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51 फीट ऊंचा श्रीगणेश मंदिर बढ़ाएगा रामनगरी की धार्मिक आभा
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अयोध्या में प्रस्तावित गणेश जी का मंदिर
- फोटो : FAIZABAD
अयोध्या। श्रीराममंदिर निर्माण के साथ ही अयोध्या में महाराज दशरथ व गणेश भगवान का मंदिर भी बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। रामनगरी के हाईवे के पास 51 फीट ऊंचा गणेश जी का मंदिर रामादल ट्रस्ट द्वारा बनाया जाएगा जो रामनगरी की धार्मिक आभा में चार चांद लगाएगा। मंदिर निर्माण का काम गणेश चतुर्थी यानी 31 मार्च से शुरू होकर 2024 की विजयादशमी तक पूरा करने का लक्ष्य है। मंदिर की डिजाइन भी तैयार की जा चुकी है।
रामादल के अध्यक्ष पंडित कल्किराम ने बताया कि यह अयोध्या में गणेश जी का पहला मंदिर होगा। मंदिर में हरिद्रा गणेश के अलावा उनकी पत्नी ऋद्धि-सिद्धि और दोनों पुत्र क्षेमा और लाभ भी विराजमान होंगे। उन्होंने बताया कि मणिपर्वत के समीप ही श्रीगणेश जी का कुंड रामनगरी में विद्यमान है, लेकिन अब उसकी आभा नष्ट हो चुकी है। कुंड का अस्तित्व मिटने की कगार पर है।
अयोध्याजी में सनातन धर्म के सभी देवी-देवताओं के मंदिर प्रतिष्ठित हैं लेकिन भगवान गणेश का कोई मंदिर नहीं है। उन्होंने बताया कि यद्यपि शिवालयों में श्रीगणेश जी विराजमान हैं, जहां शिवजी के पूजन के समय उनकी आंशिक (संक्षिप्त) पूजा-अर्चना की जाती है। श्रीगणेश जी का कोई प्रधान मंदिर नहीं है। पंडित कल्किराम ने बताया कि राष्ट्र मंदिर निर्माण की बाधाओं का शमन करने के लिए भगवान गणेश की आराधना अति आवश्यक है।
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इसी संकल्प को मूर्त रूप देने के उद्देश्य से गणेश चतुर्थी को दुग्धाभिषेक करते हुए अयोध्याजी की परिक्रमा कर मंदिर निर्माण स्थल पर मध्याह्न बेला के अभिजित मुहूर्त में 31 मार्च को भूमि पूजन किया जाएगा। मंदिर 51 फीट ऊंचा होगा। श्रीगणेश जी का भव्य और दिव्य मंदिर बाईपास मार्ग से अयोध्या में प्रवेश द्वार के समीप ही होगा। हरिद्रा गणेश की महिमा भगवती पीतांबरा बगलामुखी माताजी की तरह अत्यंत प्रभावशाली है। धर्मग्रंथों के मतानुसार हरिद्रा गणेश की पूजा-अर्चना करने वाले जातकों का विरोध करने वाले का बल-बुद्धि श्रीगणेश जी की कृपा से नष्ट हो जाता है।
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रामादल के अध्यक्ष पंडित कल्किराम ने बताया कि यह अयोध्या में गणेश जी का पहला मंदिर होगा। मंदिर में हरिद्रा गणेश के अलावा उनकी पत्नी ऋद्धि-सिद्धि और दोनों पुत्र क्षेमा और लाभ भी विराजमान होंगे। उन्होंने बताया कि मणिपर्वत के समीप ही श्रीगणेश जी का कुंड रामनगरी में विद्यमान है, लेकिन अब उसकी आभा नष्ट हो चुकी है। कुंड का अस्तित्व मिटने की कगार पर है।
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अयोध्याजी में सनातन धर्म के सभी देवी-देवताओं के मंदिर प्रतिष्ठित हैं लेकिन भगवान गणेश का कोई मंदिर नहीं है। उन्होंने बताया कि यद्यपि शिवालयों में श्रीगणेश जी विराजमान हैं, जहां शिवजी के पूजन के समय उनकी आंशिक (संक्षिप्त) पूजा-अर्चना की जाती है। श्रीगणेश जी का कोई प्रधान मंदिर नहीं है। पंडित कल्किराम ने बताया कि राष्ट्र मंदिर निर्माण की बाधाओं का शमन करने के लिए भगवान गणेश की आराधना अति आवश्यक है।
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इसी संकल्प को मूर्त रूप देने के उद्देश्य से गणेश चतुर्थी को दुग्धाभिषेक करते हुए अयोध्याजी की परिक्रमा कर मंदिर निर्माण स्थल पर मध्याह्न बेला के अभिजित मुहूर्त में 31 मार्च को भूमि पूजन किया जाएगा। मंदिर 51 फीट ऊंचा होगा। श्रीगणेश जी का भव्य और दिव्य मंदिर बाईपास मार्ग से अयोध्या में प्रवेश द्वार के समीप ही होगा। हरिद्रा गणेश की महिमा भगवती पीतांबरा बगलामुखी माताजी की तरह अत्यंत प्रभावशाली है। धर्मग्रंथों के मतानुसार हरिद्रा गणेश की पूजा-अर्चना करने वाले जातकों का विरोध करने वाले का बल-बुद्धि श्रीगणेश जी की कृपा से नष्ट हो जाता है।