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कुछ ऐसा होगा अयोध्या में बनने वाला राम मंदिर, हर धर्म की धरोहरों को सहजने की तैयारी
सार
- राममंदिर निर्माण के साथ 100 वर्ग किमी बढ़ेगा दायरा, धर्मनगरी में चार नगर होंगे खास
- विश्व का सर्वाधिक लोकप्रिय धार्मिक केंद्र बनाने के लिए सनातन धर्म की सजेगी गौरवगाथा
- अयोध्या में बौद्ध, सिख, जैन व इस्लाम धर्म के पैगंबरों की धरोहरें भी सहेजने की है तैयारी
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अयोध्या में राम मंदिर की प्रस्तावित संरचना
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
रामायण सर्किट योजना बनने के पांच साल बाद अब अयोध्या इसका गेट-वे होगा। यहां से रामायणकालीन स्थलों तक आवागमन के लिए सड़क-वायु व जलमार्ग के साथ विश्वस्तरीय पर्यटन सुविधाएं मिलेंगी। रामलला के भव्य मंदिर निर्माण के साथ शहर का दायरा 100 वर्ग किमी. बढ़ाने का प्रस्ताव है। धर्मनगरी में चार खास नगर होंगे, जिसमें सरयू से पौराणिक स्वर्गद्वार होकर श्रीरामजन्मभूमि मंदिर तक त्रेतायुगीन रामनगरी का दर्शन होगा तो सरयू किनारे गुप्तारघाट तक सीताझील और ग्रीन सिटी इक्ष्वाकुपुरी का आकर्षण होगा।
जबकि श्रीराम की 251 मीटर ऊंची प्रतिमा के नीचे आधुनिक पर्यटन सुविधाएं विकसित होंगी। नव्य अयोध्या हाईवे के निकट 15 वर्ग किमी. क्षेत्र में होगी, जिसके पहले फेज में दो सौ एकड़ भूमि के अधिग्रहण का प्रस्ताव है। कहि न जाई कुछ नगर बिभूती। जनु एतनिय बिरंचि करतूती।। अर्थात नगर का ऐश्वर्य कुछ कहा नहीं जाता, ऐसा जान पड़ता है, मानो ब्रह्मा जी की कारीगरी बस इतनी ही है। रामचरित मानस में वर्णित यह दृश्य अब नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ सरकार को फिर से जमीं पर उतारने की चुनौती है। सरकार भी पर्यटन सुविधाओं के लिए हाथ खोलकर धन खर्च करने की तैयारी में है।
नगर निगम, अयोध्या विकास प्राधिकरण के साथ पर्यटन व संस्कृति विभाग एक साथ अयोध्या के विकास का खाका बना रही हैं। पहली बार केंद्र की सत्ता संभालने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामायण सर्किट योजना के जरिए एक हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था की थी, लेकिन अयोध्या में राममंदिर विवाद पर लटके फैसले से तमाम देशी-विदेशी कंपनियों से सर्वे के बाद भी छिटपुट काम के लिए खास समन्वित विकास नहीं दिखा।
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जबकि श्रीराम की 251 मीटर ऊंची प्रतिमा के नीचे आधुनिक पर्यटन सुविधाएं विकसित होंगी। नव्य अयोध्या हाईवे के निकट 15 वर्ग किमी. क्षेत्र में होगी, जिसके पहले फेज में दो सौ एकड़ भूमि के अधिग्रहण का प्रस्ताव है। कहि न जाई कुछ नगर बिभूती। जनु एतनिय बिरंचि करतूती।। अर्थात नगर का ऐश्वर्य कुछ कहा नहीं जाता, ऐसा जान पड़ता है, मानो ब्रह्मा जी की कारीगरी बस इतनी ही है। रामचरित मानस में वर्णित यह दृश्य अब नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ सरकार को फिर से जमीं पर उतारने की चुनौती है। सरकार भी पर्यटन सुविधाओं के लिए हाथ खोलकर धन खर्च करने की तैयारी में है।
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नगर निगम, अयोध्या विकास प्राधिकरण के साथ पर्यटन व संस्कृति विभाग एक साथ अयोध्या के विकास का खाका बना रही हैं। पहली बार केंद्र की सत्ता संभालने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामायण सर्किट योजना के जरिए एक हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था की थी, लेकिन अयोध्या में राममंदिर विवाद पर लटके फैसले से तमाम देशी-विदेशी कंपनियों से सर्वे के बाद भी छिटपुट काम के लिए खास समन्वित विकास नहीं दिखा।
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देश में वैष्णो देवी, तिरुपति, सोमनाथ आदि मंदिरों के अध्ययन के बाद यूनेस्को की धरोहर और विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में एक कंबोडिया के अंकोरवाट में भगवान विष्णु मंदिर की तर्ज पर विकसित करने के लिए सियाम रीप के गेट-वे मॉडल की तर्ज पर अयोध्या को धर्म-संस्कृति, आध्यात्म का भव्य गेट-वे सिटी बनाने का खाका तैयार हो रहा है। लेकिन अभी सारी तैयारी गूगल मैपिंग तक सीमित है, जब जमीन पर सर्वे शुरू होगा तो सामने आएगा कि कितनी भूमि का अधिग्रहण करना होगा और किस-किस के खेत-मकान व दुकानें जद में आ रही हैं।
पुरातात्विक प्रतिनिधित्व की निरंतरता, जिसमें कनक भवन, हनुमानगढ़ी, नागेश्वरनाथ मन्दिर, छोटी व बड़ी छावनी और सप्तहरि मंदिर उल्लेेखनीय हैं। वाल्मीकि रामायण भवन की दीवार पर वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण के 24 हजार श्लोक दर्शाए गए हैं, जो पूरे देश में केवल यहीं हैं। उन्होंने बताया कि अयोध्या का संबंध भारत के प्रमुख पांच धर्मों से है। अयोध्या में 2 हजार हिंदू मंदिर, 62 जातीय मंदिर, सौ मुस्लिम धर्म स्थल, सिख गुरुद्वारा, प्राचीन बौद्ध स्थल के प्रतीक और पांच जैन तीर्थकरों के जन्म से संबंधित मंदिर प्रमुख हैं। यह धर्म स्थल मानव मूल्य का परिचायक है। पुरातात्विक साक्ष्यों के माध्यम से यह प्रमाणित हो गया है कि अयोध्या 8 सौ ईसा पूर्व के बाद से निरंतर अधिवासित रही है। रामकथा, रामलीला, रामनाम जाप और रामजन्म बधाई उत्सव जैसी परंपराएं और रीति.रिवाज अयोध्या के सांस्कृतिक अमूर्त धरोहर का प्रदर्शन करती रही है।
विश्वस्तरीय सुविधायुक्त बनाने के लिए एजेंसियां कर रहीं काम
नगरनिगम आयुक्त व अयोध्या विकास प्राधिकरण के प्रभारी उपाध्यक्ष नीरज शुक्ला कहते हैं कि अयोध्या को विश्वस्तरीय सुविधायुक्त बड़ा पर्यटक स्थल बनाने के लिए सभी एजेंसियां तैयारी कर रही है। नगर बसाने की योजना शासन की है, इसका ब्लूप्रिंट आने के बाद अधिग्रहण आदि का सर्वे होगा। सबसे बड़ी नव्य अयोध्या के लिए हाईवे के पूरब मां-बरहेटा आदि गांवों की भूमि में योजना प्रस्तावित करते हुए पहले फेज में दो सौ एकड़ भूमि के अधिग्रहण का प्रस्ताव तैयार हुआ है। नगर निगम का दायरा पहले 35 वर्ग किमी था, जिसे 54 वर्ग किमी और बढ़ाकर 89 वर्ग किमी करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इसके अलावा अयोध्या विकास प्राधिकरण का दायरा अब नगर निगम की सीमा से चारों तरफ जिले में 8 किमी और बढ़ जाएगा।यूनेस्को में दर्ज होगी अयोध्या की प्राचीनता
सरयू नदी से स्वर्गद्वार होते हुए रामकोट स्थित श्रीरामजन्मभूमि मंदिर तक पांच किमी वर्ग एरिया में प्राचीन अयोध्या को त्रेतायुग जैसा लुक देने की तैयारी है। इसकी प्राचीनता को यूनेस्को में दर्ज कराया जाएगा। एशियन कल्चरल लैंडस्केप एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. शुंग क्यून किम यहां आकर अध्ययन कर चुके हैं। इतिहास व पुरातत्व विभाग के प्रो. डॉ अजय प्रताप सिंह कहते हैं कि यूनेस्को की धरोहर में शामिल होने के जो 10 मूल्य तय किए गए हैं, उनमें 8 मूल्यों पर अयोध्या खरी उतरती है। अयोध्या में वास्तु शिल्पित उत्कृष्ट कृति के कई उदाहरण अंतर्निहित हैं।पुरातात्विक प्रतिनिधित्व की निरंतरता, जिसमें कनक भवन, हनुमानगढ़ी, नागेश्वरनाथ मन्दिर, छोटी व बड़ी छावनी और सप्तहरि मंदिर उल्लेेखनीय हैं। वाल्मीकि रामायण भवन की दीवार पर वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण के 24 हजार श्लोक दर्शाए गए हैं, जो पूरे देश में केवल यहीं हैं। उन्होंने बताया कि अयोध्या का संबंध भारत के प्रमुख पांच धर्मों से है। अयोध्या में 2 हजार हिंदू मंदिर, 62 जातीय मंदिर, सौ मुस्लिम धर्म स्थल, सिख गुरुद्वारा, प्राचीन बौद्ध स्थल के प्रतीक और पांच जैन तीर्थकरों के जन्म से संबंधित मंदिर प्रमुख हैं। यह धर्म स्थल मानव मूल्य का परिचायक है। पुरातात्विक साक्ष्यों के माध्यम से यह प्रमाणित हो गया है कि अयोध्या 8 सौ ईसा पूर्व के बाद से निरंतर अधिवासित रही है। रामकथा, रामलीला, रामनाम जाप और रामजन्म बधाई उत्सव जैसी परंपराएं और रीति.रिवाज अयोध्या के सांस्कृतिक अमूर्त धरोहर का प्रदर्शन करती रही है।