना दूसरे दिन ही धड़ाम हो गई। इस योजना के संचालित करने के लिए प्रधान व आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री का संयुक्त खाता भी योजना के शुरू होने के पहले तो खोल दिया गया लेकिन बजट ही नहीं दिया गया।
इसके कारण कई केंद्रों पर अव्यवस्था रही। बता दें कि हौसला पोषण योजना के तहत जिले के 11 ब्लॉकों में 24,970 गर्भवती महिलाएं हैं तो सभी ब्लॉकों में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 9584 है।