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राम का व्यक्तित्व और कृतित्व बहुआयामी ः राज्यपाल
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 16 Dec 2015 12:00 AM IST
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राम का व्यक्तित्व और कृतित्व बहुआयामी है। राम ने ऐसा आदर्श प्रस्तुत किया जो पूरे विश्व में नहीं मिलता। पुत्र कैसा हो, भाई कैसा हो, पति कैसा हो, पिता कैसा हो और राजा कैसा हो, सभी के आदर्श के प्रतीक रहे हैं राम। यह बातें मंगलवार को राज्यपाल रामनाईक ने रामकथा पार्क में आयोजित 34वें रामायण मेला के उद्घाटन अवसर पर कहीं।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग राम की वाङमयी कथा कहते हैं। जीवन के सभी क्षेत्रों में राम ने अपने व्यवहार से अपना व्यक्तित्व दिखाया है। राम की कृति भारत के गांव-गांव में गई। रामायण मेले का आयोजन बहुत सुंदर है। यह भारत की संस्कृति की देन है। राम आनंद, दुख, दर्द, खुशी सभी जगह आते हैं।
महाराष्ट्र में जब कोई मिलता है तो राम-राम ही कहता है। संसार में आते समय और जाते समय राम-राम का ही नाम आता है। भारतीय लोगों के रोम-रोम में राम भरे हैं। जब संचार व्यवस्था नहीं थी तब इंडोनेशिया में कैसे राम की कृति पहुंची होगी यह सोचने का विषय है।
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वहां पर मुस्लिम समाज भी राम की भक्ति करता है। श्री नाईक ने कहा कि रामायण मेले की कल्पना समाजवादी विचारक चिंतक राम मनोहर लोहिया ने की। यह अपने आपमें सबको इकट्ठा करने का काम है, जो राम के नाम पर होता है।
कहा कि रामायण मेले की परिकल्पना राम मनोहर लोहिया ने की तो उनके विचार दर्शन को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि रामपुर के रजा लाइब्रेरी में अरबी, फारसी में रामायण लिखा है। गीत, चित्र या जितनी भी अभिव्यक्ति के साधन है, उसमें रामकथा होती है। आज भी रामलीला का मंचन लोग देखने जाते हैं।
कहा कि राम सबसे बड़े मुझे तब नजर आते हैं जब लंका को विजय करने के बाद भी अयोध्या में रहने की बात करते हैं न कि लंका में। कहा कि महात्मा गांधी से पूछा गया कि भारत स्वतंत्र हो गया क्या होना चाहिए, तो उन्होंने कहा कि यहां रामराज्य होना चाहिए। राम की कथा जीवन को दिशा देती है।
लोकायुक्त के चयन के सवाल पर कहा कि यह समिति के पदाधिकारियों की जिम्मेदारी है, वे ही बैठक में इस पर निर्णय लेंगे। विश्वविद्यालयों के कुलपति के पांच साल के कार्यकाल के सवाल पर कहा कि केंद्र की तरह प्रदेश में कुलपतियों का कार्यकाल पांच साल का होना चाहिए।
मैने प्रस्ताव राज्य सरकार को दिया है। जो एक्ट बना था, उसमें सुधार होना चाहिए। कुलपतियों को काम करने का समय मिलना चाहिए। वन राज्यमंत्री तेज नारायण पांडेय ने कहा कि इस धरती से आदर्श, तपस्या, बलिदान का संदेश दिया गया है। आज भी यहां राम का संस्कार जिंदा है।
समारोह की अध्यक्षता श्रीराम जन्मभूमि न्यास के कार्याध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने की। समारोह में महंत कौशल किशोर फलाहारी, अवध विवि के कुलपति प्रो. जीसीआर जायसवाल, नरेंद्रदेव कृषि विवि के कुलपति प्रो. अख्तर हसीब, महंत सुरेश दास, महंत नारायणाचारी आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि कुछ लोग राम की वाङमयी कथा कहते हैं। जीवन के सभी क्षेत्रों में राम ने अपने व्यवहार से अपना व्यक्तित्व दिखाया है। राम की कृति भारत के गांव-गांव में गई। रामायण मेले का आयोजन बहुत सुंदर है। यह भारत की संस्कृति की देन है। राम आनंद, दुख, दर्द, खुशी सभी जगह आते हैं।
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महाराष्ट्र में जब कोई मिलता है तो राम-राम ही कहता है। संसार में आते समय और जाते समय राम-राम का ही नाम आता है। भारतीय लोगों के रोम-रोम में राम भरे हैं। जब संचार व्यवस्था नहीं थी तब इंडोनेशिया में कैसे राम की कृति पहुंची होगी यह सोचने का विषय है।
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वहां पर मुस्लिम समाज भी राम की भक्ति करता है। श्री नाईक ने कहा कि रामायण मेले की कल्पना समाजवादी विचारक चिंतक राम मनोहर लोहिया ने की। यह अपने आपमें सबको इकट्ठा करने का काम है, जो राम के नाम पर होता है।
कहा कि रामायण मेले की परिकल्पना राम मनोहर लोहिया ने की तो उनके विचार दर्शन को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि रामपुर के रजा लाइब्रेरी में अरबी, फारसी में रामायण लिखा है। गीत, चित्र या जितनी भी अभिव्यक्ति के साधन है, उसमें रामकथा होती है। आज भी रामलीला का मंचन लोग देखने जाते हैं।
कहा कि राम सबसे बड़े मुझे तब नजर आते हैं जब लंका को विजय करने के बाद भी अयोध्या में रहने की बात करते हैं न कि लंका में। कहा कि महात्मा गांधी से पूछा गया कि भारत स्वतंत्र हो गया क्या होना चाहिए, तो उन्होंने कहा कि यहां रामराज्य होना चाहिए। राम की कथा जीवन को दिशा देती है।
लोकायुक्त के चयन के सवाल पर कहा कि यह समिति के पदाधिकारियों की जिम्मेदारी है, वे ही बैठक में इस पर निर्णय लेंगे। विश्वविद्यालयों के कुलपति के पांच साल के कार्यकाल के सवाल पर कहा कि केंद्र की तरह प्रदेश में कुलपतियों का कार्यकाल पांच साल का होना चाहिए।
मैने प्रस्ताव राज्य सरकार को दिया है। जो एक्ट बना था, उसमें सुधार होना चाहिए। कुलपतियों को काम करने का समय मिलना चाहिए। वन राज्यमंत्री तेज नारायण पांडेय ने कहा कि इस धरती से आदर्श, तपस्या, बलिदान का संदेश दिया गया है। आज भी यहां राम का संस्कार जिंदा है।
समारोह की अध्यक्षता श्रीराम जन्मभूमि न्यास के कार्याध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने की। समारोह में महंत कौशल किशोर फलाहारी, अवध विवि के कुलपति प्रो. जीसीआर जायसवाल, नरेंद्रदेव कृषि विवि के कुलपति प्रो. अख्तर हसीब, महंत सुरेश दास, महंत नारायणाचारी आदि मौजूद रहे।