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पुस्तक के हवाले से बताया नेताजी सुभाष
फैजाबाद
Updated Thu, 01 Dec 2016 11:06 PM IST
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फैजाबाद में गुरुवार को जष्टिस विष्णु सहाय आयोग के समक्ष अपना बयान दर्ज करवाते मदन मोहन त्रिपाठी ।
- फोटो : अमर उजाला
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अयोध्या और फैजाबाद में कई साल तक गुमनामी की जिंदगी बिताने वाले गुमनामी बाबा उर्फ भगवन जी की असलियत की जांच करने वाले जस्टिस विष्णु सहाय आयोग के समक्ष गुरुवार को दो लोगों ने बयान दर्ज कराए। कलेक्ट्रेट के सामने स्थित आयोग के कार्यालय में यह बयान दर्ज किए गए।
आयोग के सचिव व पूर्व जिला जज दिलीप कुमार ने बताया कि बयान दर्ज कराने वालों में शहर के एक शिक्षक मनमोहन त्रिपाठी और दूसरे अतुल कुमार सिंह थे। श्री त्रिपाठी ने आयोग के समक्ष बताया कि शहर से सटे एक गांव के रहने वाले एक विद्वान राम सेवक मालवीय के जरिए उन्होंने एक संत के बारे में सुना।
श्री मालवीय उन्हें मिलवाना भी चाहते थे लेकिन वह मिले नहीं थे। राम सेवक मालवीय के हवाले से श्री त्रिपाठी ने आयोग को बताया कि वे अपनी पुस्तक भू भामिनी विभ्रमम गुमनामी बाबा को सौंपी तो पढ़ने के बाद बाबा ने दोबारा मुलाकात के समय परदे के पीछे से कहा था कि इस पुस्तक में पं. नेहरू की बहुत प्रशंसा है तो मालवीय ने पुस्तक के उस हिस्से के बारे में भी याद दिलाया जिसमें सुभाष चंद्र बोस के बारे में लिखा गया तो बाबा जोर से हंसने लगे।
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बाबा की मौत के बाद चर्चा में मालवीय ने संत को सुभाषचंद्र बोस बताया था। मालवीय जी की हैंडराइटिंग के दो पेज का ब्यौरा भी उन्होंने जस्टिस विष्णु सहाय को उपलब्ध कराया है। उधर, अतुल सिंह ने बाबा से जुड़ी स्मृतियों के बारे में आयोग को जानकारी दी। नेताजी सुभाष चंद्र बोस विचार मंच के संयोजक शक्ति सिंह ने भी आयोग से मुलाकात की।
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आयोग के सचिव व पूर्व जिला जज दिलीप कुमार ने बताया कि बयान दर्ज कराने वालों में शहर के एक शिक्षक मनमोहन त्रिपाठी और दूसरे अतुल कुमार सिंह थे। श्री त्रिपाठी ने आयोग के समक्ष बताया कि शहर से सटे एक गांव के रहने वाले एक विद्वान राम सेवक मालवीय के जरिए उन्होंने एक संत के बारे में सुना।
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श्री मालवीय उन्हें मिलवाना भी चाहते थे लेकिन वह मिले नहीं थे। राम सेवक मालवीय के हवाले से श्री त्रिपाठी ने आयोग को बताया कि वे अपनी पुस्तक भू भामिनी विभ्रमम गुमनामी बाबा को सौंपी तो पढ़ने के बाद बाबा ने दोबारा मुलाकात के समय परदे के पीछे से कहा था कि इस पुस्तक में पं. नेहरू की बहुत प्रशंसा है तो मालवीय ने पुस्तक के उस हिस्से के बारे में भी याद दिलाया जिसमें सुभाष चंद्र बोस के बारे में लिखा गया तो बाबा जोर से हंसने लगे।
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बाबा की मौत के बाद चर्चा में मालवीय ने संत को सुभाषचंद्र बोस बताया था। मालवीय जी की हैंडराइटिंग के दो पेज का ब्यौरा भी उन्होंने जस्टिस विष्णु सहाय को उपलब्ध कराया है। उधर, अतुल सिंह ने बाबा से जुड़ी स्मृतियों के बारे में आयोग को जानकारी दी। नेताजी सुभाष चंद्र बोस विचार मंच के संयोजक शक्ति सिंह ने भी आयोग से मुलाकात की।