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रामलला हम आएंगे, मंदिर यहीं बनाएंगे..के नारे की हो रही सिद्धि

Fri, 24 Jul 2020 10:54 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 24 Jul 2020 10:54 PM IST
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Shriram
अयोध्या। राम मंदिर निर्माण के लिए 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भूमि पूजन करेंगे। भूमि पूजन के बाद ही भव्य राम मंदिर निर्माण की परिकल्पना भी साकार होने लगेगी। राम मंदिर निर्माण की शुभबेला में अयोध्यावासी जहां उत्साहित हैं। वहीं राम मंदिर आंदोलन में अपना पूरा जीवन खपाने वाले लोगों की प्रसन्नता भी चरम पर पहुंच चुकी है। राम मंदिर आंदोलन का हिस्सा रहे इन लोगों का कहना है कि ‘राम लला हम आएंगे मंदिर यहीं बनाएंगे’ के नारे की अब सिद्धि होने वाली है...।
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वर्षों का संघर्ष अब फलीभूत और सदियों का सपना साकार होने को है। बजरंग दल के संस्थापक अध्यक्ष पूर्व सांसद विनय कटियार, पूर्व सांसद डॉ रामविलास दास वेदांती, महंत धर्मदास, महंत सिया किशोरी शरण, विहिप के केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज, सहित शरद शर्मा आदि ने जीवन भर राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और इसमें अपनी पूरी जिंदगी गुजार दी। इन सभी का राम मंदिर आंदोलन से गहरा जुड़ाव रहा। 1989 से लेकर आज तक राम मंदिर निर्माण के लिए जितने संघर्ष हुए उन सब में इनकी सक्रिय भागीदारी रही है। इन लोगों का कहना है कि जिन कारसेवकों ने गोली खाकर जान गंवाई है, राम मंदिर का निर्माण उन्हें श्रद्धांजलि जैसा है। राम मंदिर निर्माण की खुशी शब्दों में बयां नहीं की जा सकती।
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राम मंदिर आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाने वाले बजरंग दल के संस्थापक अध्यक्ष और पूर्व सांसद विनय कटियार ने कहा कि 5 अगस्त को पीएम राम मंदिर निर्माण का जब शुभारंभ करेंगे तो मुझे खुशी होगी कि राममंदिर के लिए गोली खाने वाले कारसेवकों का बलिदान रंग लाया। कहा मंदिर निर्माण शुरू हो रहा है तो आंदोलन के सारे दृश्य घूम रहे हैं। पर सबसे ज्यादा खुशी इस बात को लेकर है की लंबी लड़ाई का प्रतिफल करोड़ो हिंदुओं को मिलने जा रहा है। आंदोलन के नायक अशोक सिंघल, रामचंद्र दास परमहंस, महंत अवैद्यनाथ के संघर्ष को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। उनका सदियों का सपना साकार होने जा रहा है।
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राम जन्मभूमि न्यास के सदस्य व पूर्व सांसद डॉ रामविलास दास वेदांती भी राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे। उनका कहना है कि राम मंदिर के लिए लाखों राम भक्तों के आंख में जो जुनून उन्होंने देखा था उसकी पूर्ति अब होने वाली है। राम मंदिर निर्माण होने से ना सिर्फ वर्षों के संघर्ष को फल मिलेगा बल्कि रामनगरी का गौरव भी लौटेगा। हमारे लिए इससे बड़ा सौभाग्य और क्या हो सकता है कि जिस राम मंदिर के लिए हमने वर्षों तक संघर्ष किया अब वह बहुत जल्द ही साकार रूप में हम सबके सामने होगा।
निर्वाणी अनी अखाड़े के श्री महंत महंत धर्मदास भी राम मंदिर आंदोलन में 1961 से ही जुड़े रहे हैं। उनके गुरु बाबा अभिराम दास ने ही 1949 में मूर्ति रखी थी 1961 में बाबा अभिराम दास के निधन के बाद महंत धर्मदास ने उनके आंदोलन की बागडोर संभाल ली। महंत धर्मदास कहते हैं कि राम मंदिर आंदोलन की लड़ाई में शामिल होने के चलते वे दर्जनों मुकदमे झेल रहे हैं। कहते हैं कि अब बहुत ही बड़ी खुशी की बात है कि हमारे ईश्वर का मंदिर बनने जा रहा है। कहा की राम मंदिर निर्माण के लिए जो सपना लाखों राम भक्तों ने देखा था, अब वह पूरा होगा, संकल्प की सिद्धि होने से मन अत्यंत प्रसन्न है।
सद्गुरु सदन के महंत सिया किशोरी शरण राम मंदिर निर्माण शुरू होने की खुशी में भाव विभोर हो जाते हैं। वे कहते हैं कि एक लंबा संघर्ष राम मंदिर निर्माण के लिए हुआ है। बताते हैं कि उनके गुरु रामसूरत शरण विहिप के अयोध्या अध्यक्ष भी रहे। मंदिर आंदोलन में उनकी सक्रियता रही। अपने गुरु के साथ वह भी हर कदम पर मंदिर आंदोलन में भागीदारी निभाते रहे। विहिप के हर छोटे बड़े आंदोलनों में उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। मन सोच कर बहुत ही प्रसन्न हो रहा है कि अब भगवान श्रीराम का मंदिर बनने जा रहा है और हम इस सुअवसर को साक्षात देख सकेंगे।
विहिप के केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज राम मंदिर आंदोलन की एक-एक घटना को याद कर कहते हैं कि राम मंदिर आंदोलन का एक बहुत ही लंबा संघर्ष रहा है जो कभी भुलाया नहीं जा सकता है। अशोक सिंघल के नेतृत्व में राम मंदिर निर्माण के लिए जितने भी संघर्ष हुए उन सब में उनकी सक्रिय भूमिका रही। कई जिम्मेदारियां निभाते रहे हमेशा मन में यह रहता था कि यह जो संघर्ष हो रहा है क्या कभी फलीभूत भी होगा। आखिरकार वह शुभ दिन आ गया है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों अब राम मंदिर निर्माण की नींव पड़ने जा रही है। यह हमारे लिए सौभाग्य का विषय है कि जिसके लिए हमने लड़ाई लड़ी, अब उसके विजय स्वरूप राम मंदिर का निर्माण होगा।

विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा कहते हैं कि 1989 में जब राम मंदिर आंदोलन तेज हुआ, तब से आज तक इसका हिस्सा रहे हैं। शुरुआत में वह बजरंग दल से जुड़े रहे। 1994 में विहिप के साथ जुड़कर कई जिम्मेदारियां निभाई। बताते हैं कि 500 वर्षों से जिस पल की प्रतीक्षा हिंदू समाज करता रहा है। वह अब साकार होने को है। पूरे देश व विश्व के हिंदुओं के लिए यह प्रसन्नता दायक है। सैकड़ों वर्षो का जो लंबा इंतजार था वह लाखों की आहुति के बाद आखिरकार पूरा होने जा रहा है। यह हमारे लिए उत्सव जैसा माहौल है।
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