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कृषि विद्यालय के दो शिक्षकों में हुई हाथापाई, एक निलंबित
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अयोध्या। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज परिसर स्थित भारतीय स्टेट बैंक की शाखा के प्रबंधक कक्ष में कृषि विश्वविद्यालय के दो शिक्षकों के बीच हाथापाई किए जाने का मामला प्रकाश में आया है।
घटना के बाद दोनों शिक्षकों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते हुए कुमारगंज पुलिस को तहरीर दी है। मामले में कुलपति ने एक शिक्षक को निलंबित कर दूसरे जनपद के एक महाविद्यालय से संबद्ध कर दिया है।
अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. डी नियोगी गुरुवार शाम करीब सात बजे विश्वविद्यालय परिसर स्थित भारतीय स्टेट बैंक शाखा के प्रबंधक भास्कर पांडे के कार्यालय कक्ष में बैठे हुए थे।
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इसी बीच विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. रमेश प्रताप सिंह भी बैंक प्रबंधक कक्ष में पहुंच गए। डॉ. रमेश प्रताप सिंह का आरोप है कि शाखा प्रबंधक के सामने ही उनके विरुद्ध प्रचलित एक जांच प्रकरण को लेकर डॉ. डी नियोगी ने उनसे बिना पैसे के जांच कमेटी द्वारा उनके पक्ष में रिपोर्ट प्रेषित न किए जाने की बात कही।
उनका आरोप है कि अधिष्ठाता छात्र कल्याण जांच कमेटी के सदस्य हैं और उन्होंने दो लाख रुपये सुविधा शुल्क की मांग की। जिसे दोनों लोगों में वार्ता होते-होते कहासुनी और हाथापाई होने लगी।
उनका आरोप है कि वह 2008 से हृदय रोग से पीड़ित हैं। उनका इलाज आज भी लखनऊ पीजीआई से चल रहा है। बैंक में मौजूद शाखा प्रबंधक सहित अन्य कर्मियों ने बीच बचाव किया।
उधर अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. डी नियोगी का आरोप है कि डॉ. रमेश प्रताप सिंह ही उनसे भिड़ गए थे। उन्हें लात घूसों से मारा पीटा है। घटना के बाद विश्वविद्यालय के सुरक्षा प्रभारी राजेश कुमार सिंह, अधिष्ठाता छात्र कल्याण को साथ लेकर थाने पहुंचे और सहायक प्राध्यापक के खिलाफ केस कायम कराए जाने हेतु तहरीर दी।
थानाध्यक्ष वीर सिंह का कहना है कि दोनों पक्षों से तहरीर मिली है। जांच कराई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही मामले में प्राथमिकी कायम की जाएगी।
वहीं मामले की जानकारी होने पर विश्वविद्यालय के कुलपति ब्रजेंद्र सिंह ने सहायक प्राध्यापक डॉ. रमेश प्रताप सिंह को निलंबित कर उन्हें आजमगढ़ कृषि महाविद्यालय कोटवा से संबद्ध कर दिया है।
कुलपति के आदेश के क्रम में विश्वविद्यालय के निदेशक प्रशासन एवं परिवीक्षण डॉ. एके सिंह ने उक्त आशय का आदेश भी शुक्रवार को जारी कर दिया है।
निलंबित किए गए सहायक प्राध्यापक डॉ. रमेश प्रताप सिंह का कहना है कि उनके विरुद्ध गबन का मुकदमा वर्ष 2019 में कायम हुआ था। जिसमें कई जांच एजेंसियों ने जांच भी की और अंतिम रिपोर्ट न्यायालय को प्रेषित की जा चुकी है।
दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन भी जांच कमेटी गठित कर जांच करवा रहा है। जिसमें एक बार जांच कमेटी ने रिपोर्ट भी प्रेषित कर दी थी, किंतु मुझे परेशान करने की नियत से विश्वविद्यालय प्रशासन ने फिर से जांच कमेटी गठित कर दी है।
जिसके चलते उनका वेतनमान आज तक प्रभावित चल रहा है। कहा विवि प्रशासन द्वारा एक तरफा कार्रवाई की गई है। वहीं विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा लिया गया निर्णय विश्वविद्यालय परिसर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
विश्वविद्यालय कर्मियों का कहना है कि कार्यालय अवधि के बाद हुए विवाद में बिना कोई जांच कमेटी गठित कर मात्र पांच लोगों की मीटिंग बुलाकर आनन-फानन निर्णय लिया जाना सेवा नियमावली के विरुद्ध है।
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घटना के बाद दोनों शिक्षकों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते हुए कुमारगंज पुलिस को तहरीर दी है। मामले में कुलपति ने एक शिक्षक को निलंबित कर दूसरे जनपद के एक महाविद्यालय से संबद्ध कर दिया है।
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अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. डी नियोगी गुरुवार शाम करीब सात बजे विश्वविद्यालय परिसर स्थित भारतीय स्टेट बैंक शाखा के प्रबंधक भास्कर पांडे के कार्यालय कक्ष में बैठे हुए थे।
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इसी बीच विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. रमेश प्रताप सिंह भी बैंक प्रबंधक कक्ष में पहुंच गए। डॉ. रमेश प्रताप सिंह का आरोप है कि शाखा प्रबंधक के सामने ही उनके विरुद्ध प्रचलित एक जांच प्रकरण को लेकर डॉ. डी नियोगी ने उनसे बिना पैसे के जांच कमेटी द्वारा उनके पक्ष में रिपोर्ट प्रेषित न किए जाने की बात कही।
उनका आरोप है कि अधिष्ठाता छात्र कल्याण जांच कमेटी के सदस्य हैं और उन्होंने दो लाख रुपये सुविधा शुल्क की मांग की। जिसे दोनों लोगों में वार्ता होते-होते कहासुनी और हाथापाई होने लगी।
उनका आरोप है कि वह 2008 से हृदय रोग से पीड़ित हैं। उनका इलाज आज भी लखनऊ पीजीआई से चल रहा है। बैंक में मौजूद शाखा प्रबंधक सहित अन्य कर्मियों ने बीच बचाव किया।
उधर अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. डी नियोगी का आरोप है कि डॉ. रमेश प्रताप सिंह ही उनसे भिड़ गए थे। उन्हें लात घूसों से मारा पीटा है। घटना के बाद विश्वविद्यालय के सुरक्षा प्रभारी राजेश कुमार सिंह, अधिष्ठाता छात्र कल्याण को साथ लेकर थाने पहुंचे और सहायक प्राध्यापक के खिलाफ केस कायम कराए जाने हेतु तहरीर दी।
थानाध्यक्ष वीर सिंह का कहना है कि दोनों पक्षों से तहरीर मिली है। जांच कराई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही मामले में प्राथमिकी कायम की जाएगी।
वहीं मामले की जानकारी होने पर विश्वविद्यालय के कुलपति ब्रजेंद्र सिंह ने सहायक प्राध्यापक डॉ. रमेश प्रताप सिंह को निलंबित कर उन्हें आजमगढ़ कृषि महाविद्यालय कोटवा से संबद्ध कर दिया है।
कुलपति के आदेश के क्रम में विश्वविद्यालय के निदेशक प्रशासन एवं परिवीक्षण डॉ. एके सिंह ने उक्त आशय का आदेश भी शुक्रवार को जारी कर दिया है।
निलंबित किए गए सहायक प्राध्यापक डॉ. रमेश प्रताप सिंह का कहना है कि उनके विरुद्ध गबन का मुकदमा वर्ष 2019 में कायम हुआ था। जिसमें कई जांच एजेंसियों ने जांच भी की और अंतिम रिपोर्ट न्यायालय को प्रेषित की जा चुकी है।
दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन भी जांच कमेटी गठित कर जांच करवा रहा है। जिसमें एक बार जांच कमेटी ने रिपोर्ट भी प्रेषित कर दी थी, किंतु मुझे परेशान करने की नियत से विश्वविद्यालय प्रशासन ने फिर से जांच कमेटी गठित कर दी है।
जिसके चलते उनका वेतनमान आज तक प्रभावित चल रहा है। कहा विवि प्रशासन द्वारा एक तरफा कार्रवाई की गई है। वहीं विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा लिया गया निर्णय विश्वविद्यालय परिसर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
विश्वविद्यालय कर्मियों का कहना है कि कार्यालय अवधि के बाद हुए विवाद में बिना कोई जांच कमेटी गठित कर मात्र पांच लोगों की मीटिंग बुलाकर आनन-फानन निर्णय लिया जाना सेवा नियमावली के विरुद्ध है।