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टीकाकरण ही हेपेटाइटिस से बचाव का बेहतर उपाय
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 27 Jul 2015 11:55 PM IST
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इस बीमारी की वजह से लीवर में सूजन आ जाती है। जलन, उल्टी होने लगती है। लीवर के सही ढंग से कार्य नहीं करने की वजह से मरीज की मौत तक हो सकती है।
लंबे समय से हेपेटाइटिस रहने पर लीवर सिरोसिस और लीवर कैंसर हो जाता है। महज टीकाकरण के जरिए इस बीमारी को नियंत्रित किया जाता है।
हेपेटाइटिस मुख्य रूप से पांच प्रकार का होता है। इनमें से बी और सी सबसे अधिक खतरनाक हैं। हेपेटाइटिस एक, डी और ई दूषित पानी से फैलता है। हेपेटाइटिस बी और सी रक्त के जरिए फैलते हैं।
हेपेटाइटिस की बीमारी वायरस के जरिए फैलती है। हेपेटाइटिस बी और सी दूषित खून चढ़ाए जाने संक्रमित सूई और असुरक्षित शारीरिक संबंध के माध्यमों से फैलता है।
यह बीमारी 90 फीसदी खून चढ़ाए जाने और असुरक्षित यौन संबंधों के माध्यम से होता है। यह वायरस लीवर में पहुंच कर संक्रमित कर देते हैं और लीवर विकृत होने लगता है। रक्त में दूषित तत्व बाहर नहीं निकल पाता।
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नतीजतन मरीज को पीलिया हो जाता है। बाद में यही वायरस रक्त में फैल जाता है। हेपेसाइटिस बी वायरस व्यक्ति का स्वास्थ्य खराब होने लगता है। मिचली आना, उल्टी, शरीर में दर्द, हल्का बुखार, पेशाब में पीलापन और बाद में पीलिया में तबदील हो जाता है।
इलाज के बाद भी मरीज स्वस्थ नहीं होता है। शुरुआती दिनों में यदि इस बीमारी का पता चल जाता है तो लीवर को खराब होने से बचाया जा सकता है और देरी होने पर मात्र लीवर ट्रांसप्लांट की ही विकल्प बचता है।
जिले में अब तक 50 से अधिक मरीजों को चिह्नित किया गया है। लेकिन विभाग इन मरीजों का रिकॉर्ड नहीं रखता है। पैथोलाजिस्ट डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि स्थानीय स्तर हेपेटाइटिस की जांच की जाती है।
हेपेटाइटिस ए की जांच में थोड़ा समय लगता है, लेकिन बी और सी की जांच त्वरित हो जाती है। जिला अस्पताल फैजाबाद के मेडिकल अफसर डॉ. धर्मेंद्र राव ने बताया कि हेपेटाइटिस का इलाज स्थानीय स्तर पर संभव है।
बशर्ते समय पर इलाज शुरू हो जाए। हालांकि टीकाकरण सबसे सुरक्षित उपाय है। पहला टीका लगने के एक माह बाद दूसरा और छठे माह तीसरा टीका लगना चाहिए। पांच माह बाद टीका का बूस्टर डोज लगाया जाता है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राधेश्याम यादव ने बताया कि इस बीमारी के बचाव के लिए टीकाकरण एक मात्र सुरक्षित उपाय है। हेपेटाइटिस-बी का टीका बच्चों को नियमित रूप से लगाया जाता है।
हेपेटाइटिस सी का टीका बाजार में उपलब्ध हैं, लेकिन अभी तक नियमित रूप से स्वास्थ्य विभाग के कार्यक्रमों में शामिल नहीं किया गया है।
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लंबे समय से हेपेटाइटिस रहने पर लीवर सिरोसिस और लीवर कैंसर हो जाता है। महज टीकाकरण के जरिए इस बीमारी को नियंत्रित किया जाता है।
हेपेटाइटिस मुख्य रूप से पांच प्रकार का होता है। इनमें से बी और सी सबसे अधिक खतरनाक हैं। हेपेटाइटिस एक, डी और ई दूषित पानी से फैलता है। हेपेटाइटिस बी और सी रक्त के जरिए फैलते हैं।
हेपेटाइटिस की बीमारी वायरस के जरिए फैलती है। हेपेटाइटिस बी और सी दूषित खून चढ़ाए जाने संक्रमित सूई और असुरक्षित शारीरिक संबंध के माध्यमों से फैलता है।
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यह बीमारी 90 फीसदी खून चढ़ाए जाने और असुरक्षित यौन संबंधों के माध्यम से होता है। यह वायरस लीवर में पहुंच कर संक्रमित कर देते हैं और लीवर विकृत होने लगता है। रक्त में दूषित तत्व बाहर नहीं निकल पाता।
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नतीजतन मरीज को पीलिया हो जाता है। बाद में यही वायरस रक्त में फैल जाता है। हेपेसाइटिस बी वायरस व्यक्ति का स्वास्थ्य खराब होने लगता है। मिचली आना, उल्टी, शरीर में दर्द, हल्का बुखार, पेशाब में पीलापन और बाद में पीलिया में तबदील हो जाता है।
इलाज के बाद भी मरीज स्वस्थ नहीं होता है। शुरुआती दिनों में यदि इस बीमारी का पता चल जाता है तो लीवर को खराब होने से बचाया जा सकता है और देरी होने पर मात्र लीवर ट्रांसप्लांट की ही विकल्प बचता है।
जिले में अब तक 50 से अधिक मरीजों को चिह्नित किया गया है। लेकिन विभाग इन मरीजों का रिकॉर्ड नहीं रखता है। पैथोलाजिस्ट डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि स्थानीय स्तर हेपेटाइटिस की जांच की जाती है।
हेपेटाइटिस ए की जांच में थोड़ा समय लगता है, लेकिन बी और सी की जांच त्वरित हो जाती है। जिला अस्पताल फैजाबाद के मेडिकल अफसर डॉ. धर्मेंद्र राव ने बताया कि हेपेटाइटिस का इलाज स्थानीय स्तर पर संभव है।
बशर्ते समय पर इलाज शुरू हो जाए। हालांकि टीकाकरण सबसे सुरक्षित उपाय है। पहला टीका लगने के एक माह बाद दूसरा और छठे माह तीसरा टीका लगना चाहिए। पांच माह बाद टीका का बूस्टर डोज लगाया जाता है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राधेश्याम यादव ने बताया कि इस बीमारी के बचाव के लिए टीकाकरण एक मात्र सुरक्षित उपाय है। हेपेटाइटिस-बी का टीका बच्चों को नियमित रूप से लगाया जाता है।
हेपेटाइटिस सी का टीका बाजार में उपलब्ध हैं, लेकिन अभी तक नियमित रूप से स्वास्थ्य विभाग के कार्यक्रमों में शामिल नहीं किया गया है।